पीएम मोदी और अमित शाह के खिलाफ JNU में लगे ‘कब्र खुदेगी’ के नारे

दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (Jawaharlal Nehru University) में एक वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। 35 सेकेंड के इस वीडियो में कुछ छात्र नारे लगाते और गाते हुए दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो मंगलवार को सामने आया और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। बताया जा रहा है कि यह नारेबाजी दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद (Umar Khalid) और शरजील इमाम (Sharjeel Imam) की जमानत नामंजूर होने के विरोध में की गई।

वीडियो में सुनाई दिए विवादित नारे:
सामने आए वीडियो में छात्र “मोदी-शाह की कब्र खुदेगी, जेएनयू की धरती पर” जैसे नारे लगाते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो की अवधि भले ही कम है, लेकिन इसके सामने आते ही इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। सोशल मीडिया पर वीडियो को लेकर बहस छिड़ गई और इसे विभिन्न नजरियों से देखा जाने लगा।

जमानत नामंजूर होने से जोड़ा जा रहा विरोध:
ऐसा कहा जा रहा है कि छात्र उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज होने के फैसले के खिलाफ अपना विरोध जता रहे थे। दोनों ही 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों में आरोपी हैं और लंबे समय से न्यायिक हिरासत में हैं। वीडियो के वायरल होने के बाद यह सवाल भी उठने लगे कि क्या यह विरोध किसी विशेष फैसले के खिलाफ था या फिर यह पहले से तय किसी कार्यक्रम का हिस्सा था।

छात्र संघ का पक्ष सामने आया:
इस पूरे मामले पर जेएनयू स्टूडेंट्स यूनियन (JNU Students Union) की अध्यक्ष अदिति मिश्रा (Aditi Mishra) का बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा कि हर साल 5 जनवरी 2020 को कैंपस में हुई हिंसा की निंदा करने के लिए छात्र विरोध प्रदर्शन करते हैं। अदिति मिश्रा ने न्यूज एजेंसी पीटीआई (PTI) को बताया कि प्रदर्शन के दौरान लगाए गए नारे वैचारिक थे और किसी व्यक्ति के खिलाफ व्यक्तिगत हमला नहीं थे। उनका कहना था कि नारे किसी को निर्देशित नहीं थे।

पुलिस की प्रतिक्रिया:
दिल्ली पुलिस (Delhi Police) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है। अधिकारी के अनुसार, नारेबाजी के संबंध में अब तक कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। पुलिस का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और तथ्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

कांग्रेस नेता की टिप्पणी:
जेएनयू कैंपस में प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के खिलाफ लगे नारों पर कांग्रेस नेता उदित राज (Udit Raj) की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने कहा कि यह गुस्सा जाहिर करने का एक तरीका है। उनके अनुसार 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के फैसले को लेकर जेएनयू में नाराजगी है। उन्होंने यह भी कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम के साथ नाइंसाफी हुई है और सुप्रीम कोर्ट का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है।

पांच जनवरी 2020 की हिंसा की पृष्ठभूमि:
गौरतलब है कि 5 जनवरी 2020 को जेएनयू कैंपस में हिंसा हुई थी। कुछ नकाबपोश लोग कैंपस में घुसे और तीन हॉस्टलों में छात्रों को निशाना बनाया गया। लाठियों, पत्थरों और लोहे की छड़ों से हमले किए गए। इस दौरान खिड़कियां, फर्नीचर और निजी सामान को नुकसान पहुंचाया गया। लगभग दो घंटे तक कैंपस में अराजकता का माहौल रहा, जिसमें जेएनयू स्टूडेंट्स यूनियन की तत्कालीन अध्यक्ष आइशी घोष (Aishe Ghosh) सहित कम से कम 28 लोग घायल हुए थे।

दिल्ली दंगों का कानूनी पक्ष:
2020 में हुए दिल्ली दंगों के मामलों में शरजील इमाम 28 जनवरी 2020 से और उमर खालिद 13 सितंबर 2020 से जेल में हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी 2026 को दोनों की जमानत याचिका खारिज कर दी। साथ ही कोर्ट ने एक साल तक नई जमानत याचिका दाखिल करने पर भी रोक लगा दी है। दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत जमानत देने से इनकार किया गया था।

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