रिपोर्टर: मोहम्मद अकरम
हमीरपुर (Hamirpur) के मौदहा कोतवाली क्षेत्र स्थित गुड़ा गांव में एक विवाह समारोह ने पारंपरिक संस्कृति की झलक प्रस्तुत कर सबका ध्यान आकर्षित किया। आधुनिक दौर में जहां शादियों में लग्जरी गाड़ियां और तेज ध्वनि वाले डीजे का प्रचलन बढ़ गया है, वहीं मोहित द्विवेदी ने अपनी बारात 25 सजी-धजी बैलगाड़ियों के साथ निकालकर बुंदेलखंड की पुरानी परंपरा को जीवंत कर दिया। यह अनोखी पहल पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई।

परंपरा और संस्कृति की अनूठी मिसाल:
ढोल-नगाड़ों की पारंपरिक धुन पर निकली यह बारात ग्रामीण परिवेश की सादगी और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक बन गई। रंग-बिरंगी झालरों, फूलों और आकर्षक कपड़ों से सजी बैलगाड़ियों में लगभग 200 बाराती सवार थे। पूरे रास्ते यह दृश्य लोगों के लिए कौतूहल का केंद्र बना रहा। गांव और आसपास के क्षेत्रों से लोग इस अनोखी बारात को देखने के लिए सड़क किनारे एकत्र होते रहे।
ग्रामीण परिवेश में दिखी आत्मीयता:
गुड़ा गांव में जब बारात पहुंची तो वधु पक्ष ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भव्य और आत्मीय स्वागत किया। ग्रामीण माहौल में सादगी और परंपरा का सुंदर संगम देखने को मिला। विवाह समारोह में पारंपरिक रस्मों का पालन करते हुए मोहित द्विवेदी ने मोहिनी के साथ सात फेरे लिए और वैवाहिक जीवन की शुरुआत की।
स्थानीय लोगों में उत्साह का माहौल:
इस अनोखी बारात ने क्षेत्र के लोगों को पुराने समय की याद दिला दी। जहां आजकल आधुनिकता का प्रभाव अधिक दिखाई देता है, वहीं इस पहल ने पारंपरिक मूल्यों और सांस्कृतिक धरोहर के महत्व को रेखांकित किया। ग्रामीणों ने इसे बुंदेलखंड की परंपरा को पुनर्जीवित करने वाला कदम बताया।
परंपरा के प्रति सकारात्मक संदेश:
यह विवाह समारोह इस बात का उदाहरण बना कि आधुनिकता के बीच भी पारंपरिक रीति-रिवाजों को सम्मानपूर्वक अपनाया जा सकता है। बैलगाड़ियों से निकली बारात ने सामाजिक स्तर पर एक सकारात्मक संदेश दिया कि सादगी और संस्कृति भी आकर्षण का केंद्र बन सकती है।
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