गाजीपुर (Ghazipur): जिले के रामपुर मांझा थाना क्षेत्र में 14 अक्टूबर को झाड़ियों में एक अज्ञात नवजात शिशु (लड़का) का शव मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की। शव को कब्जे में लेकर पंचनामा तैयार किया गया और उसे मोर्चरी रूम (Mortuary Room) में सुरक्षित रखवाया गया।
72 घंटे तक चली शिनाख्त की कोशिशें:
शिशु की पहचान सुनिश्चित करने के लिए पुलिस ने लगातार प्रयास किए। आसपास के गांवों और इलाके में सूचना प्रसारित की गई, ताकि परिजन सामने आ सकें। लेकिन 72 घंटे बीत जाने के बाद भी किसी ने बच्चे की पहचान नहीं की। पुलिस के अनुसार, विभिन्न माध्यमों से सूचना देने के बावजूद परिजनों का कोई सुराग नहीं मिला।
समाजसेवियों और पुलिस ने मिलकर किया अंतिम संस्कार:
जब शिशु की पहचान नहीं हो सकी, तब 17 अक्टूबर को पुलिस ने सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की। कांस्टेबल (Constable) जय कुमार यादव, कांस्टेबल अजीत यादव और समाजसेवी कुँवर वीरेन्द्र सिंह (Kunwar Virendra Singh) के नेतृत्व में शव को मोर्चरी रूम से पोस्टमॉर्टम हाउस (Postmortem House) ले जाया गया, जहाँ आवश्यक चिकित्सकीय औपचारिकताएँ पूरी की गईं। इसके बाद शिशु का अंतिम संस्कार किया गया।
जांच में जुटी पुलिस:
घटना के संबंध में पुलिस जांच जारी है। रामपुर मांझा थाना (Rampur Manjha Thana) प्रभारी ने बताया कि नवजात की मृत्यु के कारणों की जानकारी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से स्पष्ट होगी। फिलहाल यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि शव झाड़ियों में कैसे पहुंचा और घटना के पीछे कौन जिम्मेदार है।
स्थानीय लोगों में संवेदना:
घटना से स्थानीय लोगों में गहरी संवेदना देखी गई। लोगों ने इस कृत्य को अमानवीय बताया और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की मांग की। समाजसेवियों ने पुलिस के मानवीय कदम की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रशासनिक जिम्मेदारी से आगे बढ़कर इंसानियत का उदाहरण है।
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