Prayagraj। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार 20 अगस्त 2025 को पूर्व विधायक अब्बास अंसारी की याचिका पर अहम फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति समीर जैन की अदालत ने अब्बास अंसारी की याचिका को स्वीकार करते हुए उनकी विधायकी बहाल कर दी।
अब्बास अंसारी की विधायकी पहले निरस्त कर दी गई थी, जिसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इस मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने आज अपना निर्णय सुरक्षित रखा और फिर फैसला सुनाते हुए उनके पक्ष में आदेश दिया। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब्बास अंसारी को बड़ी राहत मिली है।
आइए समझते हैं पूरे घटनाक्रम को:
1. ५ जुलाई २०२५ — निचली अदालत का फैसला और विधायकी रद्द। ३१ मई २०२५ को मऊ की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) कोर्ट ने अब्बास अंसारी को २०२२ के विधानसभा चुनाव के दौरान दिए गए भड़काऊ भाषण (हेट स्पीच) के मामले में दोषी ठहराते हुए दो साल की सजा और ₹३,००० जुर्माना की सजा सुनाई। इस सजा के परिणामस्वरूप उनकी विधायकी रद्द कर दी गई और मऊ सदर सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया। मऊ सेशन कोर्ट में उनकी अपील (अंतरिम राहत सहित) खारिज कर दी गई, यानी सजा बरकरार रही।
2. इससे पहले वकील दरोगा सिंह ने दावा किया कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, धारा 8(4) के अंतर्गत, यदि सजायाफ्ता विधायक ने अपील दर्ज कर दी हो और सजा तीन वर्ष से कम हो, तो अपील लंबित रहने तक उनकी सदस्यता बरकरार रह सकती है।
3. ३० जुलाई २०२५ — हाईकोर्ट में बहस
इलाहाबाद हाईकोर्ट (जस्टिस समीर जैन की बेंच) में बहस पूरी हुई, और फैसला रिजर्व (परमार्शित) रखा गया।
4. २० अगस्त २०२५ — हाईकोर्ट ने सजा पर रोक लगाई
इसी दिन, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई दो साल की सजा पर रोक (स्टे) लगा दी है। इस फैसले का मतलब है कि फिलहाल अब्बास अंसारी की विधायक सदस्यता बहाल हो सकती है और मऊ सदर विधानसभा सीट पर उपचुनाव नहीं होना पड़ेगा, जब तक यह रोक बनी रहती है।