Black Story Of कोडीन कफ़ सिरप! क्या है “Dhananjay Singh” की भूमिका? दुबई नहीं दिल्ली कनेक्शन!

योगी सरकार के ‘ऑपरेशन क्लीन’ के तहत उत्तर प्रदेश में कोडीन युक्त कफ सिरप फेंसिडिल के देश के सबसे बड़े अवैध नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। यह नेटवर्क प्रदेश के 40 जिलों तक फैला पाया गया है और अब तक सोनभद्र (Sonbhadra), गाजियाबाद (Ghaziabad) व रांची (Ranchi) से कुल 3.50 लाख से अधिक शीशियां जब्त की जा चुकी हैं। इस कार्रवाई में कुल 128 एफआईआर दर्ज हुईं और 1166 ड्रग लाइसेंस निरस्त किए गए। मामले में 6 बड़े चेहरे और कुल 68 अन्य गिरफ्तारियां दर्ज हुईं, जबकि मुख्य किंगपिन शुभम जायसवाल (Shubham Jaiswal) व कुछ सहयोगी दुबई (Dubai) में छिपे बताए जा रहे हैं। जांच में अमित सिंह टाटा (Amit Singh Tata) और एसटीएफ से बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह (Alok Singh) की गिरफ्तारी के बाद मामला राजनीतिक रूप भी ले चुका है और जौनपुर (Jaunpur) के पूर्व सांसद धनंजय सिंह (Dhananjay Singh) के आसपास सियासी बहस तेज हो गई है।

किस तरह खुला नेटवर्क का जाल:
पहली एफआईआर 18 अक्टूबर को सोनभद्र (Sonbhadra) जिले के रॉबर्ट्सगंज (Robertsganj) कोतवाली में दर्ज हुई। दीपावली के दौरान वाहनों की सघन जांच के दौरान एक ट्रक रोका गया, जिसमें नमकीन के बीच 1.19 लाख कोडीन युक्त कफ सिरप की शीशियां छिपी मिलीं। पकड़े गए ट्रक चालक हेमंत पाल, बृजमोहन शिवहरे और ट्रांसपोर्टर रामगोपाल धाकड़ की गिरफ्तारी हुई। जेल में पूछताछ के बाद पता चला कि खेप गाजियाबाद (Ghaziabad) से लोड हुई थी; मेरठ (Meerut) से सौरभ त्यागी पकड़ा गया और वसीम व आसिफ के नाम उभरे। इसके बाद रांची (Ranchi) व गाजियाबाद (Ghaziabad) में और ट्रक जब्त हुए जिनमें चूने व चावल की बोरियों के बीच सिरप की शीशियां छिपाई गई थीं।

शुभम जायसवाल और बांग्लादेश सप्लाई का एंगल:
जांच में शुभम जायसवाल (Shubham Jaiswal), वसीम व आसिफ के नाम गाजियाबाद (Ghaziabad) के नंदग्राम (Nandgram) थाने में दर्ज एफआईआर में उभरे। एसटीएफ व एफएसडीए की पड़ताल में पता चला कि शैली ट्रेडर्स (Shaili Traders) के जरिए कफ सिरप की खेप पश्चिम बंगाल (West Bengal) व बांग्लादेश (Bangladesh) तक पहुंचाई जा रही थी। शैली ट्रेडर्स व शिवाक्षा प्राइवेट लिमिटेड (Shivaksha Private Limited) के कागजात व बैंक ट्रांजैक्शन जांच में मिले।

फर्जी फर्म, फर्जी लाइसेंस और करोड़ों का ट्रांजैक्शन:
जांच में सामने आया कि कुछ मेडिकल स्टोर केवल कागज पर थे; सोनभद्र (Sonbhadra) में एक मेडिकल स्टोर का मालिक पेंटर निकला। उसके नाम पर पैन कार्ड बनवाकर, दुकान की फोटो लगवाकर और ड्रग लाइसेंस लेकर फर्म खोली गई। बंद होने के बाद भी उन खातों में रोजाना 20 से 40 लाख रुपए तक का लेनदेन होता रहा, जो शुभम की कंपनियों के खातों में जाता था। शैली ट्रेडर्स ने 2023 से 2025 के बीच 89 लाख शीशियां खरीदी दिखाई, जिनमें से 84 लाख शीशियां वाराणसी मंडल (Varanasi Division) के 93 मेडिकल स्टोर को भेजना दर्शाया गया।

अमित व आलोक का जुड़ाव और धनबाद फर्में:
आरोपियों के बयानों में कहा गया कि नरवे गांव (Narve) के विकास सिंह के माध्यम से अमित सिंह टाटा (Amit Singh Tata) और आलोक प्रताप सिंह (Alok Pratap Singh) का शुभम से संपर्क हुआ। जनवरी 2024 में धनबाद (Dhanbad) में श्रेयसी मेडिकल एजेंसी (Shreyasi Medical Agency) व देवकृपा मेडिकल एजेंसी (Devkripa Medical Agency) के नाम से फर्म बनाई गईं, जिनके वित्तीय लेन-देन शुभम व उसके सहयोगियों व सीए तुषार के जरिए संचालित हुए। दोनों ने 5–5 लाख रुपए लगाया और बदले में 22 लाख रुपए तक के लाभ का उल्लेख बयानों में है। जांच में पाया गया कि अनुभव प्रमाण पत्र व शपथ पत्र भी फर्जी थे।

डिजिटल सबूत व हाईटेक संपर्क:
एसटीएफ को मोबाइल चैट, जीएसटी रसीदें व ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड मिले। शुभम व उसके साथी फेसटाइम व जंगी ऐप के जरिए संपर्क रखते थे; ट्रकों की बुकिंग व भुगतान सीए तुषार के जरिए किए जाते थे। अमित के मोबाइल में सीए तुषार के साथ हुई व्हाट्सऐप चैट का ब्योरा मिला है और आलोक की फर्म के जीएसटी पेमेंट व चालान की तिथियां भी जांच में दर्ज हैं।

ईडी की जांच और मनी लॉन्ड्रिंग एंगल:
2 दिसंबर को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मामले में एंट्री की और शुभम, अमित, आलोक, वसीम, आसिफ सहित 50 से अधिक लोगों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग व निवेश के एंगल की जांच शूरू कर दी। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि कफ सिरप से हुई कमाई किस तरह दुबई (Dubai) में निवेश हुई या नहीं; कुल कारोबार लगभग 2000 करोड़ रुपए तक बताया जा रहा है।

शुभम का वीडियो बयान और उसके दावे:
दुबई (Dubai) से शुभम जायसवाल (Shubham Jaiswal) ने एक वीडियो जारी कर सफाई दी। वीडियो में उसने दावा किया कि फेंसिडिल कफ सिरप प्रतिबंधित नहीं है और यह नारकोटिक्स की श्रेणी में नहीं आता; यह सामान्य श्रेणी की दवा है जिसे वयस्क खांसी में लेते हैं। उसने कहा कि उसने ड्रग विभाग से RTI कर जानकारी मांगी थी और उसे बताया गया कि भंडारण या खरीद–बिक्री की कोई लिमिट तय नहीं है और भुगतान बैंक ट्रांजैक्शन से होना चाहिए। शुभम ने यह भी कहा कि कंपनी ने ड्रग एक्ट के नियमों का पालन किया होगा और कोडीन फॉस्फेट का कोटा केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) द्वारा अलॉट होता है; उसी के अनुरूप उत्पादन होता है और कंपनी से यही सिरप बेचा जाना चाहिए। उसने कहा कि उसने दवा दुकानों को सही ई-वेज व गिल्टी के जरिए सप्लाई की और जांच में ई-वे बिल व टोल नाके की रिकॉर्डिंग चेक की जा सकती है। शुभम ने कहा कि गाजियाबाद (Ghaziabad), रांची (Ranchi) व सोनभद्र (Sonbhadra) में पकड़ी गई शीशियां दिल्ली (Delhi), मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) व उत्तराखंड (Uttarakhand) की फर्मों से सप्लाई दिखाए गए थे और उन पर कार्रवाई होनी चाहिए, परंतु एसटीएफ ने उन पर कार्रवाई करने के बजाय उनके खिलाफ किया।

दुबई नहीं दिल्ली में होने का दावा: सूत्रों के आधार पर एक दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के अनुसार शुभम जायसवाल इस समय नई दिल्ली में छिपा हुआ है और वह कानूनी सलाह लेकर कोर्ट में आत्मसमर्पण की तैयारी कर रहा है। माना जा रहा है कि वह आने वाले कुछ दिनों में लखनऊ या प्रयागराज की अदालत में सरेंडर कर सकता है। इसी बीच सोशल मीडिया पर उसका एक वीडियो सामने आने से हलचल और तेज हो गई है। वीडियो में दिखे हालातों को लेकर यह दावा किया जा रहा है कि वह विदेश में नहीं, बल्कि भारत में ही कहीं ठहरा हुआ है।

इस मामले में पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। शुरुआती जांच में दुबई जैसे विदेशी स्थान को केंद्र में रखकर की जा रही कार्रवाई अब भटकाव जैसी प्रतीत हो रही है। इस गलत दिशा की वजह से समय और संसाधनों का नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। वहीं, कई जिलों की पुलिस टीमें अब भी उसकी तलाश में लगी हुई हैं।

कफ सिरप की बड़ी खेप बरामद होने के बावजूद गोदाम मालिक और संबंधित फर्मों के खिलाफ ठोस कार्रवाई न हो पाना भी गंभीर चिंता का विषय है। पूछताछ के दौरान प्रभावशाली हस्तक्षेप और जांच की धीमी रफ्तार ने आम लोगों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

धनंजय सिंह से संबंध और वायरल तस्वीरें:
अमित व आलोक की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर अमित व आलोक के साथ धनंजय सिंह (Dhananjay Singh) की कई तस्वीरें व वीडियो वायरल किए गए, जिनमें कुछ वीडियो में धनंजय अमित को अपना छोटा भाई कहते भी दिखे। किन्तु किसी भी एफआईआर में धनंजय का नाम दर्ज नहीं है और उनकी संलिप्तता अभी तक साबित नहीं हुई है; इसी वजह से धनंजय ने सीबीआई जांच की मांग की है ताकि व्यापक, अंतरराज्यीय जांच हो सके और आरोपों का निष्पक्ष निपटारा हो।

आलोक व वोटर लिस्ट विवाद व लग्जरी मकान:
आलोक प्रताप (Alok Pratap) ने सुल्तानपुर रोड (Sultanpur Road) पर धनंजय के मकान के सामने ही एक लग्जरी मकान बनवाया। पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर (Amitabh Thakur) ने मुख्य सचिव व डीजीपी को शिकायत में बताया कि विधानसभा क्षेत्र 367 मल्हनी (Malhani), जौनपुर (Jaunpur) की वोटर लिस्ट में धनंजय (Dhananjay), उनकी पत्नी व भाई तथा आलोक की मकान संख्या एक ही पते—मकान संख्या 17—पर दर्ज है, जिससे संदिग्ध कनेक्शन की सुगबुगाहट मिली।

गाड़ी नंबर 9777 का जिक्र:
एसटीएफ ने अमित के घर से एक फॉर्च्यूनर गाड़ी जब्त की, जिसका नंबर यूपी–9777 है; गाड़ी अमित की पत्नी साक्षी सिंह (Sakshi Singh) के नाम पर पंजीकृत पाई गई। जानकारों का कहना है कि धनंजय सिंह (Dhananjay Singh) के काफिले की कई गाड़ियों पर भी नंबर 9777 देखा गया है, जिससे यह संख्या चर्चा का विषय बनी।

सियासत और समाजवादी पार्टी के आरोप:
अमित व आलोक की गिरफ्तारी के बाद समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के नेताओं ने इस मुद्दे पर कड़े आरोप लगाए। पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने 2 दिसंबर को मऊ (Mau) में मीडिया से बात करते हुए कटाक्ष में कहा: “किसी को खांसी हो तो देसी दवा गुड़–सोंठ खा लेना… लेकिन बीजेपी सरकार के समय जो कफ सिरप आ रही है, उससे बचना चाहिए। कुछ लोग इससे मुनाफा कमा रहे हैं। अभी स्कीम चल रही थी वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया। यह ODOP नहीं है, OM है—वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया।” 2 दिसंबर को संसद के शीतकालीन सत्र में धर्मेंद्र यादव (Dharmendra Yadav) ने बिना नाम लिए कहा कि पूर्वांचल का एक बाहुबली संरक्षण में तस्करी करा रहा था। वहीं 3 दिसंबर को मछलीशहर (Machhlishahr) से सांसद प्रिया सरोज (Priya Saroj) ने सार्वजनिक रूप से सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि इस व्यापार के कारण कई लोगों की जान चली गई और सरकार को जवाबदेही तय करनी चाहिए। इन बयानों ने मामले में सियासी रंग भर दिया और विपक्षी दलों ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया।

स्वास्थ्य विभाग व मौतों का मामला:
यूपी स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अब तक फेंसिडिल कफ सिरप से किसी की मौत का प्रमाण नहीं मिला है। पिछले साल मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) व राजस्थान (Rajasthan) में बच्चों की मौत के मामले तमिलनाडु (Tamil Nadu) की एक अन्य कंपनी की दवा के बैच से जुड़े थे; उस दवा में डायथिलीन ग्लाइकॉल पाया गया था, जो जहरीला था। जबकि एबॉट (Abbott) कंपनी की फेंसिडिल में प्रयुक्त संघटक ट्राइप्रोलिडिन हाइड्रोक्लोराइड व कोडीन फॉस्फेट हैं, जिनका दवा के रूप में इस्तेमाल वयस्कों की खांसी के लिए होता है परन्तु लोग इसे नशे के उद्देश्य से भी प्रयोग करते रहे हैं।

सीबीआई, ईडी व एसटीएफ की समन्वित जाँच की मांग:
मामले की अंतरराज्यीय प्रकृति और राजनीतिक आरोपों के चलते कुछ पक्ष सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं जबकि ईडी (ED), एसटीएफ (STF) व जिला पुलिस पहले से ही अलग-अलग एंगल पर पड़ताल कर रही हैं। धनंजय सिंह (Dhananjay Singh) ने भी व्यापक जांच की मांग रखी है ताकि आरोपों का निष्पक्षता से परीक्षण हो सके और झूठी खबरों व राजनीतिक प्रहार को रोका जा सके।

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