चुनावों से पहले संकट में फंस सकते हैं सोरेन, केजरीवाल और लालू कुनबा!

प्रवर्तन निदेशालय की जांच का सामना कर रहे झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और बिहार के पूर्व सीएम एवं केंद्रीय रेल मंत्री रहे लालू प्रसाद यादव व उनके परिवार के सदस्यों की मुसीबत बढ़ सकती है। लोकसभा चुनाव से पहले ये सभी नेता बड़े संकट में फंस सकते हैं। झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन को ईडी तलाश रही है, हालांकि वे रांची में हैं। उनके दिल्ली एवं रांची स्थित आवास पर ईडी ने दस्तक दी थी। इन सभी नेताओं के मामले में कहा जा रहा है कि जांच एजेंसी के पास पूछताछ के लिए पुख्ता सबूत हैं। तीनों ही मामलों में उक्त नेताओं के खिलाफ, जांच एजेंसी एक ‘लिंक’ जोड़ रही हैं। यानी जो भी घोटाला हुआ है, उसमें भले ही ये लोग प्रत्यक्ष तौर पर न सही, लेकिन इनकी सहमति रही है। जिन लोगों पर प्रत्यक्ष आरोप हैं, उनमें से कई लोगों ने ईडी के समक्ष इन नेताओं की कथित संलिप्तता होने की बात स्वीकार की है। यही वजह है कि जांच एजेंसी, इन नेताओं से कई राउंड की पूछताछ करने की तैयारी में है। पहले भी पूछताछ की गई है, लेकिन अब गवाहों को सामने बैठाकर उक्त नेताओं से पूछताछ की जाएगी। अगर इनकी सहमति का लिंक जुड़ता है, तो देर सवेर ये नेता जांच एजेंसी की गिरफ्त में आ सकते हैं।

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी को झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन से पूछताछ करनी है। जांच एजेंसी ने उनके दिल्ली एवं रांची स्थित आवास पर दस्तक दी है। हालांकि सोरेन, दोनों ही जगहों पर नहीं मिले हैं। अब बताया जा रहा है कि सोरेन रांची में हैं। उनकी पार्टी के नेताओं का कहना है कि हेमंत सोरेन, ईडी से भाग नहीं रहे हैं। उन्होंने 31 जनवरी को दोपहर एक बजे अपने आवास पर बयान दर्ज कराने की इच्छा जताई थी। सोमवार को ईडी की टीम, उनके दिल्ली स्थित आवास पर पहुंची थी। जांच टीम ने वहां की तलाशी ली। आवास से एक बीएमडब्ल्यू कार जब्त की गई है। भाजपा का कहना है कि सीएम सोरेन, अपनी गिरफ्तारी के डर से फरार हो गए हैं।

झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने नेताओं का कहना है, हेमंत सोरेन को बदनाम करने की साजिश रची गई है। ईडी ने कथित भूमि धोखाधड़ी मामले में 20 जनवरी को हेमंत सोरेन से रांची स्थित उनके आवास पर पूछताछ की थी। इसके बाद उन्हें दोबारा से पूछताछ में शामिल होने के लिए कहा गया। सोरेन ने जांच एजेंसी को पत्र भेजकर कहा था कि वे पूछताछ में शामिल होंगे, लेकिन किस दिन आएंगे, ये नहीं बताया। 29 जनवरी या 31 जनवरी में से किसी एक दिन पूछताछ में शामिल होने की बात सामने कही गई।

रेलवे में नौकरी के बदले जमीन घोटाले की जांच भी ईडी कर रही है। हालांकि इस मामले में सीबीआई ने केस दर्ज किया था। ईडी ने इस केस में सोमवार को करीब नौ घंटे तक लालू यादव से पूछताछ की थी। मंगलवार को उनके बेटे एवं बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव से पूछताछ की जा रही है। ईडी की जांच में सामने आया है कि लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की गायों की देखभाल करने वाले एक कर्मचारी, नाजायज जमीन लेकर अमीर बन गया। पूर्व कर्मचारी ने रेलवे में नौकरी के इच्छुक एक व्यक्ति से संपत्ति हासिल की थी। ईडी का आरोप है कि बाद में उस संपत्ति को बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री की बेटी हेमा यादव को हस्तांतरित किया गया। दिल्ली की अदालत के समक्ष दायर किए गए आरोपपत्र में लालू प्रसाद यादव के परिवार के कई सदस्यों को आरोपी बनाया गया था। इस मामले में लालू परिवार के कथित सहयोगी अमित कत्याल, घोटाले के कथित लाभार्थी और पूर्व गौशाला कर्मचारी हृदयानंद चौधरी और दो कंपनी एके इन्फोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड और एबी एक्सपोर्ट्स प्रा. लिमिटेड के साझा निदेशक शारीकुल बारी के ज़रिए नामजद किया गया था। शारीकुल बारी, फिलहाल जांच एजेंसी ‘ईडी’ की न्यायिक हिरासत में है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को भी पूछताछ के लिए ईडी चार समन जारी कर चुकी है। अभी तक वे ईडी के समक्ष पेश नहीं हुए हैं। दिल्ली के कथित शराब घोटाले की जांच ईडी कर रही है। दिल्ली में नई शराब नीति 2021-22 में लागू हुई थी। आरोप है कि नई शराब नीति में डीलर्स को फायदा पहुंचाया गया है। इसे लेकर दिल्ली के उपराज्यपाल ने भी मुख्य सचिव से रिपोर्ट तलब की थी। करीब 144 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोपों की सीबीआई को सौंपी गई थी। फरवरी 2023 में डिप्टी सीएम व आबकारी मंत्री मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया गया। सीबीआई के बाद ईडी ने भी अगस्त 2022 में मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर लिया। जांच के बाद आरोपी विजय नायर की गिरफ्तारी हुई। सीबीआई ने अप्रैल 2023 में सीएम केजरीवाल से भी पूछताछ की थी। इसके बाद अक्तूबर 2023 में राज्यसभा सांसद संजय सिंह की गिरफ्तारी हुई। इस मामले में केजरीवाल को ईडी के समक्ष पेश होने के लिए चार बार समन भेजा गया है।

ईडी सूत्रों का कहना है, देखिये ये तीनों ही मामले कुछ एक जैसे हैं। नौकरी के बदले जमीन घोटाला, दिल्ली का कथित शराब घोटाला या झारखंड का जमीन घोटाला, तीनों मामलों में लालू प्रसाद यादव, केजरीवाल या सोरेन, भले ही प्रत्यक्ष आरोप नहीं हों, लेकिन इनकी सहमति से फाइलें आगे बढ़ी हैं। ईडी के पास मौजूद दस्तावेजों एवं गवाहों के बयानों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि देर सवेर सभी आरोपी गिरफ्तार किए जा सकते हैं। जांच एजेंसी, बिना सबूत के किसी पर हाथ नहीं डालती। जब किसी मामले की कड़ियां, आरोपी से जुड़ती हैं, तो ही ईडी उससे पूछताछ करती है। अगर कुछ बरामद करना होता है, तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाता है। ईडी के पास आरोपियों के खिलाफ उक्त तीनों ही मामलों में पुख्ता सबूत हैं। इन लोगों की सहमति से परिवार के सदस्यों या किसी अधिकारी ने कोई अपराध किया है, तो इनका फंसना तय है। समन भेजना एक प्रक्रिया है। इसकी एक सीमा भी है। अगर कोई व्यक्ति पूछताछ में शामिल नहीं होता है तो उसे गिरफ्तार किया जा सकता है। किसी भी आरोपी ने जांच एजेंसी को दिए अपने बयान में अगर मुख्यमंत्री, डिप्टी सीएम या किसी दूसरे नेता का नाम लिया है, तो उसके बाद जांच एजेंसी उस ‘लिंक’ की सत्यता का पता लगाती है। वह लिंक मुख्यमंत्री या उनके करीबियों के साथ पुख्ता तौर पर जुड़ता हुआ नजर आता है तो वे लोग जोखिम में फंस सकते हैं।

Leave a Reply

Discover more from Apna Bharat Times

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading