तिकुनियां कांड की चौथी बरसी पर शहीदों को नमन, रक्तदान कर दी भावभीनी श्रद्धांजलि



Lakhimpur Kheri: 3 अक्टूबर 2021 को हुए तिकुनियां कांड की याद आज फिर ताजा हो गई। इस भीषण घटना में शहीद हुए पत्रकार रमन कश्यप (Raman Kashyap) और पांच किसानों की चौथी बरसी श्रद्धा और संवेदनाओं के साथ मनाई गई। तिकुनियां के ऐतिहासिक कौडियाला साहिब गुरुद्वारे (Kaudiyala Sahib Gurudwara) में भजन-कीर्तन और अरदास के माध्यम से सभी शहीदों को नमन किया गया।

शहीदों की स्मृति में हुआ श्रद्धांजलि आयोजन:


कौडियाला साहिब गुरुद्वारे में सुबह से ही श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था। भजन-कीर्तन और अरदास के दौरान वातावरण भावनाओं से भरा रहा। उपस्थित लोगों ने शहीद पत्रकार रमन कश्यप और किसानों की तस्वीरों के समक्ष पुष्प अर्पित कर उन्हें याद किया। आयोजन में यह भावना प्रमुख रही कि शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी और न्याय की राह पर संघर्ष जारी रहेगा।

रक्तदान शिविर के माध्यम से दी गई श्रद्धांजलि:


शहीद पत्रकार रमन कश्यप के भाई पवन कश्यप (Pawan Kashyap) ने अपने भाई की याद में स्थापित शहीद रमन कश्यप सोशल वेलफेयर सोसाइटी (Shaheed Raman Kashyap Social Welfare Society) के बैनर तले एक रक्तदान शिविर का आयोजन किया। यह शिविर विशेष रूप से तिकुनियां हिंसा में शहीद हुए किसानों को समर्पित था।

किसानों और युवाओं ने बढ़-चढ़कर किया रक्तदान:


रक्तदान शिविर में बड़ी संख्या में किसान, नौजवान और समाजसेवी शामिल हुए। सभी ने रक्तदान कर शहीदों के प्रति अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। रक्तदान करने वालों का कहना था कि यह केवल दान नहीं, बल्कि उन वीर आत्माओं के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है, जिन्होंने न्याय और अधिकारों के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।

वक्ताओं ने कहा—तिकुनियां कांड लोकतंत्र का सबक:


कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि तिकुनियां कांड केवल एक घटना नहीं, बल्कि लोकतंत्र और किसान आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण सबक है। शहीद पत्रकार और किसानों ने जिस साहस, निडरता और संघर्ष का परिचय दिया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। उन्होंने कहा कि न्याय की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है, और जब तक सच्चाई को पूर्ण सम्मान नहीं मिलेगा, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।

सामूहिक अरदास और न्याय के संकल्प के साथ हुआ समापन:


कार्यक्रम के अंत में सामूहिक अरदास की गई। श्रद्धालुओं ने शहीदों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और न्याय की राह पर अडिग रहने का संकल्प दोहराया। पूरे आयोजन के दौरान वातावरण में एकता, संवेदना और न्याय के प्रति अटूट आस्था का संदेश स्पष्ट झलकता रहा।

न्याय और स्मृति की राह पर कायम संकल्प:


तिकुनियां कांड की चौथी बरसी न केवल शोक का अवसर रही, बल्कि यह उस संघर्ष को याद करने का भी दिन था जिसने समाज को जागरूक किया। श्रद्धांजलि और रक्तदान के इस संयुक्त आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि शहीदों की याद अमर है, और उनकी कुर्बानियों को भुलाया नहीं जाएगा।

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