‘कानपुर में BJP का बहुत खास दुबे पकड़ा गया’:अखिलेश यादव बोले-इन पर बुलडोजर कब चलेगा?

Kanpur: कानपुर से उठे एक बड़े विवाद ने प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है। समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रविवार को कानपुर के वकील अखिलेश दुबे को लेकर सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि दुबे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का करीबी है, इसी वजह से उस पर बुलडोज़र नहीं चल रहा, जबकि वह करोड़ों की सरकारी संपत्तियों पर कब्जा और रंगदारी वसूली जैसे गंभीर अपराधों में लिप्त रहा है।

अखिलेश यादव का हमला

अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि कानपुर में भाजपा का एक बहुत “खासमखास” व्यक्ति पकड़ा गया है, जो इतना करीबी था कि भाग भी नहीं पाया। उन्होंने सवाल उठाया कि जिनके खिलाफ करोड़ों की हेराफेरी और जमीन कब्जे जैसे आरोप हैं, उन पर सरकार कोई बुलडोज़र कार्रवाई क्यों नहीं करती। यादव ने कहा, “आप सरकारी जमीन पर कब्जा कर लो, तालाब पाट लो या फर्जी मुकदमों में बेगुनाहों को फंसा दो, लेकिन भाजपा के करीबियों पर बुलडोज़र नहीं चलेगा।”

2500 करोड़ की संपत्तियों पर कब्जा

कानपुर पुलिस और एसआईटी की जांच में सामने आया है कि अधिवक्ता अखिलेश दुबे ने करीब 2500 करोड़ रुपये की सरकारी संपत्तियों पर कब्जा कर रखा था। इन संपत्तियों पर उसने स्कूल और गेस्ट हाउस तक संचालित किए। यही नहीं, लोगों को झूठे रेप और पॉक्सो मामलों में फंसा कर उनसे करोड़ों रुपये की रंगदारी वसूलने के भी गंभीर आरोप सामने आए हैं।

54 झूठे रेप केस का नेटवर्क

एसआईटी की जांच में अब तक 54 ऐसे मामले उजागर हुए हैं जो झूठे रेप और पॉक्सो केस निकले। इनमें से 10 से 12 मामले सीधे अखिलेश दुबे से जुड़े पाए गए। इन मामलों के जरिए दुबे और उसके नेटवर्क ने जमीनों पर कब्जा और भारी भरकम रंगदारी वसूली। पुलिस के मुताबिक, अब तक 32 शिकायतें दुबे और उसके गिरोह के खिलाफ आ चुकी हैं। इनमें 9 मामलों की जांच पूरी हो चुकी है, लेकिन अभी एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी है।

भाजपा नेता भी बने शिकार

जांच में यह भी सामने आया कि दुबे ने भाजपा नेता रवि सतीजा के खिलाफ भी झूठा रेप केस दर्ज कराया था। दरअसल, सतीजा का एक संपत्ति विवाद चल रहा था, जिसमें दबाव बनाने के लिए दुबे ने फर्जी मुकदमा करवा दिया। बाद में सतीजा ने समझौते के लिए पैसे चुकाए और जेल जाने से बच गए। SIT की जांच में सतीजा ने पूरी सच्चाई उजागर की कि यह सब रंगदारी वसूली का हिस्सा था।

पुलिस एक्शन पर उठे सवाल

हालांकि दुबे पर 5 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं, लेकिन पिछले पांच दिनों से कोई नया एक्शन नहीं लिया गया है। कानपुर में चर्चा है कि दुबे के करीबी कुछ बड़े पुलिस अधिकारियों ने लखनऊ तक मामले को मैनेज करवा दिया है। इस वजह से अब कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं हो रही।

सियासत गरमाई

यही वजह है कि अखिलेश यादव ने पूरे मामले को सरकार की “भेदभावपूर्ण कार्रवाई” बताया और कहा कि भाजपा सरकार अपने करीबी अपराधियों पर कार्रवाई करने से बच रही है। उन्होंने सवाल किया कि जब मामूली आरोपों पर बुलडोज़र चल सकता है, तो 2500 करोड़ की सरकारी संपत्ति हड़पने और 54 फर्जी रेप केस दर्ज कराने वाले पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन और पुलिस अखिलेश दुबे पर सख्त कार्रवाई करेगी या मामला राजनीतिक दबाव में ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

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