Video: बलिया: हजारों किसानों ने एकजुट होकर उठाई आवाज, मुआवजे का मिला भरोसा

रिपोर्टर: सदानंद उपाध्याय

बलिया (Ballia) जनपद के बैरिया विधानसभा क्षेत्र में मंगलवार का दिन किसानों के नाम रहा। युवा नेता विपुलेंद्र प्रताप सिंह (Viplendra Pratap Singh) के नेतृत्व में निकाली गई “किसान एकता यात्रा” ने क्षेत्र में व्यापक असर दिखाया। हजारों किसानों की एकजुटता के साथ यह यात्रा प्रद्युम्न बाबा स्थान, सोनबरसा से शुरू होकर बैरिया तहसील परिसर तक पहुंची, जहां किसानों ने अपनी समस्याओं से प्रशासन को अवगत कराते हुए पत्रक सौंपा। इस दौरान किसानों की भारी मौजूदगी ने यह स्पष्ट कर दिया कि वे अपनी पीड़ा और अधिकारों को लेकर अब संगठित होकर आवाज उठाने को तैयार हैं।

मोथा चक्रवात से हुई तबाही का दर्द:
कुछ दिन पहले आए मोथा चक्रवात ने बैरिया क्षेत्र में किसानों की तैयार खरीफ फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया था। खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो गईं, जिससे किसानों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया। इसी नुकसान और पीड़ा को लेकर किसानों में लंबे समय से आक्रोश था, जो “किसान एकता यात्रा” के रूप में सामने आया। यात्रा में शामिल किसानों का कहना था कि प्राकृतिक आपदा के बाद उन्हें तत्काल राहत और मुआवजे की आवश्यकता है।

गांव-गांव जनपंचायत से बनी रणनीति:
इस यात्रा से पहले विपुलेंद्र प्रताप सिंह ने गांव-गांव जाकर जनपंचायतें कीं और किसानों की समस्याओं को करीब से सुना। इन बैठकों में किसानों ने अपनी क्षतिग्रस्त फसलों, बढ़ते कर्ज और भविष्य की चिंताओं को खुलकर रखा। इन्हीं चर्चाओं के बाद “किसान एकता यात्रा” का आह्वान किया गया, जिसे 12 दिसंबर को हजारों किसानों का अभूतपूर्व समर्थन मिला।

महिलाओं और युवाओं की भी रही भागीदारी:
यात्रा में केवल किसान ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में महिलाएं और युवा भी शामिल हुए। इससे यह संदेश गया कि यह आंदोलन केवल खेतों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे ग्रामीण समाज की चिंता का विषय बन चुका है। यात्रा के दौरान किसानों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को रखा और प्रशासन से न्याय की उम्मीद जताई।

तहसील परिसर में उमड़ा जनसैलाब:
जैसे ही यात्रा बैरिया तहसील परिसर पहुंची, वहां किसानों का विशाल जनसमूह इकट्ठा हो गया। इतनी बड़ी संख्या में किसानों की मौजूदगी ने प्रशासन को भी स्थिति की गंभीरता का एहसास कराया। मौके पर मौजूद उपजिलाधिकारी ने सरकार की ओर से किसानों का पत्रक स्वीकार किया और आश्वासन दिया कि पीड़ित किसानों को समय पर मुआवजा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

किसानों को मिला मुआवजे का भरोसा:
प्रशासन की ओर से मिले आश्वासन के बाद किसानों में कुछ उम्मीद जगी। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते मुआवजा मिला तो वे दोबारा खेती की तैयारी कर सकेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आश्वासन पर अमल नहीं हुआ तो वे आगे भी संगठित होकर आंदोलन करेंगे।

विपुलेंद्र प्रताप सिंह का संबोधन:
यात्रा के समापन पर विपुलेंद्र प्रताप सिंह ने विशाल जनसमूह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि किसानों ने जिस तरह एकजुट होकर इस यात्रा को ऐतिहासिक बनाया है, वह उनके लिए जीवनभर की प्रेरणा है। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों और नौजवानों के अधिकारों के लिए हर संघर्ष में वे सबसे आगे खड़े रहेंगे और किसानों के आंसू पोंछने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।

पूर्वांचल में नई ऊर्जा:
बैरिया की धरती पर निकली यह “किसान एकता यात्रा” केवल एक कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि इसने किसानों में आत्मबल और उम्मीद की नई किरण जगाई है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय बाद किसी नेता ने उनके मुद्दों को इस मजबूती से उठाया है। यह यात्रा प्रशासन तक किसानों की आवाज पहुंचाने में सफल रही और क्षेत्र में किसान आंदोलन को नई दिशा देने का काम किया।

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