लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (King George’s Medical University – KGMU) परिसर में अवैध रूप से बनी मजारों को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि परिसर की भूमि पर बिना वैध अनुमति के किसी भी प्रकार का निर्माण स्वीकार्य नहीं है। इसी क्रम में शुक्रवार को KGMU प्रशासन ने कुल पांच मजारों को अवैध बताते हुए उन्हें हटाने के निर्देश जारी किए हैं। इस संबंध में संबंधित मजारों पर नोटिस चस्पा कर दिए गए हैं, ताकि निर्धारित समयसीमा के भीतर स्वयं इन्हें हटाया जा सके।
नोटिस के अनुसार, ये सभी मजारें विश्वविद्यालय परिसर की भूमि अथवा उससे सटी भूमि पर बिना किसी आधिकारिक स्वीकृति के बनाई गई हैं। प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि यदि तय समय के भीतर इन्हें नहीं हटाया गया, तो नियमों के तहत बलपूर्वक प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
नोटिस में तय की गई समयसीमा:
जारी किए गए नोटिस में मजारों की स्थिति के आधार पर अलग-अलग समयसीमा तय की गई है। KGMU परिसर के भीतर स्थित एक मजार, जो कच्चे निर्माण की है, उसे सात दिनों के भीतर हटाने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा परिसर के भीतर और परिसर से सटी अन्य मजारें, जिनमें पक्का निर्माण शामिल है, उन्हें हटाने के लिए पंद्रह दिनों का समय दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि पक्के निर्माण को हटाने में अधिक समय लग सकता है, इसी कारण अलग समयसीमा निर्धारित की गई है।
KGMU प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि तय अवधि समाप्त होने के बाद किसी भी प्रकार की रियायत नहीं दी जाएगी और आवश्यक होने पर प्रशासन स्वयं कार्रवाई करेगा।
शैक्षणिक और चिकित्सकीय संस्थान की गरिमा का सवाल:
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि KGMU एक प्रमुख शैक्षणिक और चिकित्सकीय संस्थान है, जहां देशभर से मरीज इलाज के लिए और छात्र शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते हैं। ऐसे संस्थान में किसी भी प्रकार की संरचना केवल नियमों और विधिक प्रक्रिया के तहत ही बनाई जा सकती है। बिना अनुमति किए गए निर्माण न केवल संस्थान की गरिमा के विपरीत हैं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था, यातायात और दैनिक संचालन को भी प्रभावित करते हैं।
प्रशासन का मानना है कि परिसर में अवैध निर्माण बने रहने से भविष्य में कानून व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़ी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, इसलिए समय रहते इन्हें हटाना आवश्यक है।
पहले भी उठ चुका है अतिक्रमण का मुद्दा:
KGMU परिसर में अतिक्रमण और अनधिकृत निर्माण का यह मुद्दा पहली बार सामने नहीं आया है। इससे पहले भी विश्वविद्यालय के भीतर और आसपास अवैध ढांचों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। पूर्व में आंतरिक स्तर पर इस संबंध में रिपोर्ट तैयार की गई थी, जिसमें परिसर की भूमि पर हुए अतिक्रमण और अवैध निर्माण का उल्लेख किया गया था।
उसी रिपोर्ट के आधार पर अब चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि पहले कई बड़े अवैध कब्जों को हटाया जा चुका है और अब शेष बचे निर्माणों पर कार्रवाई की जा रही है।
सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर विशेष ध्यान:
मजार हटाने की प्रक्रिया को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन और स्थानीय पुलिस पूरी तरह सतर्क है। किसी भी तरह की अव्यवस्था या तनाव की स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से, कानून के दायरे में रहकर की जाएगी, ताकि किसी की भावना आहत न हो और व्यवस्था भी बनी रहे।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि यदि भविष्य में परिसर में किसी भी प्रकार का नया अवैध निर्माण पाया गया, तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
KGMU प्रवक्ता का बयान:
KGMU के प्रवक्ता डॉ. के.के. सिंह ने इस मामले में जानकारी देते हुए बताया कि कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद के निर्देश पर डेढ़ साल पहले ही परिसर में अवैध कब्जों और मजारों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इस दौरान कई बड़े अवैध कब्जे हटाए जा चुके हैं। अब जो अवैध निर्माण और मजार शेष रह गए हैं, उन्हें भी चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा।
प्रवक्ता ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन का उद्देश्य किसी के खिलाफ कार्रवाई करना नहीं, बल्कि संस्थान की भूमि को अतिक्रमण मुक्त रखना और नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।
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