गोल्डी बरार-रोहित गोदारा गैंग की यूपी में एंट्री नाकाम



दुनिया में दहशत का दूसरा नाम बने गोल्डी बरार, रोहित गोदारा और लॉरेंस बिश्नोई गैंग की कोशिशें कई राज्यों में सफल रहीं, लेकिन उत्तर प्रदेश में हर बार इन्हें हार का सामना करना पड़ा। ताजा मामला फिल्म अभिनेत्री दिशा पाटनी के घर पर फायरिंग का है। इस वारदात को अंजाम देकर गोल्डी और रोहित गोदारा ने यूपी में पैर जमाने की रणनीति बनाई थी, लेकिन यूपी एसटीएफ ने केवल छह दिनों में केस का खुलासा करते हुए दोनों शूटरों को मुठभेड़ में मार गिराया।


हरियाणा से पंजाब तक आतंक, पर यूपी में नाकामी

हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और दिल्ली में दहशत फैलाने वाले इन गैंगों के सदस्य कई बार उत्तर प्रदेश में भी सक्रिय हुए, लेकिन यहां उन्हें कभी सफलता नहीं मिली। यूपी एसटीएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने लगातार कार्रवाई कर उनकी योजनाओं को ध्वस्त कर दिया।

लॉरेंस और गोल्डी की राहें जुदा

शुरुआत में लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बरार एक साथ यूपी में नेटवर्क बनाने की कोशिश कर रहे थे। बुलंदशहर से बड़े पैमाने पर असलहे भी सप्लाई हो रहे थे। लेकिन कुछ समय पहले पैसों के बंटवारे को लेकर दोनों में विवाद हुआ और दोनों अलग हो गए। इसके बाद गोल्डी के साथ रोहित गोदारा और काला जठेड़ी जुड़े, जिनके पास बड़ी संख्या में शूटर मौजूद हैं। इसी गठजोड़ ने दिशा पाटनी के घर पर हमला कर यूपी में दबदबा बनाने का प्रयास किया, लेकिन एसटीएफ ने तगड़ा जवाब देकर उनकी योजना नाकाम कर दी।


कई राज्यों को राहत दे चुकी है यूपी एसटीएफ

यूपी एसटीएफ ने पहले भी इन गैंगों के खिलाफ कड़े कदम उठाए हैं। मई में नोएडा यूनिट ने लॉरेंस गैंग के कुख्यात शूटर नवीन कसाना को हापुड़ में मुठभेड़ में ढेर किया था। नवीन गाजियाबाद का रहने वाला था और मकोका केस में दिल्ली पुलिस का वॉन्टेड अपराधी था।
इसी तरह दिसंबर 2024 में मेरठ से लॉरेंस गैंग के एक लाख इनामी अपराधी मनप्रीत सिंह उर्फ सन्नी को भी पकड़ा गया। वह लॉरेंस के करीबी वीरेंद्र सिंह के जरिए उसके चाचा दर्शन सिंह के संपर्क में आया था। मेरठ में व्यापारी तीरथ सिंह की हत्या के लिए उसने विदेशी पिस्टल खरीदी थी, जिसका भुगतान हवाला से कैलिफोर्निया से किया गया था।


बाबा सिद्दीकी कांड में भी यूपी से लिंक

मुंबई में एनसीपी विधायक बाबा सिद्दीकी की हत्या की साजिश रचने वाले लॉरेंस गैंग के शूटरों को भी यूपी एसटीएफ ने ही गिरफ्तार किया था। इनमें मुख्य शूटर शिवा कुमार बहराइच का निवासी था। इसी कार्रवाई में गौतम, अनुयग कश्यप, ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी, आकाश श्रीवास्तव और अखिलेंद्र प्रताप सिंह को भी पकड़ा गया था।


यूपी के युवाओं का अपराध में इस्तेमाल

इन गैंगों की एक खास रणनीति रही है—वारदातों के लिए उत्तर प्रदेश के युवाओं, खासकर नाबालिगों और कम उम्र के लड़कों को इस्तेमाल करना। मोहाली के इंटेलिजेंस हेडक्वॉर्टर पर हुए आरपीजी अटैक में अयोध्या के कुतुबपुर का नाबालिग मुख्य आरोपित था, जिसे एनआईए ने गिरफ्तार किया।


गुरुग्राम के दो बार पर बस से हुए हमले में मेरठ के सचिन तालियान का नाम सामने आया। वहीं जयपुर के कारोबारी अक्षय गोसानी पर रंगदारी के लिए हुए हमले में आगरा निवासी प्रदीप शुक्ला शामिल था। इसके अलावा 2023 में अबाला में व्यापारी से 30 लाख की रंगदारी वसूलने के लिए हुई फायरिंग में प्रयुक्त असलहे गोरखपुर के चिलुआताल निवासी मनीश यादव ने सप्लाई किए थे।


यूपी की सख्ती बनी सबसे बड़ी चुनौती

गोल्डी बरार, रोहित गोदारा और लॉरेंस बिश्नोई जैसे गैंग भले ही हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में अपने खौफ के लिए जाने जाते हों, लेकिन उत्तर प्रदेश में इनकी हर साजिश अब तक धराशायी हुई है। दिशा पाटनी के घर पर हमला कर यूपी में पैर जमाने का ताजा प्रयास भी नाकाम रहा। लगातार की जा रही सख्त कार्रवाई और तेज़ी से खुलासे इन गैंगों के लिए यूपी को सबसे चुनौतीपूर्ण राज्य बना चुके हैं।

Leave a Reply

Discover more from Apna Bharat Times

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading