गाजीपुर: गोरा राय की धमकी से दहशत, फिर चर्चाओं में आया मुख्तार अंसारी का नाम!



गाजीपुर: पूर्वांचल के दबंग कहे जाने वाले और मऊ सदर से कई बार विधायक रहे मुख़्तार अंसारी की जेल में हुई मौत को भले ही कानून-व्यवस्था की बड़ी कामयाबी बताया गया हो, लेकिन मुख्तार अंसारी के नाम का इस्तेमाल होना अब भी थमा नहीं है। मुख़्तार अंसारी के करीबी गुर्गे माने जाने वाले उमेश राय उर्फ गोरा राय ने 24 अगस्त 2025 को गाजीपुर में दिनदहाड़े रंगदारी की वारदात को अंजाम देकर यह साफ कर दिया कि पूर्वांचल में माफिया राज की परछाइयाँ कायम करने की कोशिश की जा रही हैं।

करिमुद्दिनपुर थाने से महज एक किलोमीटर दूर लट्ठडीह बाजार में गोरा राय और उसके साथियों ने सीसीटीवी कैमरों के सामने ही एक व्यक्ति को रंगदारी न देने पर अपहरण और हत्या की धमकी दी। इस घटना ने इलाके में सनसनी फैला दी। स्थानीय लोग कह रहे हैं कि यह वारदात बताती है कि “माफिया का नाम बदल सकता है, लेकिन उसका खौफ अभी भी बरकरार है।”

मुकदमा दर्ज, कार्रवाई के दावे

पीड़ित पक्ष ने 26 अगस्त को ग्रामीण पुलिस अधीक्षक अतुल कुमार सोनकर से शिकायत की। उसी शाम 6:30 बजे पुलिस ने गोरा राय समेत रविकांत मिश्रा, प्रताप नारायण मिश्रा, दुर्गेश राय उर्फ विक्की और पांच अज्ञात बदमाशों के खिलाफ संगठित अपराध, हत्या की कोशिश, अपहरण और रंगदारी की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया।

हालांकि, तीन दिन बीत जाने के बाद भी कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। पुलिस ने दबिश और छापेमारी की बात कही है, लेकिन अपराधी अब भी खुलेआम घूम रहे हैं। यही वजह है कि पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थानीयों में डर, पुलिस पर अविश्वास

लट्ठडीह बाजार में घटनाक्रम के बाद से दुकानें बंद पड़ी हैं। लोग अपने घरों में कैद हैं। एक ग्रामीण ने कहा – “गोरा राय का नाम सुनते ही रूह कांप जाती है। पुलिस सुरक्षा का भरोसा नहीं दिला पा रही।”

पुलिस की नाकामी से जनता में गुस्सा भी बढ़ा है। सोशल मीडिया पर कई लोग लिख रहे हैं कि सीसीटीवी फुटेज मौजूद होने के बावजूद आरोपी फरार हैं, जो बताता है कि माफिया अब भी पुलिस से बड़ा है।

गोरा राय का काला रिकॉर्ड

गोरा राय, मोहम्मदाबाद के तमालपुरा गांव का रहने वाला है और मुख़्तार अंसारी गैंग के सक्रिय गुर्गों में गिना जाता है।
2004 में हत्या, हत्या के प्रयास और एससी/एसटी एक्ट में दर्जनभर मामलों में नामजद हुआ था।
2023 में पुलिस ने उसके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट लगाकर 4.6 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति जब्त की।
उसका नाम कई रंगदारी, अपहरण और हत्याओं में भी जुड़ता रहा है।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इतना लंबा आपराधिक इतिहास रखने वाला अपराधी आखिर अभी भी जेल से बाहर कैसे है और दिनदहाड़े धमकियां कैसे दे रहा है।

मुख़्तार अंसारी का नाम और उसका इस्तेमाल

मुख़्तार अंसारी, जिनकी जेल में 2024 में मौत हुई, पूर्वांचल की सियासत और अपराध जगत में दशकों तक बड़ा नाम रहे। वे मऊ सदर से कई बार विधायक चुने गए। अपने दबंग अंदाज़ और रसूख के चलते उनका नाम अक्सर डराने-धमकाने और दबाव बनाने में इस्तेमाल किया जाता रहा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मुख़्तार के जिंदा रहते भी कई बार अपराधी उनके नाम का सहारा लेकर वसूली और धमकी का खेल खेलते थे। अब उनकी मौत के बाद भी यही कोशिशें हो रही हैं। गोरा राय जैसे अपराधी खुद को मुख़्तार का गुर्गा बताकर लोगों में खौफ पैदा कर रहे हैं, ताकि रंगदारी और आपराधिक गतिविधियों को आगे बढ़ाया जा सके।

पुलिस पर दबाव और जनता में सवाल

पुलिस अधीक्षक अतुल कुमार सोनकर का कहना है – “विशेष टीमें गठित की गई हैं। अपराधियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। जनता को घबराने की जरूरत नहीं है।” लेकिन जनता का भरोसा पुलिस पर कमजोर होता जा रहा है। लोग कह रहे हैं कि अगर मुख़्तार अंसारी की मौत के बाद भी उनके नाम पर अपराधियों का खौफ कायम है, तो यह पुलिस और प्रशासन दोनों के लिए गंभीर सवाल है।

इंसाफ की जंग

पीड़ित परिवार न्याय की आस लगाए बैठा है। वहीं आम जनता चाहती है कि इस बार पुलिस सख्त कदम उठाए और गोरा राय जैसे बदमाशों को जल्द जेल भेजा जाए। क्योंकि यह मामला सिर्फ एक रंगदारी या धमकी का नहीं है, बल्कि पूर्वांचल में “मुख़्तार अंसारी के नाम” के गलत इस्तेमाल से पैदा हो रहे खौफ को खत्म करने की चुनौती भी है।

कुल मिलाकर, गाजीपुर की यह घटना बताती है कि मुख़्तार अंसारी की मौत के बावजूद उनका नाम अपराधियों के लिए ढाल बना हुआ है। सवाल यही है कि क्या पुलिस इस ढाल को तोड़ पाएगी या फिर जनता को उसी पुराने खौफ में जीना होगा।

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