डॉक्टरों को बनाया कट्टरपंथी, दिल्ली ब्लास्ट से पहले बनाए गए आतंकी संगठन ‘अंसार इंटरिम’ की पूरी कहानी

जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) पुलिस ने हाल ही में एक कथित ‘वाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल का खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार कुछ डॉक्टरों ने ‘अंसार अंतरिम’ नाम से एक संगठन बनाकर आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश रची। इस मामले में कई डॉक्टरों को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों ने वर्ष 2016 के आसपास कट्टरपंथी विचारधारा अपनाई थी। मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (National Investigation Agency) द्वारा की जा रही है।

दिल्ली ब्लास्ट से जुड़ा खुलासा:
दिल्ली (Delhi) में 10 नवंबर 2025 को लाल किला (Red Fort) के पास एक कार में विस्फोट हुआ था, जिसमें 15 लोगों की जान गई थी। जांच में सामने आया कि कार में धमाका करने वाला डॉ. उमर नबी (Dr. Umar Nabi) था। इसी मामले की तहकीकात के दौरान हरियाणा (Haryana) स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी (Al Falah University) से जुड़े कई डॉक्टरों को हिरासत में लिया गया। जांच एजेंसियों ने इस नेटवर्क को ‘वाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल’ नाम दिया।

अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा:
अंतरराज्यीय नेटवर्क का सुराग पिछले वर्ष 19 अक्टूबर को मिला, जब श्रीनगर (Srinagar) के नौगाम क्षेत्र के बनपोरा इलाके में जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed) के पोस्टर दीवारों पर पाए गए। इसके बाद श्रीनगर पुलिस ने मामला दर्ज कर सीसीटीवी फुटेज की जांच की। जांच के आधार पर आरिफ निसार डार (Arif Nisar Dar), यासिर-उल-अशरफ (Yasir-ul-Ashraf) और मकसूद अहमद डार (Maqsood Ahmad Dar) को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार इन पर पहले भी पत्थरबाजी के मामले दर्ज रहे हैं।

म्यूल अकाउंट्स का बड़ा नेटवर्क:
सुरक्षा एजेंसियों ने जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) में संदिग्ध म्यूल अकाउंट्स के व्यापक नेटवर्क का भी खुलासा किया है। एजेंसियों को आशंका है कि इन खातों के जरिए टेरर फंडिंग की जा रही थी। पिछले तीन वर्षों में 8,000 से अधिक ऐसे खाते फ्रीज किए गए हैं। बताया गया है कि इन खातों का इस्तेमाल कथित तौर पर आसान कमीशन और कम जोखिम का झांसा देकर किया जाता था। लोगों को अस्थायी रूप से खाते उपलब्ध कराने के लिए प्रेरित कर उनके बैंकिंग विवरण का उपयोग किया जाता था।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में दावा:
यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल (United Nations Security Council) की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि दिल्ली के लाल किला (Red Fort) के पास हुए विस्फोट की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed) ने ली थी। रिपोर्ट में पहलगाम (Pahalgam) में हुए हमले का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें शामिल तीनों आतंकी मारे जा चुके बताए गए हैं। यह रिपोर्ट 1267 सैंक्शंस कमेटी को सौंपी गई, जो आईएसआईएस (ISIS) और अल-कायदा (Al-Qaeda) जैसे संगठनों पर निगरानी रखती है।

महिला विंग का गठन:
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि जैश प्रमुख मसूद अजहर (Masood Azhar) ने अक्टूबर 2025 में महिला आतंकियों के लिए ‘जमात-उल-मुमिनात’ नामक एक अलग विंग बनाई थी। बताया गया है कि यह विंग आतंकी गतिविधियों के समर्थन के लिए गठित की गई थी। हालांकि, यह विंग संयुक्त राष्ट्र की सूची में शामिल नहीं है। सदस्य देशों के आकलन में मतभेद भी सामने आए हैं, जहां कुछ ने संगठन की सक्रियता को जारी बताया है, जबकि कुछ ने इसे निष्क्रिय माना है।

एनआईए जांच में मिले लिंक:
दिल्ली ब्लास्ट के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (National Investigation Agency) ने विस्तृत जांच शुरू की। एजेंसी को जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed) और अंसार गजवात-उल-हिंद (Ansar Ghazwat-ul-Hind) से जुड़े होने के संकेत मिले। इस मामले में अब तक 9 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें 5 डॉक्टर शामिल हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि नेटवर्क को विभिन्न स्तरों पर सहयोग प्रदान किया जा रहा था।

पूरे मामले में जांच जारी है और संबंधित एजेंसियां तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही हैं। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए विभिन्न स्तरों पर सतर्कता बढ़ाई गई है।


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