ईरान में हुई खामेनेई की मौत तो यूपी के इस शहर में क्यों पसरा है मातम? जानिए क्या है कनेक्शन

मिडिल ईस्ट में भड़के भीषण युद्ध और वैश्विक तनाव के बीच एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय घटना की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। इजरायली हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत की पुष्टि के बाद हालात तनावपूर्ण बताए जा रहे हैं। इस घटनाक्रम का असर भारत के उत्तर प्रदेश तक भी महसूस किया गया। बाराबंकी जिले की सिरौली गौसपुर तहसील स्थित किंतूर गांव में शोक का माहौल देखने को मिला, क्योंकि खामेनेई का पुश्तैनी संबंध इसी गांव से जुड़ा बताया जाता है।

ऐतिहासिक संबंध की चर्चा:
स्थानीय लोगों और बुजुर्गों के अनुसार, खामेनेई के दादा सैयद अहमद मुसावी हिंदी 18वीं-19वीं सदी के दौरान किंतूर गांव में निवास करते थे। बताया जाता है कि अपनी भारतीय जड़ों को सम्मान देने के लिए परिवार ने अपने नाम के साथ ‘हिंदी’ उपनाम जोड़ा था। यही ऐतिहासिक जुड़ाव आज भी गांव में चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि यह संबंध केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव भी है।

A group of people holding candles in a dimly lit setting, gathered in front of a portrait, expressing a moment of remembrance or tribute.

पुराने दस्तावेज और पुश्तैनी मकान:
गांव में आज भी ऐसे पुराने दस्तावेज और पुश्तैनी मकान मौजूद बताए जाते हैं, जो इस रिश्ते की गवाही देते हैं। जैसे ही इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष तथा खामेनेई की मौत की खबर सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों के जरिए गांव पहुंची, लोगों में गहरा आघात देखा गया। गांव की गलियों में सन्नाटा पसर गया और हर ओर इसी विषय पर चर्चा होने लगी। लोगों ने इसे अपने इतिहास से जुड़े अध्याय के रूप में देखा।

Group of people holding candles in front of a decorative building at night, participating in a commemorative event.

परिजनों और स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया:
किंतूर में रह रहे उनके वंशज सैय्यद निहाल मियां ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यह घटना केवल उनके परिवार ही नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर लोगों के लिए दुखद है। उन्होंने कहा कि खामेनेई इंसानियत और भाईचारे की बात करने वाले व्यक्तित्व थे। इसी क्रम में डॉ. रेहान काजमी ने भी शोक व्यक्त करते हुए इसे समुदाय के लिए बड़ी क्षति बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया को अमन और भाईचारे का संदेश देने वाले नेता की मौत से शोक का वातावरण है।

वैश्विक घटना का स्थानीय असर:
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष की गूंज अब भारत के एक छोटे से गांव तक पहुंच चुकी है। किंतूर गांव की यह कहानी दर्शाती है कि ऐतिहासिक और पारिवारिक रिश्ते किस प्रकार अंतरराष्ट्रीय घटनाओं से जुड़ जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि भले ही भौगोलिक दूरी अधिक हो, लेकिन भावनात्मक संबंध लोगों को एक सूत्र में बांधे रखते हैं। फिलहाल प्रशासन की ओर से शांति बनाए रखने की अपील की गई है और क्षेत्र में स्थिति सामान्य बताई जा रही है।

A group of people standing together, each holding a candle, engaged in a solemn gathering. The setting is dimly lit, with an individual in a yellow outfit among them. A framed photograph is visible in the background.


रिपोर्टर: अनुज कुमार

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