लोकसभा (Lok Sabha) में मंगलवार को उस समय राजनीतिक माहौल गरमा गया जब विपक्षी दलों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Om Birla) को पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव को सदन में 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिला, जिसके बाद पीठासीन ने इसे पेश करने की अनुमति दे दी। प्रस्ताव स्वीकार किए जाने के बाद इस पर विस्तृत चर्चा की प्रक्रिया शुरू हुई और सदन में लगभग 10 घंटे तक बहस होने की बात कही गई। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली।
विपक्ष ने लगाए पक्षपात के आरोप:
विपक्षी दलों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Om Birla) पर सदन की कार्यवाही के संचालन में पक्षपात का आरोप लगाया। विपक्ष का कहना था कि सदन की कार्यवाही के दौरान सभी दलों को समान अवसर नहीं मिल रहा है।
कांग्रेस (Congress) के सांसद गौरव गोगोई (Gaurav Gogoi) ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि लोकसभा में विपक्ष की आवाज को पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने डिप्टी स्पीकर की नियुक्ति न होने का मुद्दा भी उठाया और कहा कि जब अध्यक्ष सदन में मौजूद नहीं हों, तब कार्यवाही किसके द्वारा संचालित की जानी चाहिए, इस पर स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।
डिप्टी स्पीकर नियुक्ति पर उठे सवाल:
सदन में बहस के दौरान डिप्टी स्पीकर नियुक्त न किए जाने का मुद्दा भी प्रमुख रूप से सामने आया। विपक्ष का कहना था कि परंपरा के अनुसार डिप्टी स्पीकर का पद विपक्ष को दिया जाता रहा है।
16वीं लोकसभा (Lok Sabha) के दौरान राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार के समय अन्नाद्रमुक (AIADMK) के नेता थंबीदुरई (Thambidurai) को डिप्टी स्पीकर बनाया गया था। हालांकि 17वीं लोकसभा (2019-2024) और 18वीं लोकसभा (2024-वर्तमान) में अब तक किसी भी सदस्य को इस पद पर नियुक्त नहीं किया गया है।
असदुद्दीन ओवैसी ने उठाया पॉइंट ऑफ ऑर्डर:
बहस के दौरान ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के सांसद असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने नियमों का हवाला देते हुए पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाया। उन्होंने कहा कि जब लोकसभा अध्यक्ष को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा हो रही हो, तब अध्यक्ष को कार्यवाही की अध्यक्षता करने का अधिकार नहीं होता।
ओवैसी ने यह भी कहा कि अभी तक डिप्टी स्पीकर नियुक्त नहीं किया गया है और जो सदस्य चेयर पर बैठे हैं, वे भी अध्यक्ष की अनुमति से ही आए हैं। ऐसे में बहस शुरू करने से पहले यह तय किया जाना चाहिए कि कार्यवाही की अध्यक्षता कौन करेगा।
सत्ता पक्ष ने नियमों का दिया हवाला:
विपक्ष के आरोपों पर सत्ता पक्ष के कई नेताओं ने अपनी बात रखी। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद निशिकांत दुबे (Nishikant Dubey) ने कहा कि नियमों के अनुसार चेयर पर बैठा कोई भी पीठासीन सदस्य स्पीकर जैसी शक्तियां रखता है और कार्यवाही की अध्यक्षता कर सकता है।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) ने भी इसी तर्क का समर्थन करते हुए कहा कि सदन की कार्यवाही नियमों के अनुसार ही संचालित की जा रही है। वहीं भाजपा (BJP) के नेता रवि शंकर प्रसाद (Ravi Shankar Prasad) ने भी कहा कि पीठासीन सदस्य को कार्यवाही चलाने का पूरा अधिकार है।
जगदंबिका पाल ने दी स्थिति स्पष्ट:
सदन में चल रही बहस के दौरान पीठासीन सदस्य जगदंबिका पाल (Jagdambika Pal) ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष का पद खाली नहीं है, इसलिए उन्हें कार्यवाही संचालित करने का अधिकार प्राप्त है।
उन्होंने यह भी कहा कि कई सदस्य पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें बाद में बोलने का अवसर दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई (Gaurav Gogoi) को यह भी कहा कि प्रस्ताव का विषय अलग है और आरोप अलग लगाए जा रहे हैं।
डिप्टी स्पीकर का मुद्दा फिर बना चर्चा का केंद्र:
अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान डिप्टी स्पीकर नियुक्त न किए जाने का मुद्दा फिर से चर्चा में आ गया। विपक्ष का कहना है कि यह पद लंबे समय से खाली है और परंपरा के अनुसार इसे विपक्ष को दिया जाना चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 17वीं लोकसभा (Lok Sabha) के दौरान केंद्र सरकार के पास स्पष्ट बहुमत था, इसलिए इस पद को भरने को लेकर सहमति नहीं बन पाई। वहीं 18वीं लोकसभा (Lok Sabha) में भी सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी है।
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