रिपोर्ट: हसीन अंसारी
Ghazipur: महर्षि विश्वामित्र अर्द्धशासकीय मेडिकल कॉलेज एक नए विवाद में उलझ गया है। जिले के प्रख्यात समाजसेवी कुंवर वीरेंद्र सिंह ने आरोप लगाया है कि कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आनंद मिश्रा ने उनके जिला अस्पताल में प्रवेश पर रोक लगा दी है। इस निर्णय से नाराज होकर शुक्रवार को कुंवर वीरेंद्र सिंह के नेतृत्व में सैकड़ों लोग जिला मुख्यालय पहुंचे और जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी को पत्रक सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की।
कुंवर वीरेंद्र सिंह लंबे समय से गाजीपुर जिले में सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे हैं। वे लावारिस शवों का पोस्टमार्टम कराने और उनका धार्मिक रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार कराने के अलावा गरीब और असहाय मरीजों की मदद करते हैं। साथ ही रक्तदान शिविरों के आयोजन और मरीजों को रक्त उपलब्ध कराने में भी अग्रणी भूमिका निभाते आए हैं। उनकी इन सेवाओं को देखते हुए उन्हें मुख्यमंत्री समेत कई बड़े नेताओं द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्राचार्य के इस निर्णय से न केवल समाजसेवियों में आक्रोश है बल्कि मेडिकल कॉलेज के कर्मचारी और छात्र-छात्राएं भी नाराज हैं। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यदि आदेश वापस नहीं लिया गया तो वे बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। प्रदर्शनकारियों ने यह भी चेतावनी दी कि इसके परिणामस्वरूप उत्पन्न होने वाली स्थिति की जिम्मेदारी कॉलेज प्रशासन और जिला प्रशासन की होगी।
गौरतलब है कि गुरुवार को ही कुंवर वीरेंद्र सिंह ने रक्तदान किया था। शुक्रवार को पत्रक सौंपने के दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और वे बेहोश हो गए। उन्हें तत्काल एंबुलेंस से जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। इस घटना के बाद समर्थकों में और आक्रोश बढ़ गया।
प्रदर्शन में समाजसेवियों के साथ कई स्थानीय नेता और छात्र संगठन भी शामिल हुए। प्रमुख रूप से विवेक कुमार सिंह शम्मी, संजय सिंह, निर्भय नारायण सिंह, विनीत दुबे, बॉबी सिंह, शैलेंद्र सिंह, नवीन सिंह, पंकज राय, छात्र नेता दीपक उपाध्याय, सुधांशु तिवारी और रजनीश मिश्रा सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
वहीं, विवाद पर अपनी सफाई देते हुए मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आनंद मिश्रा ने कहा कि शासनादेश के तहत अस्पताल परिसर में अनाधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक लगाने की कार्यवाही की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी विशेष व्यक्ति को निशाना बनाकर प्रवेश पर रोक नहीं लगाई गई है।
फिलहाल, यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। समाजसेवी वर्ग इसे सेवा कार्यों में बाधा बताकर विरोध जता रहा है, जबकि कॉलेज प्रशासन इसे नियम-पालन की कवायद बता रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस विवाद को कैसे सुलझाता है।
