कोडीनयुक्त कफ सिरप मामले में सीएम योगी का बड़ा एक्शन, एफएसडीए ने ध्वस्त की पैरेलल सप्लाई चेन

रिपोर्टर: अनुज कुमार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के निर्देश पर उत्तर प्रदेश में कोडीनयुक्त कफ सिरप की अवैध आपूर्ति और नशे के रूप में उपयोग के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया गया। इस अभियान के तहत खाद्य एवं औषधि प्रशासन (Food Safety and Drug Administration–FSDA) ने पुलिस और एसटीएफ के साथ मिलकर प्रदेशभर में सघन जांच की, जिसमें पैरेलल सप्लाई चेन के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि कोडीन कफ सिरप का गैर-चिकित्सीय उपयोग किया जा रहा था और इसकी अवैध आपूर्ति संगठित तरीके से कई जिलों और राज्यों तक फैली हुई थी।
प्रदेशव्यापी सघन अभियान का संचालन:
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद एफएसडीए मुख्यालय की निगरानी में 52 जनपदों में विशेष अभियान चलाया गया। इस दौरान 332 से अधिक थोक औषधि विक्रय प्रतिष्ठानों की जांच की गई। जांच में 36 जनपदों में अवैध डायवर्जन की पुष्टि हुई, जहां कोडीनयुक्त कफ सिरप को तय मानकों और नियमों के विपरीत सप्लाई किया जा रहा था। अभियान के तहत 161 फर्मों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
गैर-चिकित्सीय उपयोग हुआ सिद्ध:
जांच में सामने आया कि कोडीन कफ सिरप का उपयोग चिकित्सीय जरूरतों के बजाय नशे के रूप में किया जा रहा था। लगभग 700 करोड़ रुपये से अधिक की संदिग्ध आपूर्ति को जांच के दायरे में लिया गया है। एफएसडीए की रिपोर्ट के अनुसार, इस अवैध कारोबार में सुपर स्टॉकिस्ट और होलसेलर के बीच कारोबारी संबंधों के ठोस सबूत भी मिले हैं।
अन्य राज्यों तक फैला नेटवर्क:
विवेचना के दौरान झारखंड (Jharkhand), हरियाणा (Haryana), हिमाचल (Himachal Pradesh) और उत्तराखंड (Uttarakhand) जैसे राज्यों में भी जांच की गई। अंतरराज्यीय स्तर पर नेटवर्क की पुष्टि के बाद प्रदेश में बड़े पैमाने पर क्रैकडाउन शुरू किया गया। इसके तहत नशे के रूप में सिरप का इस्तेमाल करने वालों और अवैध सप्लाई में शामिल लोगों पर एनडीपीएस (NDPS Act) और बीएनएस (BNS) के तहत सख्त कार्रवाई की गई।
पुलिस और एसटीएफ की कार्रवाई:
अभियान के दौरान पुलिस और एसटीएफ ने 79 अभियोग दर्ज किए और अब तक 85 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया। वर्तमान में भी कार्रवाई जारी है। इस मामले की गहराई से जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) समानांतर रूप से जांच कर रही है। सूत्रों के अनुसार, एसआईटी अपनी रिपोर्ट अगले माह मुख्यमंत्री को सौंप सकती है।
न्यायिक मोर्चे पर सरकार को राहत:
इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court) ने इस मामले में एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा चलाए जाने को सही ठहराया है। कोर्ट ने 22 मामलों में आरोपियों द्वारा दाखिल रिट याचिकाओं और गिरफ्तारी पर रोक से जुड़ी याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिससे कार्रवाई को कानूनी मजबूती मिली है।
लाइसेंसिंग प्रणाली को सख्त बनाने का प्रस्ताव:
एफएसडीए मुख्यालय ने थोक औषधि विक्रय लाइसेंसिंग प्रणाली को और अधिक सख्त व पारदर्शी बनाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव में थोक प्रतिष्ठानों की जियो टैगिंग, भंडारण क्षमता की पुष्टि और प्रतिष्ठानों की फोटोग्राफी अनिवार्य करने की बात शामिल है। इसके साथ ही टेक्निकल पर्सन के अनुभव प्रमाण पत्र का ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा सत्यापन कराने का भी सुझाव दिया गया है।
केंद्र सरकार को भी भेजा गया प्रस्ताव:
कोडीनयुक्त कफ सिरप के निर्माण, बल्क सप्लाई, वितरण और निगरानी को प्रभावी बनाने के लिए भारत सरकार (Government of India) से आवश्यक अधिसूचना और दिशा-निर्देश जारी करने का प्रस्ताव भी भेजा जा रहा है। इससे भविष्य में ऐसी अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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