Ghazipur: नशा के इंजेक्शन बेचने में बड़ा गैंग

Crime Report || आपमें से किसी ने राह चलते किसी कोने में किसी को गांजा या हिरोइन पिटे देखा है या या कहीं सुना है की ये हेरोइनबाज है या गंजेड़ी है. उम्मीद है जरुर सुना होगा. सवाल ये है की जब हेरोइन और गांजा प्रतिबंधित है तो ये आता कहाँ से हैं और अगर अवैध ढंग से आता है तो स्थानीय स्तर पर ये पुलिस और प्रशासन की निगाह से कैसे बच जाता है? सामज में फैलते इस जहर को ख़त्म करने की जितनी जिम्मेदारी पुलिस और प्रशासन की है उतनी ही इस समाज की है. बिना डरे और अपना नाम गुप्त रखते हुए आप किसी गलत कार्य की सूचना पुलिस को दीजिये और बोलिए की मेरा नाम गुप्त रखा जाये. साथ ही आप मीडिया को भी ये खबर दे सकते हैं.

गुरुवार को उत्तर प्रदेश के जनपद गाजीपुर से आई खबर के अनुसार सेंट्रल ब्यूरो आफ नारकोटिक्स के अधिकारियों की दो दिनों को छापेमारी में 50 लाख रुपये की नशीली दवा संग सुहवल के गरूआमकसूदपुर निवासी अमरदीप यादव व देवाबैरनपुर निवासी राजदेव यादव की गिरफ्तारी के बाद कई और नाम सामने आने लगे हैं। जनपद में सिर्फ दो ही नहीं बल्कि एक बड़ा गैंग है, जो इसमें शामिल है। जिसकी सीबीएन के अधिकारियों ने अब खोजबीन तेज कर दी है। विभागीय अधिकारियों की माने तो शीघ्र ही मामले में इससे भी बड़ी कार्रवाई हो सकती है।

दशकों पूर्व शहर से सटे बक्सूपुर चौराहा और गंगा पार के सुहवल थाना क्षेत्र में विभिन्न जगहों पर हेरोइन व ऐसी नशीली दवाएं बड़े पैमाने पर बिकती थी, लेकिन इसके बाद पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई से सभी सहम गए। करीब-करीब यह अवैध काराेबार समाप्त हो गया था। इसी बीच बुधवार को नारकोटिक्स विभाग की कार्रवाई ने सभी को चौंका दिया। बक्सूपुर चौराहा और सुहवल के गरूआमकसूदपुर के एक मेडिकल स्टोर से दो किलो 700 ग्राम ब्यूप्रेनारफीन, 250 ग्राम ट्रामाडोल और 1500 नशीली दवाओं का इंजेक्शन बरामद किया। सबसे बड़ी बात तो यह है कि इतने बड़े पैमान यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा था और ड्रग्स इंस्पेक्टर को इसकी भनक तक नहीं लगी

गिरफ्तार दोनों आरोपितों से गहन पूछताछ में सीबीएन को ज्ञात हुआ है कि इसमें पूरा एक रैकेट है, जो स्थानीय पुलिस की मिलीभगत से जिले में काफी सक्रिय है। सबसे बड़े पैमाने पर यह कारोबार सुहवल थाना क्षेत्र में हो रहा है। सूत्रों की माने तो जैसी पेटी व इंजेक्शन को सीबीएन ने बरामद किया है, वैसा गरूआमकसूदपुर चट्टी के मेडिकल स्टोर पर प्रतिदिन आटो में भरकर आता था। इसके बाद कुछ लोग बाइक से आते थे और एक-एक पेटी लेकर जाते थे। फूटकर में इंजेक्शन लेने के लिए मेडिकल स्टोर पर काफी भीड़ भी रहती है। अब सवाल यह है कि इतने बड़े पैमाने पर यह काराेबार वह भी नेशनल हाइवे के ठिक किनारे फल-फूल रहा था और स्थानीय पुलिस को इसकी भनक तक नहीं थी या फिर कुछ और ही कारण था। लेकिन पूरे घटनाक्रम पर अगर ध्यान दें तो पुलिस की बिना मिलीभगत से कोई इतनी बड़ी हिमाकत कर ही नहीं सकता है।

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