कुंवर सिंह जयंती पर दिखा अनोखा नज़ारा, वंदे मातरम् ने बांधा माहौल!

रिपोर्टर: अमित कुमार

बलिया (Ballia) के कुंवर सिंह महाविद्यालय (Kunwar Singh Mahavidyalaya) में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में एक भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर पूरे महाविद्यालय परिवार ने सामूहिक रूप से वंदे मातरम् का गायन किया और वीरवर कुंवर सिंह की जयंती धूमधाम से मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत कुंवर सिंह चौराहे पर वीर कुंवर सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुई, जिसमें प्राचार्य प्रोफेसर अशोक कुमार सिंह के नेतृत्व में महाविद्यालय के शिक्षक और छात्र-छात्राएं शामिल हुए। इसके बाद महाविद्यालय परिसर में संस्थापक प्रबंधक स्वर्गीय बाबू शिव शंकर सिंह वकील साहब की प्रतिमा पर भी माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

कुंवर सिंह के आदर्श आज भी प्रासंगिक:
प्राचार्य प्रोफेसर अशोक कुमार सिंह ने कहा कि वीर कुंवर सिंह का जीवन समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने बताया कि कुंवर सिंह ने न केवल ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष किया बल्कि एकता और साहस की मिसाल भी पेश की। उनका व्यक्तित्व आज के युवाओं के लिए प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि कुंवर सिंह महाविद्यालय की पत्रिका “सेनानी” का कुंवर सिंह विशेषांक उनके विचारों और संघर्ष को जन-जन तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम बनेगा।

राष्ट्रीय एकता के प्रतीक हैं कुंवर सिंह:
कार्यक्रम के दौरान प्रोफेसर सत्य प्रकाश सिंह ने कहा कि कुंवर सिंह राष्ट्रीय एकता के प्रतीक हैं। उन्होंने समाज को यह सिखाया कि देशहित सर्वोपरि है और इसके लिए किसी भी प्रकार का त्याग छोटा नहीं होता। उन्होंने कहा कि ऐसे वीरों की जयंती मनाना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति हमारी निष्ठा का प्रतीक है।

जन-जन के नायक थे कुंवर सिंह:
प्रोफेसर फूल बदन सिंह ने कहा कि कुंवर सिंह केवल इतिहास के अध्याय नहीं हैं, बल्कि जनमानस के नायक हैं जो हर भारतीय के हृदय में बसते हैं। उनका जीवन संघर्ष, बलिदान और देशभक्ति का परिचायक है। उन्होंने कहा कि हमें उनके आदर्शों को अपनाकर समाज में एकता, सद्भाव और समर्पण की भावना को मजबूत करना चाहिए।

क्रांति के अग्रदूत के रूप में याद किए गए:
प्रोफेसर अजय बिहारी पाठक ने वीर कुंवर सिंह को लोकनायक और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का अग्रदूत बताया। उन्होंने कहा कि 1857 की क्रांति में कुंवर सिंह की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही और उनके नेतृत्व ने आज़ादी की लड़ाई को नई दिशा दी। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे कुंवर सिंह के त्याग और वीरता से प्रेरणा लें और राष्ट्र निर्माण में योगदान दें।

कार्यक्रम में वंदे मातरम् की गूंज:
समारोह के दौरान जब सामूहिक रूप से वंदे मातरम् का गायन हुआ तो पूरा परिसर देशभक्ति के स्वर से गूंज उठा। विद्यार्थियों और अध्यापकों ने एक स्वर में देश के प्रति निष्ठा का संदेश दिया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य देशभक्ति की भावना को सशक्त बनाना और वीर कुंवर सिंह के योगदान को याद करना रहा।



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डिस्क्लेमर: यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है।

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