बिहार के कैमूर (Kaimur) जिले के मोहनिया थाना क्षेत्र में उत्पाद विभाग की कार्रवाई ने एक बार फिर अवैध शराब तस्करी के नेटवर्क को उजागर किया है। गुप्त सूचना के आधार पर की गई इस कार्रवाई में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) से आ रही एक स्कॉर्पियो वाहन से 277 लीटर अवैध शराब बरामद की गई। मामला इसलिए भी चर्चा में आ गया क्योंकि वाहन पर उत्तर प्रदेश के जनपद गाजीपुर की राज्यसभा सांसद (Rajya Sabha MP) डॉ. संगीता बलवंत (Dr. Sangeeta Balwant) का स्टिकर और आगे बीजेपी (BJP) का झंडा लगा हुआ था। इस घटना ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है।
गुप्त सूचना पर की गई सटीक कार्रवाई:
उत्पाद विभाग को शराब तस्करी से जुड़ी पुख्ता सूचना मिली थी, जिसके बाद टीम ने मोहनिया थाना क्षेत्र के लूरपुरवा गांव के पास घेराबंदी की। उत्पाद विभाग के एएसआई कुमार गौरव (ASI Kumar Gaurav) के अनुसार, जैसे ही संदिग्ध स्कॉर्पियो मौके पर पहुंची, टीम ने उसे रोकने का प्रयास किया। तलाशी के दौरान वाहन से भारी मात्रा में अवैध शराब बरामद की गई। कार्रवाई को पूरी सतर्कता के साथ अंजाम दिया गया, ताकि किसी भी तरह की चूक न हो।
रात के अंधेरे का फायदा उठाकर फरार तस्कर:
कार्रवाई के दौरान तस्करों ने रात के अंधेरे का फायदा उठाया और मौके से फरार होने में सफल रहे। हालांकि, उत्पाद विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए स्कॉर्पियो वाहन को जब्त कर लिया। इसके साथ ही तस्करी में सहयोग के लिए इस्तेमाल किए जा रहे एक अन्य लाइनर वाहन को भी कब्जे में लिया गया है। विभाग का कहना है कि फरार आरोपियों की पहचान के लिए वाहन से जुड़े दस्तावेजों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
जब्त वाहन और शराब से जुड़े साक्ष्य जुटाने पर जोर:
उत्पाद विभाग और स्थानीय पुलिस संयुक्त रूप से इस मामले की जांच में जुटी हुई है। स्कॉर्पियो और लाइनर वाहन के रजिस्ट्रेशन, आवागमन के रूट और संभावित संपर्क सूत्रों की गहनता से पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इस कार्रवाई के बाद शराब तस्करी से जुड़े बड़े नेटवर्क के सामने आने की संभावना है। जांच के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि वाहन पर लगाए गए राजनीतिक स्टिकर और झंडे का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया था।
बिहार में शराबबंदी के बीच सतर्कता का उदाहरण:
यह कार्रवाई बिहार (Bihar) में लागू शराबबंदी कानून के तहत उत्पाद विभाग की सतर्कता को दर्शाती है। राज्य में शराब की तस्करी रोकने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। खासकर ऐसे मामलों में, जहां किसी जनप्रतिनिधि के नाम या पहचान का दुरुपयोग सामने आता है, विभाग अतिरिक्त सावधानी बरत रहा है। अधिकारियों का कहना है कि कानून के दायरे में रहकर हर पहलू की जांच की जा रही है, ताकि निर्दोष को कोई नुकसान न पहुंचे और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय:
वाहन पर राज्यसभा सांसद का स्टिकर और बीजेपी का झंडा लगे होने के कारण यह मामला राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गया है। लोग यह जानने को उत्सुक हैं कि तस्करों ने इस तरह के प्रतीकों का इस्तेमाल क्यों किया। जानकारों का मानना है कि कई बार तस्कर जांच से बचने के लिए प्रभावशाली नामों और प्रतीकों का सहारा लेते हैं, ताकि रास्ते में किसी तरह की सख्ती का सामना न करना पड़े।
राज्यसभा सांसद की प्रतिक्रिया:
इस पूरे मामले पर राज्यसभा सांसद डॉ. संगीता बलवंत ने अपना भारत टाइम्स (Apna Bharat Times) से बातचीत में स्पष्ट कहा कि यह पूरी तरह से एक साजिश है। उन्होंने कहा कि बिहार पुलिस और उत्पाद विभाग ने अच्छा काम किया है और जो लोग दोषी हैं, उन पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। सांसद के अनुसार, उनके नाम और पहचान का गलत इस्तेमाल कर उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने जांच एजेंसियों से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
जांच में हो सकते हैं अहम खुलासे:
उत्पाद विभाग का कहना है कि आगे की जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। फरार तस्करों की गिरफ्तारी के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इस तस्करी के पीछे कौन लोग शामिल हैं और वाहन पर लगाए गए स्टिकर व झंडे का वास्तविक उद्देश्य क्या था। विभाग ने इस कार्रवाई को सफल बताते हुए कहा है कि शराब तस्करी के खिलाफ अभियान और तेज किया जाएगा।
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