Lakhimpur Kheri: लखीमपुर में पं. दीनदयाल उपाध्याय सरस्वती विद्या मन्दिर इंटर कालेज (यू.पी. बोर्ड) में ‘मिशन शक्ति’ अभियान के तहत छात्राओं के लिए एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम विशेष रूप से छात्राओं को डिजिटल युग में सुरक्षित रहने और ऑनलाइन खतरों से बचने के लिए सशक्त बनाने पर केंद्रित था। कार्यक्रम में साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे और उनसे बचाव के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।
साइबर अपराधों की जागरूकता:
कार्यक्रम में महिला आरक्षी शालू बिशनोई और कांस्टेबल आजम अली, साइबर थाना लखीमपुर ने छात्राओं को तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों जैसे साइबर बुलिंग, फिशिंग, ऑनलाइन धोखाधड़ी, सोशल मीडिया का दुरुपयोग और व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा के बारे में जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि कैसे एक छोटी सी गलती भी बड़ी समस्याओं को जन्म दे सकती है और इससे बचाव के लिए किन-किन सावधानियों का पालन करना चाहिए।
ऑनलाइन सुरक्षा के उपाय:
छात्राओं को सलाह दी गई कि वे अपने सभी ऑनलाइन खातों के लिए मजबूत और अद्वितीय पासवर्ड का उपयोग करें। किसी भी अज्ञात या संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करने और ईमेल का जवाब न देने की हिदायत दी गई। सोशल मीडिया पर अपनी व्यक्तिगत और निजी जानकारी साझा करने में अत्यधिक सावधानी बरतने पर जोर दिया गया। किसी भी प्रकार के साइबर उत्पीड़न या अपराध की स्थिति में तत्काल पुलिस या साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया भी समझाई गई।
प्रधानाचार्य का संदेश:
विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. योगेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि ‘मिशन शक्ति’ केवल एक अभियान नहीं है, बल्कि यह बेटियों को हर क्षेत्र में सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस जागरूकता कार्यक्रम से छात्राओं को ऑनलाइन दुनिया में समझदारी और सतर्कता के साथ आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।
विद्यालय में सहभागिता और समर्थन:
इस अवसर पर विद्यालय की आचार्या ऋतु अवस्थी उपस्थित रहीं और उन्होंने कार्यक्रम की महत्ता को स्वीकार करते हुए छात्राओं को प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम में छात्राओं ने सक्रिय भागीदारी दिखाई और साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया।
मिशन शक्ति अभियान का उद्देश्य:
‘मिशन शक्ति’ अभियान का उद्देश्य छात्राओं और महिलाओं को सशक्त बनाना है। डिजिटल युग में यह आवश्यक है कि हर छात्रा ऑनलाइन खतरे को पहचान सके और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सके। इस प्रकार के कार्यक्रम छात्राओं को सुरक्षित और जिम्मेदार ऑनलाइन व्यवहार के लिए प्रेरित करते हैं।
समापन संदेश:
कार्यक्रम के अंत में सभी ने साइबर सुरक्षा के महत्व को समझा और इसे अपने दैनिक जीवन में लागू करने का संकल्प लिया। इस पहल ने यह स्पष्ट कर दिया कि साइबर जागरूकता सिर्फ तकनीकी जानकारी नहीं, बल्कि बेटियों को आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनाने का महत्वपूर्ण कदम है।

