रिपोर्टर: सऊद अंसारी
गाजीपुर (Ghazipur) जिले के शादियाबाद (Shadiyabad) थाना क्षेत्र में जमीनी विवाद को लेकर एक पत्रकार पर कथित जानलेवा हमले का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद पत्रकारों में आक्रोश व्याप्त है और पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष व त्वरित कार्रवाई की मांग की जा रही है। मामला स्थानीय पत्रकार प्रदीप दुबे से जुड़ा है, जिन्होंने थाने में तहरीर देकर पांच लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
जमीन विवाद से जुड़ा मामला:
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रदीप दुबे, जो महुआ चैनल बंसल न्यूज (Mahua Channel Bansal News) से जुड़े बताए जा रहे हैं, ने आरोप लगाया है कि मौजा नसीरपुर, थाना जंगीपुर (Jangipur) में आराजी नंबर 286 में 6 धुर भूमि की रजिस्ट्री उनके नाम है। उनका कहना है कि उक्त भूमि पर कुछ लोग जबरन कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं, जिसके चलते लंबे समय से विवाद चल रहा है। इसी विवाद को लेकर उनके साथ मारपीट की घटना हुई।
रास्ते में रोककर मारपीट का आरोप:
तहरीर के मुताबिक, 02 मार्च 2026 की सुबह लगभग 8:30 बजे जब प्रदीप दुबे अपने घर से गाजीपुर (Ghazipur) जाने के लिए निकले, तभी कुछ लोगों ने उनके घर के सामने वाहन रोक लिया। आरोप है कि जैन विक्रम सिंह, निलेश सिंह, भोला ठाकुर, करमवीर उर्फ सोनू सिंह और लकी राजभर ने गाली-गलौज करते हुए लाठी-डंडों से मारपीट की। तहरीर में यह भी उल्लेख है कि हमलावरों ने मकान के शटर का ताला तोड़ने और जान से मारने की धमकी दी। इस मारपीट में उनके दाहिने हाथ की बांह में चोट आने की बात कही गई है।
पहले भी रोकने की कोशिश का जिक्र:
प्रदीप दुबे ने अपनी शिकायत में यह भी बताया कि 26 फरवरी 2026 की रात लगभग 11 बजे जब वह अपने ससुराल से लौट रहे थे, तब गांव के बाहर बिना नंबर प्लेट की बुलेट मोटरसाइकिल सवार व्यक्तियों ने उनकी गाड़ी रोकने का प्रयास किया। हालांकि उस समय वह किसी तरह वहां से निकलने में सफल रहे। उन्होंने इसे भी उसी विवाद से जुड़ी घटना बताया है।
पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा:
शिकायत मिलने के बाद शादियाबाद (Shadiyabad) थाना पुलिस ने मामले की जांच प्रारंभ की। पुलिस के अनुसार, जांच के उपरांत पांच नामजद आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 192(2), 115(2), 352 और 351(3) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस का कहना है कि प्रकरण की निष्पक्ष जांच की जा रही है और विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी।
पत्रकारों में आक्रोश:
घटना के बाद जिले के पत्रकार संगठनों में रोष देखने को मिला। पत्रकारों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएं चिंता का विषय हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था में पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। उन्होंने पुलिस अधीक्षक डॉ. ईरज राजा से त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर:
अब सभी की नजर इस बात पर है कि पुलिस प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है। यह मामला कानून-व्यवस्था के साथ-साथ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से भी जुड़ा माना जा रहा है। स्थानीय पत्रकार समुदाय ने स्पष्ट किया है कि वे निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की अपेक्षा रखते हैं।
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