Ghazipur: महिला एवं बाल विकास विभाग ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना के तहत महिला चिकित्सालय में एक अनोखे कन्या जन्मोत्सव का आयोजन किया, जिसमें 28 नवजात बच्चियों का जन्मदिन मनाया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गिरते लिंगानुपात को रोकना, लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देना और समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना था।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सीएमएस के.एन. चौधरी ने पीसी पीएनडीटी एक्ट के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि गर्भावस्था के दौरान भ्रूण का लिंग बताना या लिंग के आधार पर गर्भपात कराना कानूनी रूप से पूरी तरह प्रतिबंधित है।
इस अवसर पर, महिला कल्याण विभाग ने 28 नवजात कन्याओं के परिवार को केक, कार्ड और बेबी किट उपहार में देकर सम्मानित किया। इन उपहारों में तौलिया, हिमालया बेबी किट और मिठाई शामिल थी। यह पहल समाज को यह संदेश देने के लिए की गई थी कि बेटियों का जन्म भी बेटों की तरह ही खुशी का अवसर है।
योजनाओं की दी गई जानकारी
कार्यक्रम का संचालन कर रहीं नेहा राय ने उपस्थित महिलाओं को सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, जननी सुरक्षा योजना, और पोषण अभियान जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं पर प्रकाश डाला। इसके अलावा, उन्होंने महिलाओं और बच्चों की मदद के लिए उपलब्ध हेल्पलाइन नंबरों जैसे चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और महिला हेल्पलाइन 181 के बारे में भी बताया।
विद्या श्रीवास्तव ने समाज में बेटियों के महत्व पर बात करते हुए कहा कि बेटियाँ हमारे भविष्य की नींव हैं। इस तरह के कार्यक्रम समाज में जागरूकता फैलाने और लोगों की सोच में बदलाव लाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।
इस आयोजन में वरिष्ठ सहायक विद्या श्रीवास्तव, असिस्टेंट अकाउंटेंट मयंक यादव, अजीत कुमार, ममता सिंह और महिला चिकित्सालय के अन्य स्टाफ सदस्य भी मौजूद रहे। कार्यक्रम का समापन इस सशक्त संदेश के साथ हुआ: “बेटी है तो भविष्य है, उसका सम्मान और सुरक्षा हम सबकी जिम्मेदारी है।” इस पहल से यह उम्मीद की जा रही है कि समाज में बेटियों के प्रति सम्मान और प्यार बढ़ेगा और लिंगानुपात में सुधार होगा।
नवजात कन्याओं का जन्मोत्सव, ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का संदेश