क्या अपनों के आक्रोश का शिकार हुईं सपना सिंह? खतरे में हैं जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी?

Special Report ।। जोड़ तोड़ की राजनीति को जितना कमजोर करने की कोशिश हो रही थी आज वह उतनी ही मजबूती से आगे बड़ रहा है। जनता जब अपने मत का प्रयोग करती है तो वह एक विचारधारा से प्रेरित होती है और उस विचारधारा से प्रेरित होकर वह उस उम्मीदवार को या उस पार्टी को अपना मत देती है। मान लीजिए कि जनता ने भाजपा के किसी उम्मीदवार को उसकी विचारधारा से प्रेरित होकर उसे अपना मत दिया लेकिन बाद में सत्ता के लिए उम्मीदवार किसी अन्य पार्टी में शामिल होकर उसकी सदस्यता ग्रहण कर ले तो क्या यह जनता के साथ अन्याय नहीं होगा। खैर ऐसा कहीं हुआ हो इसकी प्रामाणिकता हम नहीं देते।

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खबरें कहती है कि 2020 में मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी। कुल 230 सदस्यों वाली मध्य प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस के पास केवल 114 विधायक थे और उसे बहुमत के लिए 116 विधायक चाहिए थे। ऐसे में कांग्रेस को 4 निर्दलीय, दो बीएसपी और एक एसपी विधायक का समर्थन मिला था। इस तरह कुल 121 विधायक उसके साथ आ गए थे और कमलनाथ मुख्यमंत्री बन गए थे। वहीं बीजेपी के पास उस समय 108 विधायक थे। इसी दौरान कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस छोड़ दी और 22 विधायकों ने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद एमपी में कमलनाथ सरकार गिर गई और आज यहां बीजेपी की सरकार है।

गोवा में 2017 में बड़ी पार्टी के रूप ने कांग्रेस थी यानी 40 में से 17 सीटें और भाजपा के पास 13 सीटें थी लेकिन सरकार बनी भाजपा की। 2022 में भी कुछ ऐसा ही हुआ।

कर्नाटक का हाल आपको पता ही है। 2018 में 224 सीटों में से कांग्रेस जेडीएस गठबंधन को 120 सीट मिली और भाजपा को 104 सीटें। कांग्रेस जेडीएस गठबंधन को सरकार बन गई लेकिन 2019 तख्ता पलट गया। नाटकीय ढंग से 16 विधायक बीजेपी में शामिल हो गए और आज वहां बीजेपी की सरकार है।

महाराष्ट्र के बारे में तो आप ढंग से जानते हैं की किस तरह शिवसेना के विधायक गायब हुए और उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ नाचते नाचते शिवसेना गठबंधन की सरकार गिराकर भाजपा के साथ एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में सरकार बना लिया।

अरे बिहार तो भूल ही गए 2017 में नीतीश कुमार ने आरजेडी और कांग्रेस से गठबंधन तोड़ भाजपा के साथ सरकार बना लिया था और 2022 में भाजपा से गठबंधन तोड़ महागठबंधन के साथ सरकार बना लिया।

ये तो विधानसभा चुनाव का हाल था, ये कहानी बतानी जरूरी थी क्योंकि इन घटनाओं में जनता के मत के सम्मान को रौंदते हुए एक कहावत सच होती नजर आती है कि घर भेदी लंका ढाए…

खैर असली कहानी तो यहां हैं। पिछले साल यूपी के गाजीपुर में जिला पंचायत चुनाव हुएं, यहां 67 जिला पंचायत सदस्य हैं. इनमें बीजेपी के 6,सपा के 10,बसपा के 10,सुभासपा के 2,एआईएमआईएम के 2 सदस्य, जबकि जिले में 37 निर्दलीय जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुए थे. इनमे सबसे अधिक 32 यादव प्रत्याशी चुनाव जीत कर आए थे। उस वक्त सपा ने दावा किया था कि उनके पास 42 से ज्यादा सदस्य है। लेकिन जब मतगणना हुआ तो भाजपा को 47 मत मिलें और सपा को 20 मत। भाजपा ने निर्दल प्रत्याशी सपना सिंह को सदस्यता ग्रहण करवा कर जिला पंचायत अध्यक्ष पद का प्रत्याशी बनाया था। सो जीत के बाद सपना सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष बन गईं। वो भाजपा एमएलसी विशाल सिंह चंचल की रिश्तेदार भी हैं।

लेकिन ये राजनीति है कब कौन सा रंग दिखाए कहा नही जा सकता। यहां जनता के मत का सम्मान नही होता, यहां तो सत्ता पाने का गुमान होता है। गाजीपुर के सैदपुर ब्लाक के सिधौना गांव में सोमवार को जनपद के दो दर्जन जिला पंचायत सदस्यों ने एक महत्वपूर्ण बैठक कर जिला पंचायत अध्यक्ष सपना सिंह के मनमाने पन और खुद के अनदेखी का आरोप लगाकर आक्रोश जताया। जिपं सदस्य कमलेश राय ने कहा कि पिछले ढेड़ साल के कार्यकाल में मात्र दो बैठकें हुई है। जबकि हर तीन महीने पर एक बैठक अवश्य करनी चाहिए। पिछले अगस्त महीने में बैठक की तिथि तय कर कैंसिल कर दिया गया। सितंबर माह की बैठक मंगलवार को तय था जिसे अकारण अचानक कैंसिल कर दिया गया। सदन के अधिकांश सदस्य जिला पंचायत मीटिंग न बुलाने और बार बार महत्वपूर्ण बैठकों को कैंसिल किये जाने से नाराज है। अध्यक्ष महोदय बड़े पैमाने पर हुए स्ट्रीट लाइट घोटाले की जांच कराने से भाग रहीं है। जिला भर में करीब बारह करोड़ के 28 हजार लाइट मनमाने ढंग से लगाए गए है। जिनमें अधिकांश खराब होकर बेकार पड़े है।

बताया गया कि 2 दर्जन से ज्यादा सदस्य यानी 24 से ज्यादा जिला पंचायत सदस्यों ने जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आरोप कई हैं और अविश्वास प्रस्ताव पर भी विचार हो सकता है।

इस मामले में जब हमने जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि पंकज सिंह चंचल से बात किया तो उन्होंने कहा कि इसमें किसी अपने की चाल है जो हमारे ऊपर दवाब बनाना चाह रहा है। वहां 18 सदस्य थे जिनमे से 6 को डिनर के लिए बुलाया गया था, उन्हें पता ही नही था की ऐसी कोई मीटिंग भी है। ये सारे समाजवादी पार्टी के हैं। इनके आरोप बेबुनियाद हैं, हम नियम के अनुसार सही हैं।

कहा जा रहा कि ये सभी वही जिला पंचायत सदस्य हैं जिन्होंने सपना सिंह को मत देकर जीत दिलवाया। यदि पंकज सिंह चंचल की बात माने तो ये सब सपाई हैं यानी सपना सिंह को तो 47 मत मिले थे यानी इनमे 18 या 24 से ज्यादा सपा के थे। ये कैसे? क्या सपा समर्थकों ने भाजपा को वोट दिया था?

अगर ये सत्य है तो जनता के भावनाओं का क्या? उनके मत का क्या? क्या उनके साथ धोखा हुआ? लेकिन यहां सवाल तो सपना सिंह के जिला पंचायत अध्यक्ष बने रहने का है। क्योंकि सदस्यों ये बगावत जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी के लिए बड़ी समस्या बनने का संकेत है। पंकज सिंह चंचल के अनुसार ये 18 हैं और 6 अनजान थे यानी संख्या हुई 12, तो यदि 12 ने बगावत किया तो सपना सिंह के पास केवल 35 का समर्थन बचेगा। लेकिन यदि बैठक करने वाले जिला पंचायत सदस्यों का आंकड़ा सही है तो संख्या हुई कम से कम 24, और इन 24 ने बगावत किया तो सपना सिंह के पास केवल 23 का समर्थन बचेगा।

लेकिन क्या अविश्वास प्रस्ताव लाना इतना आसान होगा? 27 सितंबर 2022 यानी मंगलवार को उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम 1961 की धारा 15 एवं 28 में संशोधन का प्रस्ताव पारित कर दिया। जिसके अनुसार प्रदेश में जिला पंचायत अध्यक्ष और क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव अब 2 वर्ष बाद ही लाया जा सकेगा इसके लिए दो तिहाई सदस्यों की सहमति भी अनिवार्य होगी। पंचायती राज विभाग के अनुसार अभी जिला पंचायत अध्यक्ष और क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ 1 वर्ष बाद ही अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता था इसके लिए निर्वाचित सदस्यों के 51 फ़ीसदी की सहमति जरूरी होती थी अधिनियम में संशोधन के बाद अब निर्वाचन के 2 वर्ष बाद ही अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकेगा। अब बात यदि गाज़ीपुर की जिला पंचायत अध्यक्ष सपना सिंह को करें तो उन्हें अभी निर्वाचित हुए करीब 1 साल 3 महीने हो रहे हैं।

वहीं बैठक में शामिल खेदन यादव ने कहा कि अपने क्षेत्र के विकास कार्यो की उपेक्षा और अनदेखी किये जाने से पंचायत सदस्य आक्रोशित है। पांच महीने बाद मंगलवार को जिला सभागार में होने वाले महत्वपूर्ण बैठक को अचानक रद्द किए जाने के बाद आक्रोशित सभी सदस्यों ने आगे की लड़ाई के लिए एकजुटता दिखाने के लिए यह आवश्यक बैठक किया है। पूरे सदन में अपना जनमत खो चुकीं सपना सिंह अपने समर्थक सदस्यों को सजेहने में नाकाम है। हम सभी सदस्यगण जिले के आला अधिकारियों सहित प्रदेश के उच्चाधिकारियों को इस उपेक्षा और अनदेखी की शिकायत करेंगे। जिला पंचायत सदस्यों में रामखेलावन, विवेक यादव (सैदपुर) भोला बिंद, देवेंद्र यादव, जोखन यादव (देवकली) आकाश यादव(जमानियां) पांचू यादव, पंकज यादव(करंडा) आनंद कुमार(जखनिया), मटरू पहलवान(बिरनो) और गोबिंद यादव(रेवतीपुर) शैलेश कुमार, पारस यादव (मरदह) प्रीतम पासवान, विजय बंगाली, पूजा यादव (मोहम्मदाबाद) अखिलेश गौतम, रंजीत कुमार, आलोक, महेश यादव(सदर) शामिल रहे।

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