IndiGo Crisis: ‘हवाई’ संकट के पांच दिन, हवाई अड्डे बने रेलवे प्लेटफार्म…

नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (Indira Gandhi International Airport – IGI) पर बीते पांच दिनों से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। उड़ानों के अचानक रद्द होने और लंबे विलंब ने यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। किसी को परीक्षा देनी है, कोई दफ्तर के जरूरी काम से जा रहा था तो कोई छोटे बच्चों के साथ सफर में फंसा हुआ है। यहां सिर्फ विमान ही नहीं रुके, बल्कि यात्रियों की उम्मीदें भी कतारों में अटक गईं।

लगातार फ्लाइट कैंसिल होने से एयरपोर्ट का नजारा रेलवे प्लेटफॉर्म जैसा हो गया है। ठंड के मौसम में रात-रात भर कुर्सियों पर बैठे यात्री बेहद परेशान दिखे। कई लोगों ने आरोप लगाया कि न तो सही जानकारी दी जा रही है और न ही मूलभूत सुविधाओं का इंतजाम किया गया है।

लगातार रद्द हो रही उड़ानें, बढ़ती मुश्किलें:
इंडिगो (IndiGo) की ओर से लगातार उड़ानें रद्द किए जाने और किरायों में तेज बढ़ोतरी ने यात्रियों का गुस्सा बढ़ा दिया है। कई रूट्स पर टिकटों के दाम करीब 120 फीसदी तक बढ़ गए। हालात यह रहे कि लोग ठंड में एयरपोर्ट की कुर्सियों पर ही रात बिताने को मजबूर हो गए। सरकार की ओर से हस्तक्षेप के बाद कुछ प्रभावित रूट्स पर किराया सीमा लागू की गई, जिससे राहत की उम्मीद जगी है।

तीन साल की बच्ची के साथ परेशान मां:
नागपुर (Nagpur) निवासी पूजा और उनके पति उत्कर्ष हिमाचल प्रदेश के कोलडैम (Koldam) से दिल्ली पहुंचे थे। वहां से उन्हें नागपुर जाना था। पूजा के अनुसार, देर रात दिल्ली पहुंचने के बाद सुबह की फ्लाइट कैंसल हो गई। उन्होंने तीन साल की बच्ची को गोद में लेकर घंटों कतार में खड़े रहकर टिकट दोबारा तय कराने की कोशिश की। अलग-अलग समय की फ्लाइट मिलने के बाद भी एक बार फिर उड़ान रद्द कर दी गई, जिससे अब उन्हें 8 दिसंबर की नई तारीख दी गई है।

परीक्षा के कारण बस से जाने को मजबूर:
बीकॉम की छात्रा अनुष्का की चंडीगढ़ (Chandigarh) में परीक्षा है। उनका परिवार तिरुपति (Tirupati) से दिल्ली पहुंचा था, लेकिन यहां आकर पता चला कि आगे की उड़ान रद्द हो चुकी है। दो दिन तक इंतजार के बाद भी कोई समाधान नहीं मिलने पर परिवार ने बस से चंडीगढ़ जाने का फैसला किया, क्योंकि परीक्षा को लेकर जोखिम नहीं लिया जा सकता।

पहली फ्लाइट और सात घंटे की देरी:
तिरुचिरापल्ली (Tiruchirappalli) निवासी अब्दुल्ला हरियाणा के पानीपत (Panipat) में काम करते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी हिनूल पहली बार अकेले फ्लाइट से सफर कर रही हैं और वही उड़ान करीब सात घंटे देरी से चलने वाली है। एयरपोर्ट पर इंतजार करते अब्दुल्ला को अपनी पत्नी की चिंता सता रही थी, क्योंकि उन्होंने पहले कभी अकेले लंबी यात्रा नहीं की है।

रात भर बैठकर काटी ठंड:
कई यात्रियों ने बताया कि पूरी रात कुर्सियों पर बैठकर बितानी पड़ी। न पर्याप्त बैठने की व्यवस्था थी और न पानी या भोजन की। ठंड में छोटे बच्चों और बुजुर्गों को ज्यादा दिक्कत हुई। यात्रियों का कहना है कि एयरपोर्ट पर अव्यवस्था साफ नजर आई।

महिलाओं के लिए स्थिति और कठिन:
छोटे बच्चों के साथ सफर कर रहीं महिलाओं के लिए हालात और ज्यादा चुनौतीपूर्ण रहे। पूजा ने बताया कि तीन साल की बच्ची के साथ घंटों इंतजार करना किसी कठिन परीक्षा से कम नहीं। आसपास न खाने की सही व्यवस्था थी और न आराम करने की। वाराणसी (Varanasi) से एक महिला एक साल के बच्चे के साथ दो दिनों से उड़ान का इंतजार कर रही हैं, जबकि बच्चे को तेज बुखार भी है।

रिफंड में भारी कटौती का आरोप:
उत्कर्ष ने बताया कि यदि वे टिकट रद्द कर बस से जाना चाहें तो 12 हजार रुपये में से सिर्फ 2 हजार रुपये लौटाए जा रहे हैं। दूसरी ओर, नई टिकट बुक करने पर वही उड़ान दोगुने दाम पर मिल रही है। इस स्थिति ने यात्रियों को दोहरी परेशानी में डाल दिया है।

एयरपोर्ट बना रेलवे प्लेटफॉर्म जैसा:
इंडिगो की ऑपरेशनल विफलता के चलते देशभर की ट्रैवल चेन प्रभावित हुई है। कई घरेलू रूट्स पर टिकटों की कीमतें इतनी बढ़ गईं कि वे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से भी महंगी दिखीं। इस दौरान स्पाइसजेट (SpiceJet) और एयर इंडिया (Air India) जैसी अन्य एयरलाइंस के किरायों में भी इजाफा देखा गया।

सरकार का हस्तक्षेप और फेयर कैप:
स्थिति बिगड़ने पर नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation) ने हस्तक्षेप किया और प्रभावित रूट्स पर किराया सीमा तय की। इसका उद्देश्य मौके का फायदा उठाकर बढ़ाए गए किरायों पर रोक लगाना है। कुछ रूट्स पर इसके बाद कीमतों में आंशिक राहत भी देखने को मिली।

क्यों रद्द हो रही हैं उड़ानें:
नवंबर और दिसंबर का समय एयरलाइंस के लिए सबसे व्यस्त माना जाता है। डीजीसीए (DGCA) की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक साल में मौसम, स्टाफ की कमी और तकनीकी कारणों से हजारों उड़ानें रद्द हुई हैं। इस बार भी इंडिगो ने तकनीकी और ऑपरेशनल दिक्कतों का हवाला दिया है, लेकिन यात्रियों का कहना है कि समय पर सूचना न मिलना सबसे बड़ी समस्या है।

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