किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से जुड़े लव जिहाद और कथित धर्मांतरण मामले की जांच में नए मोड़ सामने आ रहे हैं। इस प्रकरण के आरोपी डॉ. रमीजुद्दीन नायक उर्फ रमीज मलिक के तार दिल्ली बम धमाके से जुड़े एक अन्य मामले से जोड़े जा रहे हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी डॉ. रमीज के संपर्क दिल्ली बम धमाके की मुख्य आरोपी डॉ. शाहीन के भाई और सहआरोपी डॉ. परवेज से मिले हैं। इसी कड़ी में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने अपनी जांच को और तेज कर दिया है।
आगरा में एसएन मेडिकल कॉलेज पहुंची STF:
मामले की गंभीरता को देखते हुए STF की टीम मंगलवार को आगरा स्थित एसएन मेडिकल कॉलेज (SN Medical College, Agra) पहुंची। यहां टीम ने वर्ष 2012 से अब तक के सभी जूनियर और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों का विस्तृत रिकॉर्ड तलब किया है। डॉ. रमीज और डॉ. परवेज ने इसी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई की थी, इसलिए इस कॉलेज से जुड़े दस्तावेज जांच के लिहाज से अहम माने जा रहे हैं।
13 साल के रिकॉर्ड से खुलेगी पूरी पृष्ठभूमि:
STF की स्थानीय यूनिट के इंस्पेक्टर यतींद्र शर्मा और हेड कॉन्स्टेबल अंकित गुप्ता कॉलेज पहुंचकर प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता से रिकॉर्ड लेने की प्रक्रिया में जुटे। अधिकारियों का कहना है कि इन दस्तावेजों के आधार पर डॉ. रमीज की शैक्षणिक, सामाजिक और व्यक्तिगत गतिविधियों की पूरी पृष्ठभूमि तैयार की जाएगी, जिससे उसके संपर्कों और संभावित नेटवर्क की पहचान हो सके।
हॉस्टल में जूनियर छात्रों के साथ रहना बना जांच का बिंदु:
जांच में यह भी सामने आया है कि डॉ. रमीज ने वर्ष 2012 में एसएन मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में प्रवेश लिया था और 2018 तक वहीं पढ़ाई की। वर्ष 2013 से 2018 के बीच वह कॉलेज हॉस्टल में रहा। पीजी में चयन न होने के बावजूद वह लंबे समय तक जूनियर छात्रों के साथ हॉस्टल में ही रहा। STF इस बात की जांच कर रही है कि इस अवधि में उसका किन छात्रों से संपर्क रहा और उसका प्रभाव किस स्तर तक फैला।
डॉ. परवेज से कनेक्शन और व्हाट्सऐप ग्रुप का आरोप:
STF की जांच में डॉ. परवेज की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जिस वर्ष डॉ. रमीज ने एमबीबीएस में दाखिला लिया था, उसी वर्ष डॉ. परवेज ने एसएन मेडिकल कॉलेज में एमडी में प्रवेश लिया था। आरोप है कि दोनों ने मिलकर ‘इस्लामिक मेडिकोज’ नाम से एक व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया, जिसके जरिए मुस्लिम छात्रों को संगठित करने और टॉपर छात्राओं को कथित रूप से धर्मांतरण के लिए प्रभावित करने की कोशिश की गई।
डिप्टी एसपी प्रमेश शुक्ला को सौंपी गई जांच:
केजीएमयू (KGMU) से जुड़े इस पूरे मामले की जांच STF के डिप्टी एसपी प्रमेश शुक्ला के नेतृत्व में हो रही है। इससे पहले वह छांगुर बाबा प्रकरण की जांच में भी अहम भूमिका निभा चुके हैं। STF सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में डॉ. रमीज से जुड़े अन्य लोगों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
फरारी के दौरान संदिग्ध लेन-देन की पड़ताल:
जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि फरारी के दौरान डॉ. रमीज दिल्ली, उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई स्थानों पर रुका। इस दौरान उसके बैंक खातों में लाखों रुपये का लेन-देन हुआ। STF के अनुसार, उसने एक युवक के खाते में पांच से सात लाख रुपये ट्रांसफर किए थे। अब इस फंडिंग के स्रोत और उद्देश्य की जांच की जा रही है।
पीड़ित महिला डॉक्टर की आत्महत्या की कोशिश से खुला मामला:
यह पूरा मामला तब सामने आया जब पीड़ित महिला डॉक्टर, जो केजीएमयू (KGMU) से एमडी पैथोलॉजी की पढ़ाई कर रही है, ने 17 दिसंबर को दवाइयों की ओवरडोज लेकर आत्महत्या की कोशिश की। गंभीर हालत में उसे केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां से 19 दिसंबर को उसे डिस्चार्ज किया गया।
परिजनों की शिकायत और प्रशासनिक कार्रवाई:
पीड़िता के पिता ने आरोप लगाया कि डॉ. रमीज ने उनकी बेटी पर शादी के लिए इस्लाम धर्म अपनाने का दबाव बनाया, जबकि वह पहले से शादीशुदा था। उन्होंने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल और राज्य महिला आयोग में शिकायत दर्ज कराई। 22 दिसंबर को राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने पीड़िता के साथ प्रेस वार्ता कर कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद 24 दिसंबर को विशाखा कमेटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर KGMU प्रशासन ने डॉ. रमीज को सस्पेंड कर परिसर में प्रवेश पर रोक लगा दी। आरोपी के खिलाफ FIR दर्ज हुई और 26 दिसंबर को विश्वविद्यालय में सात सदस्यीय जांच समिति गठित की गई। जांच में आरोपी के माता-पिता की संलिप्तता सामने आने पर उन्हें गिरफ्तार किया गया।
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