गाजीपुर की कचहरी में बदहाल व्यवस्थाएं, अधिवक्ता और वादकारी परेशान

रिपोर्टर: सऊद अंसारी

गाजीपुर (Ghazipur) स्थित तहसील और दीवानी न्यायालय परिसर में मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर अधिवक्ताओं ने गहरी चिंता व्यक्त की है। न्याय के लिए संघर्ष करने वाले वकील स्वयं अव्यवस्थाओं के बीच काम करने को मजबूर हैं। परिसर में शौचालय, पेयजल, वाहन स्टैंड, बैठने की व्यवस्था और पर्याप्त न्यायालय कक्षों की कमी लंबे समय से बनी हुई है, जिससे अधिवक्ताओं और वादकारियों दोनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

मूलभूत सुविधाओं का अभाव:
तहसील और दीवानी न्यायालय परिसर में शौचालय की व्यवस्था न होने से अधिवक्ताओं और फरियादियों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। विशेषकर महिला अधिवक्ताओं और वादकारियों को अधिक दिक्कत होती है। आवश्यकता पड़ने पर लोगों को आधा किलोमीटर दूर नगरपालिका के शौचालय का सहारा लेना पड़ता है। अधिवक्ताओं का कहना है कि इस संबंध में कई बार नगरपालिका और उच्चाधिकारियों से अनुरोध किया गया, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं हो सका है।

पेयजल संकट और खराब सार्वजनिक नल:
अधिवक्ताओं ने बताया कि न्यायालय परिसर में शुद्ध पेयजल की उपलब्धता नहीं है। चार सार्वजनिक नल महीनों से खराब पड़े हैं। गर्मी के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो जाती है। अधिकांश वकील दुकानों से बोतलबंद पानी खरीदते हैं या घर से पानी लाने को मजबूर होते हैं। फरियादियों को भी बाहर की दुकानों पर निर्भर रहना पड़ता है। हैंडपंप लगाने की मांग भी उठाई गई है ताकि राहत मिल सके।

बैठने की व्यवस्था और चैंबर की कमी:
परिसर में अधिवक्ताओं के लिए पर्याप्त चैंबर नहीं हैं। उन्हें टिन शेड के नीचे हर मौसम में कार्य करना पड़ता है। बारिश, गर्मी और सर्दी सभी में असुविधा झेलनी पड़ती है। अधिवक्ताओं का कहना है कि स्थायी चैंबर बनने से न केवल उन्हें बल्कि वादकारियों को भी सुविधा मिलेगी।

वाहन स्टैंड और जाम की समस्या:
न्यायालय और तहसील परिसर में स्थायी वाहन स्टैंड का अभाव है। प्रतिदिन सैकड़ों अधिवक्ता और हजारों फरियादी यहां आते-जाते हैं। बेतरतीब खड़े वाहनों के कारण परिसर में जाम की स्थिति बन जाती है और पैदल चलना भी कठिन हो जाता है। वाहन चोरी की घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है। अधिवक्ताओं ने व्यवस्थित स्टैंड निर्माण की मांग की है।

कोर्ट की कमी और लंबित मुकदमे:
दीवानी न्यायालय में सीमित संख्या में कोर्ट संचालित हो रहे हैं। न्यायिक अधिकारियों के स्थानांतरण के कारण कई बार कोर्ट खाली हो जाते हैं, जिससे मुकदमों के निस्तारण में देरी होती है। मुकदमों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अतिरिक्त कोर्ट की मांग लंबे समय से की जा रही है। अधिवक्ताओं का कहना है कि कोर्ट की संख्या बढ़ने से लंबित मामलों में तेजी आएगी और वादकारियों को समय पर न्याय मिल सकेगा।

सुरक्षा और एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट की मांग:
अधिवक्ताओं ने परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सुरक्षा पर्याप्त नहीं है और पूर्व में मारपीट जैसी घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। पुलिसकर्मियों की सतर्कता बढ़ाने की आवश्यकता जताई गई है। अधिवक्ताओं ने एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग दोहराई है, ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

कल्याण निधि, पेंशन और आयुष्मान कार्ड की जरूरत:
अधिवक्ता कल्याण निधि की राशि बढ़ाने की मांग भी की गई है। वर्तमान व्यवस्था के तहत लंबे समय बाद मिलने वाली राशि को अपर्याप्त बताया गया। 70 वर्ष से अधिक आयु वाले अधिवक्ताओं को पेंशन देने और नए अधिवक्ताओं को प्रारंभिक वर्षों में आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग उठाई गई है। साथ ही गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड बनाए जाने की आवश्यकता भी बताई गई, ताकि आर्थिक अभाव के कारण किसी को उपचार से वंचित न रहना पड़े।

प्रशासन का पक्ष:
मुहम्मदाबाद (Muhammadabad) की एसडीएम हर्षिता तिवारी ने कहा कि अधिवक्ताओं की समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। पेयजल व्यवस्था और शौचालय निर्माण के संबंध में संबंधित अधिकारियों से मांग की गई है। वहीं सेंट्रल बार के अध्यक्ष दयाशंकर दुबे ने भी समस्याओं को गंभीरता से उठाने की बात कही है।

अधिवक्ताओं का मानना है कि न्यायालय परिसर की आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करना आवश्यक है, ताकि न्याय व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो सके और वादकारियों को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिले।

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