लखनऊ (Lucknow), 17 नवंबर। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBV) की बालिकाओं ने इस वर्ष खेल के मैदान में ऐसा प्रभावशाली प्रदर्शन किया है, जिसने पूरे प्रदेश को गर्व से भर दिया है। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह (Sandeep Singh) के मार्गदर्शन में केजीबीवी की 504 बालिकाओं ने 22 खेल विधाओं में दमखम दिखाते हुए कुल 50 पदक—5 स्वर्ण, 10 रजत और 35 कांस्य—अपने नाम दर्ज किए। इस साइलेंट रेवोल्यूशन ने यह सिद्ध कर दिया है कि ये बालिकाएं अब सिर्फ शिक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि खेल के प्रत्येक मंच पर नई पहचान बनाने को तैयार हैं।

राज्य स्तरीय टीमों में बढ़ती भागीदारी:
केजीबीवी की प्रतिभाशाली बालिकाओं का प्रदर्शन इतना सशक्त रहा कि अब तक 24 बालिकाओं का चयन राज्य स्तरीय टीमों के लिए हो चुका है। इन बालिकाओं को विभिन्न जनपदों में कोचों द्वारा 10 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया। चयन प्रक्रिया जारी रहने के कारण इस संख्या के और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। यह उपलब्धि इस तथ्य को रेखांकित करती है कि उचित अवसर और प्रशिक्षण मिलने पर ये बालिकाएं किसी भी चुनौती के सामने मजबूती से खड़ी हो सकती हैं।
बेटियों के प्रदर्शन पर नेतृत्व की प्रतिक्रिया:
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की बालिकाओं की उपलब्धि पर बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह (Sandeep Singh) ने कहा कि इन बालिकाओं का साहस, अनुशासन और निष्ठा ‘न्यू यूपी’ की नई पहचान बनकर उभरी है। उनका कहना है कि प्रदेश सरकार द्वारा बेटियों को सुरक्षित वातावरण, बेहतर सुविधाएं और अवसर देने के प्रयास अब वास्तविक रूप में परिणाम दे रहे हैं। बालिकाओं की यह सफलता आने वाले समय में उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
22 खेल विधाओं में दमदार उपस्थिति:
इस वर्ष केजीबीवी की बालिकाओं ने हॉकी, फुटबॉल, क्रिकेट, जूडो, बॉक्सिंग, ताइक्वांडो, कबड्डी, खो-खो, कुश्ती, एथलेटिक्स, योगासन, टेबल टेनिस, कराटे, वॉलीबॉल, हैंडबॉल, बास्केटबॉल, गतका, थांगता, कुरांश और नेहरू हॉकी कप जैसे 22 खेलों में भाग लेकर विशेष पहचान बनाई। बालिकाओं ने न केवल भागीदारी की बल्कि अपने कौशल, तकनीक और मानसिक दृढ़ता से हर मंच पर निर्णायक प्रभाव छोड़ा, जिससे चयनकर्ताओं ने भी उनके खेल को विशेष रूप से सराहा।
पिछले वर्ष की तुलना में रिकॉर्ड वृद्धि:
पिछले वर्ष 2024–25 में जहाँ 222 बालिकाओं ने भाग लिया और कुल 23 पदक जीते, वहीं इस बार भागीदारी का स्तर दोगुने से भी अधिक रहा। 504 बालिकाओं ने विभिन्न खेलों में पूरे आत्मविश्वास के साथ हिस्सा लेकर 50 पदक अपने नाम किए। यह उपलब्धि पिछले वर्ष की तुलना में छह गुना से अधिक उभार को दर्शाती है। फुटबॉल टीम ने पिछले वर्ष जिन प्रदर्शन मानकों को छुआ था, इस वर्ष भी कई जिलों में उन्होंने चयनकर्ताओं को प्रभावित कर निरंतरता बनाए रखी।
प्रशिक्षकों और प्रबंधन का योगदान:
केजीबीवी की इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे उनकी वॉर्डन टीम, प्रशिक्षक, खेल शिक्षिकाएं और प्रबंधन का महत्वपूर्ण योगदान रहा। बालिकाओं ने कठोर अभ्यास, अनुशासन और समर्पण के साथ लगातार मेहनत कर अपने खेल स्तर को निखारा। उनकी यह उपलब्धि उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति का परिणाम है, जिसे जीत के बाद व्यक्त किए गए शब्द—‘हम रुकने वालों में नहीं, जीतने वालों में हैं’—पूरी तरह प्रतिबिंबित करते हैं।
बालिका सशक्तिकरण का नया आयाम:
केजीबीवी की बेटियों की यह उपलब्धि केवल एक खेल प्रतियोगिता का परिणाम नहीं है, बल्कि यह बालिका सशक्तिकरण और अवसर-समानता की दिशा में हुए परिवर्तन का प्रतीक है। आज ये बालिकाएं आत्मविश्वास, नेतृत्व, आत्मनिर्भरता और भविष्य के अवसरों की ओर मजबूत कदम बढ़ा रही हैं। उनका प्रदर्शन पूरे प्रदेश की बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है।
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