कौन है खत्री? जिनसे हुई सिख पंथ की उत्पत्ति…

भारतीय समाज की संरचना में वंश केवल पहचान नहीं बल्कि इतिहास, परंपरा और संस्कृति का दर्पण हैं। इन्हीं में दो प्रमुख समुदाय — कायस्थ (Kayastha) और खत्री (Khatri) — अपनी शिक्षित, विद्वान और प्रशासनिक परंपरा के लिए जाने जाते हैं। वर्षों से यह प्रश्न उठता रहा है कि क्या दोनों समुदायों की उत्पत्ति किसी साझा वैदिक वंश से जुड़ी है? ऐतिहासिक और वैदिक प्रमाणों के अनुसार, कायस्थ और खत्री एक ही वैदिक वंश की दो अलग धाराएँ प्रतीत होती हैं।

चित्रगुप्त से कायस्थ वंश की उत्पत्ति:

ब्रह्मवैवर्त पुराण और स्कंद पुराण जैसे ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि भगवान ब्रह्मा ने मनुष्यों के कर्मों का लेखा रखने के लिए चित्रगुप्त को अपने “काय” (शरीर) से उत्पन्न किया। इसीलिए उनके वंशजों को कायस्थ कहा गया। चित्रगुप्त को स्वर्ग लोक का प्रथम प्रशासक और लेखाकार माना गया, जिन्होंने व्यवस्था और न्याय के नियमों की नींव रखी।

चित्रगुप्त का विवाह और क्षत्रिय संबंध:

पुराणों के अनुसार, चित्रगुप्त का विवाह क्षत्रिय कन्या ऐरावती से हुआ था। ऐरावती को कभी यमराज की पुत्री तो कभी सोमवंशीय राजकुल की कन्या बताया गया है। इस वैवाहिक संबंध से कायस्थ वंश में क्षत्रिय रक्त का समावेश हुआ। चित्रगुप्त और ऐरावती की संतानों ने दो प्रमुख शाखाओं — चैत्यवंशी कायस्थ और मौल्यवंशी कायस्थ — को जन्म दिया। यही वंशज आगे चलकर उत्तर भारत, कश्मीर, सिंध और पंजाब तक फैले।

कश्मीर और उत्तर-पश्चिम भारत में बसावट:

ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, चित्रगुप्त वंश के कई कुल कश्मीर, सिंध और पश्चिमी पंजाब के क्षेत्रों में बसे। यही क्षेत्र आगे चलकर खत्री समुदाय का केंद्र बना। इन वंशजों ने प्रशासन, व्यापार और शिक्षा के माध्यम से समाज में अपनी पहचान स्थापित की और धीरे-धीरे खत्री समुदाय के रूप में विकसित हुए।

खत्री समुदाय की उत्पत्ति और स्वरूप:

“खत्री” शब्द स्वयं “क्षत्रिय” से निकला है। इतिहासकार R.C. Majumdar, Max Arthur Macauliffe और डॉ. ईशर सिंह के अनुसार, खत्री वे ही उत्तर-पश्चिम भारत के क्षत्रिय-कायस्थ वंशज हैं जो समय के साथ युद्ध और शासन की भूमिकाओं से हटकर ज्ञान, व्यापार और प्रशासनिक कार्यों में लगे। इस प्रकार खत्री समुदाय न तो पूर्णतः योद्धा रहा और न ही ब्राह्मण, बल्कि ज्ञान और संगठन के रक्षक वर्ग के रूप में उभरा।

गुरु नानक देव जी का खत्री वंश:

सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी का जन्म 1469 ईस्वी में बेदी खत्री परिवार में हुआ। “बेदी” शब्द का अर्थ है — वेदों का ज्ञाता। इससे यह स्पष्ट होता है कि उनके पूर्वज शिक्षा, ज्ञान और प्रशासनिक कार्यों में निपुण थे। यह परंपरा कायस्थों की वैदिक प्रवृत्ति से गहराई से मेल खाती है। गुरु नानक देव जी ने जातिवाद को नकारते हुए मानवता को सर्वोपरि बताया —

> “ना कोई हिंदू, ना कोई मुसलमान, सब एक हैं।”
यह विचार चित्रगुप्त की न्यायप्रियता और समानता की वैदिक भावना का ही विस्तार है।



समान मूल, अलग विकास:

वंश और कार्य के आधार पर देखा जाए तो कायस्थ और खत्री का मूल एक ही सांस्कृतिक और वैदिक धारा से जुड़ा है। कायस्थ समाज की उत्पत्ति वैदिक काल से हुई, शायद तभी बेद खत्री समुदाय का उदय हुआ और संगठित स्वरूप मौर्य काल (321 ई.पू.) से गुप्त काल (550 ई.) के बीच उभरने लगा, जब लेखा, प्रशासन और दस्तावेज़ लेखन के कार्य के लिए एक शिक्षित वर्ग की आवश्यकता हुई। वहीं सिख पंथ की स्थापना 15वीं शताब्दी में गुरु नानक देव जी ने की। उन्होंने पंजाब क्षेत्र में एकेश्वरवाद, समानता और सेवा-भावना पर आधारित नया मार्ग बताया। उनका जन्म बेद खत्री समुदाय में हुआ था, यानी सिख धर्म की नींव खत्रियों से जुड़ी रही।

खत्री वंश और सिख गुरुओं का ऐतिहासिक महत्व:

सिख धर्म के सभी गुरु खत्री वंश के थे, पर उन्होंने कभी जातिवाद को बढ़ावा नहीं दिया। गुरु नानक देव जी से लेकर गुरु गोविंद सिंह जी तक सभी ने यह संदेश दिया कि
“मनुष्य की पहचान उसके कर्म से है, जाति से नहीं।”

यह भी उल्लेखनीय है कि खत्री समाज शिक्षा, व्यापार और प्रशासन में अग्रणी रहा और इन्हीं परंपराओं ने सिख गुरुओं को समाज सुधारक और नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित किया।

निष्कर्ष:

इतिहास, पुराण और सामाजिक परंपराओं के गहन अध्ययन से यह निष्कर्ष निकलता है कि कायस्थ और खत्री वंश एक ही वैदिक मूल की दो धाराएँ हैं। चित्रगुप्त के क्षत्रिय विवाह से उत्पन्न वंशजों ने पूर्व भारत में कायस्थ समाज और उत्तर-पश्चिम में खत्री समुदाय के रूप में विकास किया। दोनों समुदायों ने शिक्षा, लेखन, शासन और संगठन में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई और भारत के सांस्कृतिक इतिहास को नई दिशा दी।

Disclaimer:
यह लेख पौराणिक और ऐतिहासिक पुस्तकों में दी गई जानकारी पर आधारित है।


#tag: #Kayastha, #Khatri, #GuruNanak, #Chitragupt, #IndianHistory, #VedicLineage

Leave a Reply

Discover more from Apna Bharat Times

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading