गाजीपुर में साहित्य महोत्सव का…

रिपोर्टर : हसीन अंसारी

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा (Manoj Sinha) ने गाजीपुर (Ghazipur) में आयोजित दो दिवसीय साहित्य महोत्सव का उद्घाटन किया। यह आयोजन 8 और 9 नवम्बर को शहर के एक प्रमुख होटल और रामलीला सभागार में किया जा रहा है। कार्यक्रम में विभिन्न देशों के साहित्यकर्मी, शिक्षाविद और पत्रकार शामिल हैं। महोत्सव का उद्देश्य साहित्य, संस्कृति और लोककला को प्रोत्साहित करना है।

अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक सहभागिता:
फेस्टिवल में अंतरराष्ट्रीय स्तर के साहित्यकर्मी और विद्वान अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न संगोष्ठियों, विचार गोष्ठियों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन किया जा रहा है। उपस्थित प्रतिभागियों ने भारतीय साहित्य और लोककला की विविधता को सराहा और इसे वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर प्राप्त किया।

लोककला और इतिहास के नामचीन हस्तियों की उपस्थिति:
साहित्य महोत्सव में इतिहासकार, लोककला विशेषज्ञ और साहित्यिक नामचीन हस्तियों ने शिरकत की। गाजीपुर के प्रसिद्ध साहित्यकार राही मासूम रजा, विवेकी राय और कुबेर राय का विशेष उल्लेख करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि साहित्य और संस्कृति समाज को मार्गदर्शन देती हैं और लोगों को उनकी जड़ों से जोड़ती हैं।

उपराज्यपाल का संदेश:
मनोज सिन्हा (Manoj Sinha) ने उपस्थित लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा कि भारत न केवल विश्व की चौथी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति है बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि साहित्य और संस्कृति हमारे जीवन के मूल्यों और परंपराओं को संरक्षित करती हैं और समाज में सकारात्मक दिशा प्रदान करती हैं।

महोत्सव का आयोजन और गतिविधियां:
दो दिवसीय इस साहित्य महोत्सव के दौरान विभिन्न साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कार्यक्रम में पुस्तक प्रदर्शनी, कविता पाठ, साहित्यिक चर्चाएँ, और लोकसंगीत प्रस्तुतियाँ शामिल हैं। इस अवसर पर पत्रकार और शिक्षाविदों ने भी भाग लेकर विचार साझा किए।

स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग:
इस महोत्सव का आयोजन गाजीपुर के स्थानीय प्रशासन और साहित्यिक संस्थाओं के सहयोग से किया गया। अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों की उपस्थिति ने इसे वैश्विक स्तर का साहित्यिक कार्यक्रम बना दिया। आयोजकों ने बताया कि यह महोत्सव साहित्य, संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करेगा।

भविष्य की योजनाएं:
उपराज्यपाल ने आश्वासन दिया कि भविष्य में इस प्रकार के साहित्यिक और सांस्कृतिक महोत्सव नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे ताकि साहित्य और संस्कृति को बढ़ावा मिले और युवा पीढ़ी को साहित्य की ओर प्रेरित किया जा सके।

निष्कर्ष:
गाजीपुर में आयोजित यह दो दिवसीय साहित्य महोत्सव न केवल साहित्य और संस्कृति का महत्त्व उजागर करता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय साहित्य और लोककला को पहचान दिलाने का अवसर भी प्रदान करता है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की अध्यक्षता और विभिन्न हस्तियों की उपस्थिति से यह महोत्सव और भी प्रभावशाली बन गया।


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डिस्क्लेमर: यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है।

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