रिपोर्टर : हसीन अंसारी
गुरु नानक जयंती के पावन अवसर पर गाजीपुर (Ghazipur) में सिख समुदाय के लोगों में आस्था और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। शहर के विभिन्न गुरुद्वारों में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भक्तों ने पूरे श्रद्धाभाव के साथ गुरुद्वारों में पहुंचकर मत्था टेका और गुरु नानक देव जी के उपदेशों को नमन किया। पूरे क्षेत्र में भक्ति और समर्पण का वातावरण देखने को मिला।
गुरुद्वारों में हुआ शबद कीर्तन और अरदास:
गुरु नानक जयंती के अवसर पर गाजीपुर के प्रमुख गुरुद्वारों में शबद कीर्तन, अरदास और गुरुवाणी के पाठ का आयोजन किया गया। सवेरे से ही गुरुद्वारे के प्रांगण में संगत एकत्रित हुई और भक्ति में लीन होकर गुरुवाणी का रसपान किया। वातावरण में भक्ति संगीत और शांति का भाव व्याप्त रहा।
लंगर में शामिल हुए सैकड़ों श्रद्धालु:
गुरुद्वारों में शबद कीर्तन के पश्चात विशाल लंगर (Langar) का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। सेवा भाव से भरे संगत के लोगों ने स्वयंसेवकों के साथ मिलकर प्रसाद वितरण किया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी ने एक साथ बैठकर प्रेम और समानता का संदेश देने वाले लंगर का आनंद लिया।
गुरुवाणी से गूंजे गुरुद्वारे:
दिनभर गुरुद्वारों में गुरुवाणी और शबद गूंजते रहे। लोगों ने श्रद्धा के साथ गुरु नानक देव जी के संदेश — “न कोई हिन्दू, न कोई मुसलमान” — को याद करते हुए समाज में भाईचारे और एकता का संकल्प लिया। गुरुद्वारों में सजावट और प्रकाश की झिलमिलाहट से पूरा माहौल उत्सवमय रहा।
शहर में दिखा सामूहिक उत्साह:
गाजीपुर (Ghazipur) शहर के विभिन्न इलाकों में भी सिख समुदाय के लोगों ने घरों और दुकानों पर रोशनी की सजावट की। बच्चों और युवाओं ने जुलूस में भाग लेकर गुरु नानक देव जी के जीवन संदेशों का प्रचार किया। हर ओर गुरु के प्रति भक्ति और कृतज्ञता का भाव स्पष्ट झलकता रहा।
समरसता और सेवा का संदेश:
गुरु नानक जयंती के इस अवसर पर लोगों ने समाज में समानता, सेवा और प्रेम का संदेश फैलाने का संकल्प लिया। श्रद्धालुओं ने कहा कि गुरु नानक देव जी के उपदेश आज भी मानवता के लिए प्रेरणास्रोत हैं और उनका अनुसरण ही सच्ची श्रद्धांजलि है।
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