सफ़ल होता संघर्ष, गाज़ीपुर विश्वविद्यालय की मांग को मिला बल

आलीशान भवन, आधुनिक कक्षाएं, छात्रावास, खेल का मैदान, हर विषयों की पढ़ाई, सैकड़ों की संख्या में संबद्ध कॉलेज। कुछ ऐसे ही परिकल्पना करता है स्नातक में प्रवेश लेने वाला छात्र। अपना जनपद है अपने जनपद में विश्वविद्यालय हो और अपने जनपद के तमाम कॉलेज उस विश्वविद्यालय से जुड़े हो ताकि किसी छात्र को किसी तरह की समस्याओं के समाधान के लिए गैर जनपद का सफर ना करना पड़े। हर एक छात्र का यही सपना होता है और जनपद गाजीपुर का प्रत्येक छात्र शिक्षा के इस समुंदर को “गाजीपुर विश्वविद्यालय” का नाम देना चाहता है।

लेकिन क्या जिस तरह से सपने की परिकल्पना एक छात्र करता है जमीनी स्तर पर वैसा होना संभव है। इसके लिए संघर्ष की जरूरत होती है, जरूरत होती है दूरदर्शी मानसिकता की, जरूरत होती है अपने जनपद के तमाम शिक्षण संस्थानों के सहयोग की, जरूरत होती है जनमानस के सहयोग की, जरूरत होती है जनप्रतिनिधि के साफ नियत की।

जब भी विकास की कोई नई इमारत खड़ी होती है तो उस इमारत की परिकल्पना करने वाला उस इमारत को बनवाने में संघर्ष करने वाला एक नेता भी पैदा होता है, एक ऐसा नेता जो सब कुछ त्याग कर केवल एक और केवल एक लक्ष्य निर्धारित करता है और जब उसकी परिकल्पना को जन सहयोग मिलता है तो वह परिकल्पना साक्षात रूप ले विकास की नई परिभाषा से समाज की तस्वीर बदल देती है। संघर्षों से ही समाज के विकास का नया रास्ता खुलता है और अब ऐसा प्रतीत होता है कि समाज के विकास के लिए अब जनपद गाजीपुर में विश्वविद्यालय की परिकल्पना भी जल्द ही साक्षात रूप लेगी।

पिछले कई वर्षों से गाजीपुर में विश्वविद्यालय की मांग उठ रही है और गाजीपुर के पीजी कॉलेज के पूर्व छात्र संघ उपाध्यक्ष दीपक उपाध्याय का संघर्ष जनमानस को नई उम्मीदें दिखा रहा है। दीपक उपाध्याय और उनके सहयोगियों ने कई वर्षों से विश्वविद्यालय की मांग को लेकर आंदोलन किया है साथ ही शासन प्रशासन जनप्रतिनिधि मुख्यमंत्री राज्यपाल तक को पत्र लिखा है। दीपक उपाध्याय और उनके सहयोगियों ने कई बार गाजीपुर सदर से भाजपा विधायक डॉक्टर संगीता बलवंत को पत्र लिखा और विश्वविद्यालय की मांग की। संगीता बलवंत ने भी उनकी बातों को नजरअंदाज नहीं किया उन्होंने विश्वविद्यालय की मांग को सदन में उठाया था। लेकिन काफी वक्त बीत जाने के बाद भी विश्वविद्यालय को लेकर किसी भी तरह की जब चर्चा होती हुई नहीं दिखाई दी तो फिर दीपक उपाध्याय और उनके सहयोगियों ने संघर्ष करना शुरू कर दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने की कई कोशिशें की लेकिन उनकी कोशिशें नाकाम रही। उन्होंने गाजीपुर सदर विधायक डॉ संगीता बलवंत को और एमएलसी विशाल सिंह चंचल को पत्र भी लिखा और कहा कि विश्वविद्यालय की मांग को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने रखें।

पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जनपद गाजीपुर के सैदपुर में आए थे तब भी दीपक उपाध्याय और उनके सहयोगियों ने विश्वविद्यालय की मांग के लिए अपनी आवाज बुलंद की। छात्रों के संघर्ष को देखते हुए डॉ संगीता बलवंत ने भी अपनी जिम्मेदारी निभाई उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम विश्वविद्यालय की मांग को लेकर पुनः पत्र लिखा। चूंकि दीपक उपाध्याय और उनके सहयोगियों ने अपना मन बना लिया था कि वह मुख्यमंत्री के जनता दरबार में जाएंगे और विश्वविद्यालय की मांग को उनके सामने रखेंगे। इसी योजना के अंतर्गत रविवार 10 अक्टूबर 2021 को दीपक उपाध्याय लखनऊ में मुख्यमंत्री के जनता दरबार में पहुंचते हैं। जनता दरबार में दीपक उपाध्याय ने विश्वविद्यालय की मांग को रखा और कहा कि जनपद गाजीपुर के छात्र हित के लिए विश्वविद्यालय की स्थापना महत्वपूर्ण है। दीपक उपाध्याय को आश्वासन दिया गया कि आपकी मांग अच्छी है और इसे ध्यान में रखा जाएगा। ये संघर्ष यहीं नहीं खत्म हुआ बीते रविवार को दीपक उपाध्याय लखनऊ स्थित राजभवन में भी जाते हैं वहां उन्होंने विश्वविद्यालय की मांग को रखा उनकी बातों को प्राथमिकता देते हुए सुना गया और आश्वासन दिया गया कि छात्र संघ प्रतिनिधि मंडल से विचार उपरांत राज्यपाल मुलाकात करेंगी।

अपने जनपद में विश्वविद्यालय की स्थापना को लेकर किसी छात्र का ऐसा संघर्ष शायद ही देखने को मिलता है ऐसे छात्र हमें उन क्रांतिकारियों की याद दिला देते हैं जिनके संघर्षों से हमारे देश को आजादी मिली। लेकिन बदलते समय के साथ आजाद भारत में राजनीति में सक्रिय हो गई ऐसे में इन छात्रों का संघर्ष और कठिन हो जाता है। उम्मीद है जिस तरह से इन छात्रों के संघर्ष को ध्यान में रखते हुए सदर विधायक और राज्य मंत्री डॉक्टर संगीता बलवंत ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है तो विश्वविद्यालय की स्थापना का रोडमैप भी जल्दी तैयार होगा।

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