जालौन जनपद के कुठौंद थाना कांड में तैनात इंस्पेक्टर अरुण कुमार राय (Arun Kumar Rai) की मौत का मामला लगातार जटिल होता जा रहा है। जांच में सामने आए तथ्यों ने पुलिस महकमे में भी हलचल मचा दी है। कॉल रिकॉर्ड, घटनाक्रम और गवाहों के बयानों के आधार पर यह मामला अब केवल आत्महत्या तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि इसमें कई परतें खुलती जा रही हैं। मामले में महिला सिपाही मीनाक्षी शर्मा (Meenakshi Sharma) को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जो इस पूरे केस की मुख्य कड़ी मानी जा रही है।
कॉल रिकॉर्ड और रिश्तों पर उठे सवाल:
सूत्रों के अनुसार इंस्पेक्टर अरुण कुमार राय और महिला सिपाही मीनाक्षी शर्मा के बीच महज तीन दिनों में सौ से अधिक बार फोन पर बातचीत हुई थी। इनमें अधिकांश वीडियो कॉल थीं और कुछ कॉल रिकॉर्डिंग भी की गईं। ये तथ्य सामने आने के बाद मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। मीनाक्षी ने पूछताछ में स्वीकार किया कि इंस्पेक्टर के साथ उसके करीबी संबंध थे, लेकिन उसने ब्लैकमेल करने से इनकार किया।

घटना वाले दिन की संदिग्ध गतिविधियां:
मीनाक्षी घटना के दिन मेरठ से कार द्वारा जालौन पहुंची थी। उसके साथ सिपाही अंकित भी मौजूद था। मीनाक्षी के बयान के अनुसार जब वह शुक्रवार रात इंस्पेक्टर के कमरे में गई तो वह पहले से घायल अवस्था में बिस्तर पर पड़े थे। हालांकि, इस सवाल का कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया कि वह देर रात कमरे में क्यों गई थी।
थाना कैंपस में चली गोली:
शुक्रवार रात करीब 9.17 बजे कुठौंद थाना (Kuthaund Police Station) परिसर में इंस्पेक्टर के कमरे से गोली चलने की आवाज आई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मीनाक्षी कमरे से बाहर भागते हुए निकली और चिल्लाकर बताया कि साहब ने खुद को गोली मार ली है। इसके तुरंत बाद वह मौके से निकल गई।
मौके से मिले अहम सुराग:
इंस्पेक्टर का शव मच्छरदानी के भीतर बिस्तर पर खून से लथपथ मिला। उनकी सर्विस रिवॉल्वर पास में पड़ी थी। सिर में गोली लगने के निशान मिले, जो आर-पार हो गए थे। शुरुआती जांच में इसे आत्महत्या बताया गया, लेकिन कमरे से गोली का खोखा न मिलना कई सवाल खड़े करता है।
परिवार का आरोप और एफआईआर:
घटना के अगले दिन संत कबीरनगर (Sant Kabir Nagar) से इंस्पेक्टर का परिवार जालौन पहुंचा। पत्नी माया राय ने महिला सिपाही मीनाक्षी शर्मा के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया। एफआईआर में आरोप लगाया गया कि मीनाक्षी ने खुद या किसी अन्य के जरिए हत्या करवाई है।

गिरफ्तारी और कोर्ट पेशी:
रविवार को पुलिस ने मीनाक्षी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। कोर्ट परिसर में उसके हाव-भाव को लेकर भी चर्चाएं रहीं। मीडिया को देखकर उसने चेहरे को रूमाल से ढक लिया।
तीन एंगल पर जांच:
इंस्पेक्टर की मौत को लेकर तीन संभावित एंगल सामने आए हैं। पहला, यह कि इंस्पेक्टर कथित ब्लैकमेलिंग से परेशान थे और मीनाक्षी के पहुंचते ही उन्होंने खुद को गोली मार ली। दूसरा, सीसीटीवी फुटेज में मीनाक्षी को थाने आते समय फोन पर बात करते देखा गया है, जिससे अंदेशा है कि घटना से पहले बातचीत हो रही थी। तीसरा और गंभीर एंगल हत्या का है, क्योंकि बुलेट का न मिलना इस दिशा में संदेह पैदा करता है।
महिला सिपाही की जीवनशैली पर चर्चा:
पुलिस सूत्रों का कहना है कि मीनाक्षी की जीवनशैली सामान्य सिपाही जैसी नहीं थी। वह जिस कमरे में रहती थी, वहां एसी लगा था और वह आईफोन का उपयोग करती थी। महिला सिपाहियों के बीच उसका मेलजोल सीमित था और अधिकतर समय फोन पर व्यस्त रहती थी।
पुराने संपर्क और ट्रांसफर का सिलसिला:
जानकारी के मुताबिक जुलाई 2024 में दोनों जालौन के कोंच थाना (Konch Police Station) में एक साथ तैनात थे, तभी उनके बीच नजदीकियां बढ़ीं। बाद में उरई और फिर कुठौंद ट्रांसफर के बाद भी मीनाक्षी का आना-जाना बना रहा। बताया जा रहा है कि हाल ही में उसने तीन लाख रुपए का हार खरीदा था, जिसे लेकर भी चर्चाएं हैं।
शादी और पैसों को लेकर आरोप:
मीनाक्षी की सगाई हो चुकी थी और फरवरी 2026 में शादी तय थी। इंस्पेक्टर के करीबी लोगों का कहना है कि वह शादी के खर्च को लेकर दबाव बना रही थी और 25 लाख रुपए की मांग कर रही थी। यह भी आरोप है कि वह निजी वीडियो भेजने की धमकी देती थी।
सर्विलांस जांच में चौंकाने वाले तथ्य:
सर्विलांस टीम को मीनाक्षी के पास तीन मोबाइल फोन और चार सिम कार्ड मिले हैं, जबकि इंस्पेक्टर के पास तीन सिम पाए गए। सभी के डेटा की जांच की जा रही है।
पीलीभीत से जुड़े पुराने आरोप:
मीनाक्षी शर्मा जालौन से पहले पीलीभीत (Pilibhit) में तैनात रही थी। वहां सिपाही मोहित खोखर ने उस पर गंभीर आरोप लगाए थे। मोहित का कहना है कि उसे प्रेम जाल में फंसाकर 25 लाख रुपए मांगे गए और इनकार करने पर झूठा केस दर्ज करा दिया गया।
ब्लैकमेलिंग के दावों पर जांच:
मोहित का आरोप है कि इसी तरह अन्य पुलिसकर्मियों को भी निशाना बनाया गया। एक वरिष्ठ उपनिरीक्षक से भी पैसे वसूले जाने की बात कही गई है। हालांकि यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है और इन आरोपों की जांच अलग से की जा रही है।
एसआईटी की भूमिका:
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी गठित की गई है, जो यह जांच कर रही है कि मीनाक्षी के वरिष्ठ अधिकारियों से किस तरह के संबंध थे और कॉल रिकॉर्ड का पूरा विश्लेषण किया जा रहा है।
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