रिपोर्टर: अंकित दुबे
गाजीपुर के जखनिया तहसील क्षेत्र में लेखपालों का धरना प्रदर्शन लगातार जारी है। तहसील के सभी लेखपाल अपनी आठ सूत्रीय लंबित मांगों को लेकर एकजुट होकर विरोध जता रहे हैं। वेतनमान, कार्यक्षेत्र की अत्यधिक दूरी और स्थानांतरण नीति से संबंधित मुद्दों पर लेखपालों ने विभागीय उदासीनता को जिम्मेदार ठहराया है। लेखपालों का कहना है कि वर्ष 2016 से उनकी मांगें लंबित पड़ी हैं और अब धैर्य की सीमा समाप्त होती जा रही है।
लेखपालों की लंबित मांगें और नाराजगी:
तहसील परिसर में प्रदर्शन कर रहे लेखपाल अनिल कुमार ने बताया कि आठ सूत्रीय मांगों को लेकर कई बार विभागीय स्तर पर आग्रह किया गया, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उनका कहना है कि 2018 में आंदोलन की शुरुआत की गई थी, और तब से लेखपाल अपनी मांगों को लेकर संघर्षरत हैं। प्रदर्शनकारियों का यह भी कहना है कि मांगों की अनदेखी से उनके मनोबल और कामकाज पर प्रतिकूल असर पड़ा है।
प्रदर्शन की पृष्ठभूमि और गंभीरता:
लेखपालों के अनुसार, लंबे समय से लंबित वेतनमान में सुधार, स्थानांतरण नीति में पारदर्शिता और कार्यक्षेत्र की दूरी जैसे बिंदु बेहद अहम हैं। इन मुद्दों को लेकर कई बार लिखित ज्ञापन दिया गया, लेकिन विभागीय निर्णय में देरी ने नाराजगी को और बढ़ा दिया है। प्रदर्शनकारी लेखपालों का कहना है कि यदि अब भी उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।
SDM को सौंपा जाएगा ज्ञापन:
धरने के बीच लेखपालों ने सामूहिक निर्णय लिया है कि वे अपना विस्तृत ज्ञापन एसडीएम जखनिया (SDM Jakhaniya) अतुल कुमार को सौंपेंगे। उनका कहना है कि यह ज्ञापन उनकी समस्याओं और मांगों को सीधे प्रशासन तक पहुंचाएगा। लेखपालों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आगामी दिनों में और कड़े कदम उठाने के लिए बाध्य होंगे।
तहसील परिसर में माहौल और प्रशासनिक सतर्कता:
जखनिया तहसील परिसर में दिनभर लेखपालों की आवाज और नाराजगी का माहौल बना रहा। नारेबाजी, पोस्टर और मांगों को लेकर आवाज़ बुलंद करते लेखपालों की भीड़ ने परिसर को आंदोलन स्थल में बदल दिया। प्रशासन की ओर से भी स्थिति पर करीबी नजर रखी जा रही है, ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो।
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