लखनऊ। श्रद्धेय स्वर्गीय लालजी टंडन (Lalji Tandon) की स्मृति में चौक चौराहे का नाम “लालजी टंडन चौराहा” रखा गया था, लेकिन अब यह नामकरण विवादों में घिर गया है। चौराहे पर लगे स्मृति पत्थर से उनका नाम मिटा दिए जाने की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में नाराज़गी बढ़ गई है।
स्मृति में रखा गया नाम बना विवाद का कारण:
लालजी टंडन की पुण्य स्मृति में नगर निगम (Nagar Nigam) की स्वीकृति से चौक चौराहे का नामकरण किया गया था। इसका उद्देश्य लखनऊ के लोकप्रिय जननेता और पूर्व राज्यपाल (Governor) लालजी टंडन की याद को चिरस्थायी बनाना था। लेकिन हाल ही में उसी स्थान पर दूसरा नाम भी अंकित कर दिया गया, जिससे अब एक ही चौराहे पर दो नाम और तीन अलग-अलग पत्थर दिखाई देने लगे हैं।
स्थानीय नागरिकों ने उठाए सवाल:
लोगों का कहना है कि यह केवल एक नाम नहीं, बल्कि लखनऊ की संस्कृति, सौम्यता और सेवा भावना का प्रतीक है। स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाया है कि आखिर श्रद्धांजलि स्वरूप रखे गए नाम को मिटाने की जरूरत क्यों पड़ी? उनका मानना है कि यह कदम भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है।
प्रशासनिक जांच के निर्देश:
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। नगर निगम (Lucknow Municipal Corporation) अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी ने बिना अनुमति स्मृति पत्थर या नाम बदलने की कार्रवाई की है, तो उसके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि शहर के नामकरण से जुड़ी हर प्रक्रिया विधिक स्वीकृति के तहत ही होनी चाहिए।
लालजी टंडन का योगदान और सम्मान:
लालजी टंडन लंबे समय तक लखनऊ (Lucknow) की राजनीति में सक्रिय रहे। उन्होंने सांसद (MP), विधायक (MLA) और राज्यपाल (Governor) के रूप में जनता की सेवा की। जनसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और सहज व्यक्तित्व ने उन्हें लखनऊ की पहचान बना दिया था। ऐसे में उनके नाम पर रखे गए चौराहे के नाम को लेकर उठे विवाद ने नागरिकों में गहरी असंतोष की भावना उत्पन्न कर दी है।
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