गाजीपुर जनपद में मिशन शक्ति फेज-05 और ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। महिलाओं और बालिकाओं के खिलाफ अपराधों पर शून्य सहनशीलता की नीति को लागू करते हुए एक अबोध बालिका के साथ हुए दुराचार के मामले में पुलिस ने मात्र 15 दिनों के भीतर कठोरतम सजा दिलाई। विशेष न्यायिक पॉक्सो कोर्ट ने दोषी सौतेले पिता को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
मिशन शक्ति और ऑपरेशन कन्विक्शन की सख्ती
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से मिशन शक्ति अभियान के पांचवें चरण में महिलाओं और बालिकाओं के साथ अपराधों पर सख्ती से कार्रवाई का आदेश दिया गया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ निर्देश दिए थे कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा ने भी इन अपराधों की लगातार मॉनिटरिंग करते हुए अधिकारियों को आदेश दिया कि दोषियों को न्यूनतम समय में कड़ी सजा दिलाई जाए।
गाजीपुर प्रकरण का संक्षिप्त विवरण
20 जुलाई 2025 को थाना शादियाबाद क्षेत्र में एक मासूम बालिका के साथ उसके ही सौतेले पिता ने दुष्कर्म जैसा जघन्य अपराध किया। पीड़िता की मां की तहरीर पर थाना शादियाबाद में मुकदमा अपराध संख्या-243/2025 धारा 65(2) BNS और पॉक्सो एक्ट की धाराओं में दर्ज हुआ। विवेचना की जिम्मेदारी थाना प्रभारी शादियाबाद श्यामजी यादव को दी गई, जिन्होंने ठोस मौखिक और फोरेंसिक साक्ष्य जुटाकर आरोप पत्र दाखिल किया।
15 दिनों में सजा, तारीख दर तारीख
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने प्रतिदिन सुनवाई की और मात्र 15 दिनों में निर्णय सुना दिया।
- एफआईआर दर्ज: 20 जुलाई 2025
- गिरफ्तारी: 21 जुलाई 2025
- आरोप पत्र दाखिल: 27 अगस्त 2025
- न्यायालय द्वारा स्वीकार: 9 सितंबर 2025
- आरोप निर्धारण: 12 सितंबर 2025
- निर्णय: 26 सितंबर 2025
कठोरतम दंड
दोषी अशोक बनवासी, पुत्र स्वर्गीय लालता बनवासी, निवासी सराय गोकुल, थाना शादियाबाद को विशेष न्यायिक पॉक्सो कोर्ट ने आजीवन कारावास (प्राकृतिक जीवनकाल तक) और 1 लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
पुलिस और अभियोजन की टीम का योगदान
इस मुकदमे में पुलिस और अभियोजन पक्ष की तत्परता अहम रही।
- पैरोकार: हेड कांस्टेबल दशरथ लाल बिन्द
- मॉनिटरिंग सेल: उपनिरीक्षक जमुना प्रसाद व टीम
- कोर्ट मोहर्रिर: हेड कांस्टेबल राम प्रताप मिश्रा
- अभियोजन अधिकारी: प्रभु नारायण सिंह (ADGC)
- विवेचक: निरीक्षक श्यामजी यादव
अपर पुलिस अधीक्षक नगर और क्षेत्राधिकारी भुड़कुड़ा के पर्यवेक्षण में मुकदमे की सुनवाई तेज गति से पूरी कराई गई।
टीम को मिला सम्मान
पुलिस महानिदेशक ने इस उल्लेखनीय सफलता पर टीम की प्रशंसा की है और पुलिस व अभियोजन पक्ष को 25 हजार रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की है।

