केरल चुनाव में क्या खास: पार्टी नहीं यहां गठबंधन से तय होती है किस्मत, बड़े चेहरे कहां से मैदान में? जानें

केरल (Kerala) में आज विधानसभा चुनाव 2026 के लिए मतदान जारी है। सुबह 7 बजे से वोटिंग शुरू हुई और सुबह 9 बजे तक 16 प्रतिशत से अधिक मतदान हो चुका था। इस बार 140 विधानसभा सीटों के लिए कुल 883 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें 375 राष्ट्रीय दलों, 81 राज्य दलों, 145 गैर-पंजीकृत दलों और 282 निर्दलीय उम्मीदवार शामिल हैं।

मतदाता और मतदान केंद्र:
चुनाव आयोग (Election Commission) के अनुसार, इस बार केरल (Kerala) में कुल 2,71,42,952 मतदाता मतदान करने के योग्य हैं। पुरुष मतदाता 1,32,20,811, महिला मतदाता 1,39,21,868 और थर्ड जेंडर मतदाता 273 हैं। राज्य में कुल 25,147 पोलिंग स्टेशन बनाए गए हैं।

चुनावी चेहरे और प्रमुख मुकाबले:
2026 के केरल विधानसभा चुनाव में कई बड़े चेहरे और दिलचस्प मुकाबले देखने को मिल रहे हैं।

  • पिनरई विजयन (Pinarayi Vijayan): केरल के मौजूदा मुख्यमंत्री और लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) के प्रमुख नेता अपनी पारंपरिक धर्मदम सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।
  • वीडी सतीशन (VD Satishan): विपक्षी गठबंधन के नेता और कांग्रेस (Congress) के प्रमुख चेहरा परवूर सीट से चुनावी मैदान में हैं।
  • राजीव चंद्रशेखर (Rajeev Chandrasekhar) और के. सुरेंद्रन (K. Surendran): भाजपा (BJP) के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) गठबंधन के बड़े चेहरे, नेमोम और मंजेश्वरम सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।
  • जी. सुधाकरन (G. Sudhakaran): मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (MCP) से बगावत कर निर्दलीय अंबलप्पुझा सीट से चुनाव में हैं।

पिछले चुनाव के नतीजे:
पिछले विधानसभा चुनाव 6 अप्रैल 2021 को आयोजित किए गए थे। एलडीएफ (LDF) ने 140 में से 99 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया था। कांग्रेस (Congress) के नेतृत्व वाले यूडीएफ (UDF) को 41 सीटें मिली थीं। भाजपा (BJP) के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) को कोई भी सीट नहीं मिली थी और उनका वोट शेयर घट गया था।

मुख्य चुनावी मुद्दे:
इस बार के चुनाव में विकास, कल्याणकारी योजनाएं और स्थानीय भावनाएं मुख्य मुद्दे हैं।

  • विकास और कल्याणकारी वादे: एलडीएफ (LDF) ने अपने चुनाव प्रचार में विकास पर जोर दिया। यूडीएफ (UDF) ने कॉलेज जाने वाली लड़कियों के लिए 1,000 रुपये प्रति माह भत्ता, 3,000 रुपये सामाजिक कल्याण पेंशन, युवाओं के लिए 5 लाख रुपये तक ब्याज-मुक्त ऋण, महिलाओं के लिए केएसआरटीसी बसों में मुफ्त यात्रा और प्रत्येक परिवार के लिए 25 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा (Oman Chandy Health Insurance) का वादा किया।
  • विदेशी अंशदान (FCRA) विवाद: विदेशी अंशदान नियमों में संशोधन का विवाद भी चुनावी मुद्दा बना। भाजपा उम्मीदवार शोन जॉर्ज (Shon George) ने इसे केवल अवैध विदेशी धन से जुड़े लोगों की चिंता बताया।
  • सत्ता विरोधी लहर और गुटबाजी: कुछ सीटों पर यूडीएफ (UDF) उम्मीदवार माकपा (MCP) के अंदरूनी असंतोष का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं।

चुनावी नारे और प्रचार:
एलडीएफ (LDF) ने मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए “मट्टारुंडु एलडीएफ अल्लाथे” का नारा दिया, जबकि यूडीएफ (UDF) ने “केरलम जयिक्कुम, यूडीएफ नायिक्कुम” के नारे दिए। एनडीए (NDA) ने बदलाव की अपील करते हुए “मरथथु इनी मारुम” का नारा दिया।


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