गाजीपुर (Ghazipur) जिले के Jahkania Tehsil (जखनियां तहसील) के जौहरपुर गांव में मंगलवार की सुबह अफरा-तफरी मच गई, जब सियारों के झुंड ने ग्रामीणों पर अचानक हमला कर दिया। इस हमले में 5 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनमें बुजुर्ग, महिलाएं और युवा शामिल हैं।
घटना का विवरण:
घटना उस समय हुई जब कुछ ग्रामीण गांव के बाहर शौच के लिए गए थे। अचानक झाड़ियों से सियारों का झुंड निकला और उन पर टूट पड़ा। हमले में रामफल राम (75), पिंटू राम (24), सोनू राम (42), मुराही देवी (55) और सरिता देवी (40) जख्मी हुए। रामफल राम बुजुर्ग होने के कारण भाग नहीं पाए और सियारों ने उन्हें बुरी तरह घायल कर दिया। शोर मचाने पर सियार वहां से भाग गए, लेकिन गांव के दूसरे छोर पर फिर से हमला किया।
घायलों का इलाज:
घायलों को तुरंत Jahkania Primary Health Center (जखनियां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने सभी को Varanasi (वाराणसी) रेफर कर दिया। घायलों में से सरिता देवी ने रोते हुए कहा कि प्रशासन को पहले भी घटना की सूचना दी गई थी, लेकिन कोई मदद नहीं आई। उनके अनुसार न तो आर्थिक मदद मिली और न ही पर्याप्त साधन उपलब्ध कराए गए।
ग्रामीणों की चिंता और मांग:
ग्रामीणों का कहना है कि सियार और लोमड़ियों का खतरा पहले भी रहता आया है। वन विभाग और प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इस घटना के बाद ग्रामीण खुले में शौच जैसी गतिविधियों में डर महसूस कर रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि घायलों के इलाज का खर्च सरकार उठाए और गांव में सुरक्षा बढ़ाई जाए।
वन्यजीवों के खतरे पर चिंता:
जौहरपुर गांव में सियारों और लोमड़ियों का आतंक आम बात हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि वन्यजीवों के लगातार आक्रमण से लोग घरों के आसपास भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। प्रशासन की ओर से पर्याप्त सुरक्षा उपाय न होने के कारण इलाके के लोग चिंतित हैं।
आर्थिक और सामाजिक असर:
इस घटना ने ग्रामीणों में डर और असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। बुजुर्ग और महिलाएं विशेष रूप से बाहर निकलने में भय महसूस कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर सुरक्षा उपाय और मेडिकल मदद तुरंत उपलब्ध नहीं कराई गई तो उनका जीवन और दैनिक गतिविधियां प्रभावित होंगी।
सरकार और प्रशासन से अपील:
घटना के बाद ग्रामीणों ने जोर देकर कहा कि प्रशासन को वन्यजीवों के खतरे से निपटने के लिए उचित कदम उठाने होंगे। साथ ही घायलों को पूर्ण मेडिकल सहायता और आर्थिक मदद उपलब्ध कराई जानी चाहिए। ग्रामीणों का मानना है कि इससे न केवल उनकी सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि भविष्य में ऐसे हमलों की संभावना भी कम होगी।
इस घटना ने गाजीपुर के ग्रामीण इलाकों में वन्यजीवों और इंसानों के बीच बढ़ते संघर्ष की तरफ ध्यान आकर्षित किया है। ग्रामीण चाहते हैं कि सुरक्षा और मेडिकल इंतजाम तुरंत सुनिश्चित किए जाएं ताकि उनका जीवन सुरक्षित और भयमुक्त हो सके।
गाजीपुर में सियारों का आतंक, 5 घायल