राजधानी लखनऊ (Lucknow) में सरकारी जमीनों पर कब्जे का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एलडीए (LDA) जोन-7 के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में एक बार फिर कुछ दबंग तत्वों द्वारा ऐतिहासिक झील को पाटने का कार्य जारी है। बताया जा रहा है कि यह वही स्थान है, जहां पूर्व में भी कब्जे की कोशिशें की गई थीं, लेकिन उस समय जिलाधिकारी (District Magistrate) ने संज्ञान लेते हुए तत्काल कार्रवाई कर उसे रुकवा दिया था। इसके बावजूद अब दोबारा उसी झील पर अवैध कब्जे का प्रयास किया जा रहा है।
ऐतिहासिक मोतीझील पर फिर अवैध कब्जे की कोशिश:
थाना बाजारखाला (Bazar Khala) क्षेत्र के अंतर्गत स्थित मोतीझील (Motijheel) लखनऊ की पहचान मानी जाती है। यह झील न केवल शहर की सुंदरता बढ़ाती है, बल्कि आसपास के इलाकों के जलस्तर को भी बनाए रखती है। बताया जा रहा है कि कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा इस झील को पाटने का कार्य फिर से शुरू कर दिया गया है। झील के एक हिस्से में मिट्टी डालने और निर्माण सामग्री पहुंचाने का काम देखा गया है, जिससे स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया है।
जिलाधिकारी के आदेश के बाद भी जारी कब्जा:
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कुछ महीने पहले जब झील पाटने का प्रयास किया गया था, तब जिलाधिकारी ने सख्त कार्रवाई के आदेश देते हुए कब्जा रोकने का निर्देश दिया था। एलडीए (LDA) और नगर निगम (Nagar Nigam) की टीम ने संयुक्त रूप से मौके पर जाकर कार्रवाई भी की थी। लेकिन अब एक बार फिर वही दबंग लोग प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर कब्जे का खेल शुरू कर चुके हैं।
काली बस्ती के पास सबसे ज्यादा सक्रिय कब्जाधारी:
मोतीझील के पास काली बस्ती (Kali Basti) क्षेत्र में झील के किनारों पर तेजी से अवैध मिट्टी भरने का काम हो रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह काम रात के समय ज्यादा किया जा रहा है ताकि प्रशासन की नजर से बचा जा सके। लोगों ने आशंका जताई है कि अगर प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो झील पूरी तरह पाट दी जाएगी और उसका अस्तित्व मिट जाएगा।
प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल:
लगातार हो रहे इस अवैध कब्जे को लेकर प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब यह काम खुलेआम किया जा रहा है, तब भी प्रशासन मौन है। लोगों ने जिलाधिकारी से एक बार फिर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है ताकि ऐतिहासिक धरोहर को बचाया जा सके।
स्थानीय नागरिकों की अपील:
निवासियों का कहना है कि मोतीझील सिर्फ एक जलाशय नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक पहचान है। उन्होंने कहा कि यह झील वर्षों से इस क्षेत्र की सुंदरता और पर्यावरण संतुलन का प्रतीक रही है। ऐसे में इसे बचाना हर नागरिक का कर्तव्य है।
निष्कर्ष:
लखनऊ में सरकारी संपत्तियों पर कब्जे की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। मोतीझील जैसी ऐतिहासिक जगह पर हो रहा अवैध निर्माण इस बात का प्रमाण है कि प्रशासन की सख्ती के बाद भी ऐसे लोगों के हौसले बुलंद हैं। अगर जल्द ही इस पर रोक नहीं लगी, तो लखनऊ की इस विरासत का नामो-निशान मिट जाएगा।
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