क्या! डॉन डॉक्टर का खूनी पेशा?

आपने फिल्मों में या कहानियों में सुना होगा या देखा होगा कि जब कोई क्रिमिनल चाहे वह कोई नेता हो या कोई बड़ा व्यापारी कोई क्राइम करता है तो उसे छुपाने के लिए कई सारे प्रयास करता है टीवी के न्यूज़ चैनल को बंद करा देता है अखबारों को रोक देता है हर वह कोशिश करता है जिससे उसकी बदनामी जनता के बीच में ना हो। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह सब वास्तविक जीवन में भी हो सकता है। जी हां एक ऐसा ही गंभीर आरोप कहीं और नहीं उत्तर प्रदेश के जनपद गाजीपुर में लगा है जहां एक क्षेत्र में एक डॉक्टर द्वारा अपने गुनाहों को छिपाने के लिए अखबारों के वितरण को रोक दिया गया। अब ऐसे डॉक्टर को डॉन डॉक्टर कहेंगे तो गलत नही होगा?

वैसे तो डॉक्टर्स को मानवता का पेशा कहा जाता है लेकिन यह मानव कब दानव बन जाए यह कहा नहीं जा सकता। आजकल निजी अस्पतालों में मुंह मांगी रकम मांगी जाती है और रकम ना देने पर वहां कुछ गुंडे तैनात होते हैं जो आपसे रकम वसूलने के लिए हर तरीका अपनाते हैं। आजकल निजी अस्पतालों में कुछ अपराधी किस्म के लोगों को भी रखा जाता है साथ ही अस्पताल के अंदर आला और इंजेक्शन के अलावा लाठी और डंडे भी रखे जाते हैं। कहां तो यह जाता है कि लाठी-डंडे अराजक तत्वों से निपटने के लिए हैं लेकिन यह नहीं पता कि उनसे निपटने के लिए हैं या पैसा वसूलने के लिए।

आपको यकीन ना हो तो आप निजी अस्पतालों का निरीक्षण कर लीजिए, बिना किसी को बताए। आपको वहां पर कई ऐसे स्टाफ मिलेंगे जिनका व्यवहार आक्रमक होगा और आप गहराई में जाएंगे तो हो सकता है उनके ऊपर कुछ आपराधिक मुकदमे भी हो। अब भला ऐसे लोगों की जरूरत अस्पतालों में क्यों है यह तो आप समझ ही सकते हैं।

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के गाजीपुर (Ghazipur) में एक अस्पताल के स्टाफ द्वारा गर्भवती महिला (Pregnant Woman) और उसके पति के साथ मारपीट किए जाने का मामला सामने आया है. बताया जा रहा है कि तीन दिन पहले दिलदार नगर थाना क्षेत्र के जेके हॉस्पिटल (JK Hospital) में एक प्रसूता को प्रसव के लिए एडमिट कराया गया. यहां परिजनों से लगभग 35,000 रुपये जमा कराया गया. उसके बाद भी डॉक्टर का मन नहीं भरा और फिर लगभग 40,000 के आसपास की मांग की गई. जब परिवार मांगी हुई रकम नहीं दे पाया तो डॉक्टर और वहां के स्टाफ ने गर्भवती महिला और उसके पति को मारपीट कर निकाल दिया.

लाचार पति-पत्नी वहां से चले गए. गर्भवती महिला ने सरकार अस्पताल में मृत बच्चे को जन्म दिया है. इसके बाद से परिजनों का गुस्सा सातवें आसमान पर चढ़ गया.  उन लोगों ने डॉक्टर और स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई के लिए थाने पर एक दिन पहले प्रदर्शन किया. फिर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए डॉक्टर सहित तीन लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं सहित एससी-एसटी का मुकदमा दर्ज किया है. वहीं डॉक्टर के द्वारा कुछ लोगों पर पैसे मांगने का आरोप लगाते हुए अपने को पाक साफ बता रही है.

दिलदारनगर पुलिस ने अस्पताल के प्रबंधक नीतू वर्मा सहित कुल तीन लोगों के खिलाफ 306, 316, 504 और एससी-एसटी का मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की गई. 

पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है और अगर यह बात सत्य है तो भला अब इस अस्पताल में कौन इलाज करवाएगा या प्राइवेट अस्पतालों पर भरोसा कौन करेगा?

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