चीन से ईरान रवाना हुए दो संदिग्ध जहाज, रॉकेट बनाने के केमिकल की आशंका से बढ़ी चिंता

मध्य-पूर्व में जारी तनाव और सैन्य गतिविधियों के बीच ईरान की सरकारी शिपिंग कंपनी के दो जहाज चीन से रवाना होने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार ये जहाज चीन के गाओलान पोर्ट से ईरान की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे समय में इन जहाजों की आवाजाही कई सवाल खड़े कर रही है, क्योंकि दावा किया जा रहा है कि इन पर ऐसे केमिकल लदे हो सकते हैं जिनका उपयोग रॉकेट और मिसाइल निर्माण में किया जाता है। यदि यह आशंका सही साबित होती है तो क्षेत्र में जारी संघर्ष और अधिक लंबा खिंच सकता है तथा तनाव बढ़ सकता है।

चीन के गाओलान पोर्ट से रवाना हुए जहाज:
जानकारी के अनुसार ईरान की सरकारी शिपिंग कंपनी इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान शिपिंग लाइन्स (IRISL) के दो जहाज शब्दीस (Shabdis) और बर्जिन (Berzin) चीन के गाओलान पोर्ट (Gaolan Port) से रवाना हुए हैं। सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर इन जहाजों की गतिविधियों की पुष्टि होने की बात सामने आई है।
गाओलान पोर्ट चीन के झूहाई शहर (Zhuhai City) में दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित एक महत्वपूर्ण बंदरगाह है। यह बंदरगाह केमिकल लोडिंग के लिए भी जाना जाता है और यहां से कई औद्योगिक तथा विशेष प्रकार के केमिकल जहाजों में लोड किए जाते हैं।

रिपोर्ट्स में मिलिट्री केमिकल होने की आशंका:
अमेरिकी अखबार द वॉशिंगटन पोस्ट (The Washington Post) की रिपोर्ट के अनुसार शब्दीस और बर्जिन जहाजों में बड़ी संख्या में कंटेनर ले जाने की क्षमता है। इन जहाजों में करीब 20 फीट लंबे लगभग 21 हजार कंटेनर ले जाए जा सकते हैं।
रिपोर्ट्स में यह संभावना जताई गई है कि इन कंटेनरों में सोडियम परक्लोरेट (Sodium Perchlorate) नामक केमिकल हो सकता है। यह एक शक्तिशाली ऑक्सीडाइजर माना जाता है और इसका उपयोग अमोनियम परक्लोरेट बनाने में किया जाता है। अमोनियम परक्लोरेट से मिसाइलों के लिए सॉलिड फ्यूल तैयार किया जाता है, जिसका इस्तेमाल रॉकेट और बैलिस्टिक मिसाइलों में किया जा सकता है।

IRISL पर पहले भी लगे हैं प्रतिबंध:
अमेरिका (United States) ने पहले भी इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान शिपिंग लाइन्स (IRISL) पर आरोप लगाया है कि यह कंपनी तेहरान के बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम से जुड़े सामान की आपूर्ति में भूमिका निभाती है। इसी कारण अमेरिका, ब्रिटेन (United Kingdom) और यूरोपीय यूनियन (European Union) की ओर से इस कंपनी पर प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक वर्ष 2026 की शुरुआत में IRISL के कम से कम 12 जहाज इसी पोर्ट के उसी टर्मिनल पर पहुंचे थे, जहां से शब्दीस और बर्जिन रवाना हुए हैं। इनमें से 11 जहाजों ने माल लादा था और उन पर भी मिलिट्री से जुड़े केमिकल और कच्चा माल होने की आशंका जताई गई थी।

जहाजों का समुद्री रास्ता और संभावित खतरे:
रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों जहाज साउथ चाइना सी (South China Sea) पार कर चुके हैं और मलक्का स्ट्रेट (Malacca Strait) के आसपास पहुंचने की जानकारी सामने आई है। बर्जिन फिलहाल मलेशिया (Malaysia) के पास समुद्र में लंगर डाले खड़ा बताया जा रहा है, जहां से उसे करीब 6400 किलोमीटर दूर ईरान के बंदर अब्बास पोर्ट (Bandar Abbas Port) तक जाना हो सकता है।
वहीं शब्दीस वियतनाम (Vietnam) के समुद्री क्षेत्र के पास आगे बढ़ रहा है और उसका संभावित गंतव्य चाबहार पोर्ट (Chabahar Port) बताया जा रहा है, जो लगभग 7200 किलोमीटर दूर है। इन दोनों जहाजों को ईरान पहुंचने के लिए होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) से गुजरना होगा, जहां अमेरिकी और ईरानी नौसैनिक बेड़े तैनात बताए जाते हैं।

क्षेत्र में तनाव और समुद्री गतिविधियों पर असर:
जानकारी के अनुसार हाल के दिनों में इस क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों के चलते समुद्री यातायात पर भी असर पड़ा है। अमेरिकी थिंकटैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (Center for Strategic and International Studies) से जुड़े एशिया मैरीटाइम ट्रांसपेरेंसी इनिशिएटिव (Asia Maritime Transparency Initiative) के डिप्टी डायरेक्टर हैरिसन प्रेटैट (Harrison Prétat) के मुताबिक संघर्ष शुरू होने के बाद होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की संख्या काफी कम हो गई है।
रिपोर्ट्स में बताया गया कि पहले रोजाना औसतन 153 जहाज इस रास्ते से गुजरते थे, लेकिन मार्च की शुरुआत के बाद यह संख्या घटकर लगभग 13 रह गई है। इससे कई देशों के जहाज फारस की खाड़ी (Persian Gulf) के आसपास फंसे हुए बताए जाते हैं।

अमेरिकी प्रतिक्रिया पर नजर:
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अमेरिका के डिफेंस डिपार्टमेंट पेंटागन (Pentagon), ट्रेजरी डिपार्टमेंट (Treasury Department) और व्हाइट हाउस (White House) की ओर से आधिकारिक बयान जारी होने की जानकारी सामने नहीं आई है।
हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि यदि इन जहाजों में संवेदनशील सामग्री होने की पुष्टि होती है तो यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और गंभीर हो सकता है।

चीन और ईरान के संबंधों को लेकर चर्चा:
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन (China) और ईरान (Iran) के बीच पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक सहयोग बढ़ा है। वर्ष 2021 में दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक साझेदारी समझौता हुआ था। इसी कारण ऊर्जा, व्यापार और तकनीकी क्षेत्रों में दोनों देशों के संबंध लगातार चर्चा में रहते हैं।
विश्लेषकों का यह भी कहना है कि ईरान का तेल चीन के लिए महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत माना जाता है, जिसके कारण दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को लेकर वैश्विक स्तर पर लगातार नजर रखी जाती है।

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