वर्ष 2024 की आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट भर्ती में हो रही देरी को लेकर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने लखनऊ (Lucknow) में मंत्री डॉ. दया शंकर मिश्र ‘दयालु’ के आवास का घेराव किया। प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने नारेबाजी करते हुए भर्ती प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने की मांग उठाई। उनका कहना है कि लंबे समय से लंबित यह प्रक्रिया युवाओं के भविष्य को प्रभावित कर रही है और सरकार को इस दिशा में ठोस पहल करनी चाहिए।
51 तारीखों के बाद भी लंबित मामला:
अभ्यर्थियों के अनुसार भर्ती प्रक्रिया न्यायालय में लंबित है और अब तक 51 तारीखें पड़ चुकी हैं, लेकिन कोई अंतिम निर्णय नहीं निकल सका है। लगातार बढ़ती सुनवाई की तारीखों से उम्मीदवारों में निराशा और असंतोष बढ़ रहा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकारी पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी न होने के कारण मामला आगे नहीं बढ़ पा रहा है, जिससे नियुक्ति प्रक्रिया अटकी हुई है।
युवाओं के भविष्य को लेकर चिंता:
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने कहा कि उन्होंने वर्षों की मेहनत और तैयारी के बाद इस भर्ती में आवेदन किया था, लेकिन देरी के कारण उनका भविष्य अधर में लटक गया है। कई उम्मीदवारों की आयु सीमा भी प्रभावित हो रही है, जिससे उनकी चिंता और अधिक बढ़ गई है। उनका कहना है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं निकला तो बड़ी संख्या में योग्य अभ्यर्थी अवसर से वंचित हो सकते हैं।
प्रदेश में बड़ी संख्या में रिक्त पद:
अभ्यर्थियों का दावा है कि प्रदेश में आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट के लगभग 60 प्रतिशत पद रिक्त हैं। सरकार की ओर से 1002 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी, जबकि कुल स्वीकृत पदों की संख्या लगभग 2100 बताई जा रही है। इनमें से करीब 1200 पद अब भी खाली हैं। उनका कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में पद रिक्त रहने से स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर असर का आरोप:
प्रदर्शनकारियों के अनुसार रिक्त पदों के कारण आयुष और संबंधित स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है। विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में दवाओं के वितरण तथा फार्मेसी संचालन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि समय पर नियुक्तियां होने से व्यवस्था में सुधार संभव है।
बेंच-वाइज निर्णय और परीक्षा की मांग:
अभ्यर्थियों ने मांग की कि न्यायालय में बेंच-वाइज निर्णय कराकर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। इसके अतिरिक्त उन्होंने सुझाव दिया कि यदि आवश्यक हो तो Uttar Pradesh Subordinate Services Selection Commission के माध्यम से लिखित परीक्षा आयोजित कर भर्ती प्रक्रिया पूरी कराई जाए। उनका कहना है कि सरकार को स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्राथमिकता के आधार पर हस्तक्षेप करना चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी और शीघ्र समाधान की अपेक्षा जताई। अब सभी की नजरें सरकार और न्यायालय की आगामी कार्यवाही पर टिकी हैं, जिससे लंबित भर्ती प्रक्रिया को अंतिम रूप मिल सके।
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