कठिन होती गुजरात की राह…

गुजरात विधानसभा चुनाव की तारीखों का इंतजार अब खत्म हो गया है। चुनाव आयोग ने गुरुवार को गुजरात की चुनावी तारीखों का ऐलान कर दिया है। पहले राउंड का मतदान 1 दिसंबर को होगा और दूसरे चरण की वोटिंग 5 दिसंबर को होगी। इसके बाद 8 दिसंबर को चुनाव का नतीजा आएगा। इसी दिन हिमाचल प्रदेश के चुनावी नतीजों का भी ऐलान होना है, जहां 12 नवंबर को एक ही राउंड में वोटिंग होने वाली है।

गुजरात विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए बेहद अहम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह प्रदेश में पार्टी का लगातार छह चुनाव जीतने और बीते 27 साल से सत्ता में बने रहने का रिकार्ड है। जाहिर तौर पर पार्टी इस सिलसिले को कायम रखना चाहेगी। हालांकि चुनाव दर चुनाव कम होती सीटों की संख्या और राज्य में कमजोर नेतृत्व जहां भाजपा की मुख्य चिंता हैं, वहीं पीएम का चेहरा, बिखरा विपक्ष और त्रिकोणात्मक मुकाबले की संभावना उसकी ताकत है।

साल 2014 में पीएम मोदी के गुजरात छोड़ने के आठ साल बाद भी पार्टी राज्य में मजबूत नेतृत्व तैयार नहीं कर पाई है। मजबूत नेतृत्व की तलाश में पार्टी को छह सालों में राज्य को तीसरा मुख्यमंत्री देना पड़ा है। जमीनी हकीकत यह है कि इतने लंबे अरसे के बाद पीएम मोदी ही राज्य में पार्टी का एकमात्र चेहरा हैं। चुनाव जिताने की सारी जिम्मेदारी पीएम मोदी के ही कंधे पर होती है।

राज्य में पार्टी साल 1995 से लगातार सत्ता में है। गोधरा कांड के साये में हुए साल 2002 के चुनाव को अपवाद माने तो इस दौरान हुए छह चुनाव में से पांच चुनावों में पार्टी की सीटें घटी हैं। साल 1995 में पहली बार अपने दम पर सत्ता में आई पार्टी को 121 सीटें मिली थी। इसके बाद साल 1998, 2007, 2012 और 2017 में पार्टी की सीटें कम होती चली गई। बीते विधानसभा चुनाव में तो पार्टी पहली बार सौ सीटों का आंकड़ा भी नहीं छू पाई।

बीते चुनाव में हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकुर और जिग्नेेश मेवाणी की तिकड़ी ने भाजपा को बैकफुट पर ला दिया था। हालांकि भाजपा इस तिकड़ी को तोड़ने में कामयाब रही। चुनाव के बाद कांग्रेस में शामिल होने वाले हार्दिक, अल्पेश भाजपा में आ गए। दशकों बाद यह पहला मौका है जब कांग्रेस अपने सबसे बड़े रणनीतिकार अहमद पटेल की अनुपस्थिति में चुनाव मैदान में उतर रही है।

2017 के चुनाव में भाजपा ने 49.05% वोटों के साथ 99 जबकि कांग्रेस को 42.97% वोटों के साथ 77 सीटें मिली थीं। बाद में दलबदल के कारण कांग्रेस की सीटें घटकर 62 रह गईं जबकि भाजपा की बढ़कर 111 हो गईं। भाजपा राज्य में लगातार 6 बार विधानसभा चुनाव जीत चुकी है।

इधर आम आदमी पार्टी भी मजबूती से चुनावी मैदान में है. लेकिन आबकारी नियमों के उलंघन में लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से आम आदमी पार्टी की छवि को धूमिल जरुर किया है.

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