Ghazipur: क्या अग्रवाल स्वीट्स को लेकर हुआ भ्रामक प्रचार? जांच रिपोर्ट का पूरा सच…

आपको तिरुपति बालाजी मंदिर (Tirumala Tirupati Devasthanams–TTD) में लड्डू प्रसाद को लेकर हुए विवाद के बारे में पता ही होगा। वहां विवाद तब छिड़ा जब जांच रिपोर्टों में घी में मिलावट और पशु-चर्बी जैसे तत्व पाए जाने के आरोप सामने आए। रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में मंदिर में तैयार किए गए लड्डुओं के एक हिस्से में घटिया और गैर-दुग्ध पदार्थों वाला घी इस्तेमाल किया गया था, जिस पर भावनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर कड़ा विरोध देखने को मिला था। बड़ा सवाल यही था कि लड्डू बनाने वालों ने घी तो नहीं बनाया, उन्होंने तो विश्वास पर घी ख़रीदा था, अब घी बनाने वाले ने ही धोखा दे दिया तो कार्रवाई किस पर होनी चाहिए?

ऐसा ही मामला उत्तर प्रदेश के जनपद गाजीपुर शहर की एक दुकान Agarwal Sweets (अग्रवाल स्वीट्स) से लिए गए Prem Brand (प्रेम ब्रांड) देशी घी के नमूने को लेकर सामने आया है, जहां नमूने को Lucknow (लखनऊ) स्थित प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया था, जहां यह पूरी तरह फेल पाया गया। खैर जानकारी के अनुसार अग्रवाल स्वीट्स इस घी का इस्तेमाल नहीं कर रहा है। अग्रवाल स्वीट्स घी नहीं बनता है, वह मिठाइयां बनता है और दिवाली के वक्त प्रेम घी के ब्रांड वाली शुद्ध देसी घी को प्रयागराज के डिस्टीब्यूटर से मंगवाया गया था। प्रेम घी ने शुद्धता का दावा किया था और अपने डब्बे पर लिखा था कि उनका घी शुद्ध है।

दीपावली से पहले 15 अक्टूबर 2025 को एफएसडीए और जिला प्रशासन ने अग्रवाल स्वीट्स की दुकान व इसके गोदाम पर छापेमारी की थी, जिसमें 1439 किलो यानी 9.35 लाख रुपये मूल्य का देशी घी सीज किया गया। इसी घी के नमूने को जांच के लिए भेजा गया था, जो पूरी तरह नकली साबित हुआ। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि घी में शुद्धता के मानक नहीं थे, जिसके बाद विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है।

सोशल मीडिया पर भ्रामक प्रचार: बताया गया कि जांच करने वाली टीम ने अग्रवाल स्वीट्स के अलावा अन्य दुकानों से भी सैंपल लिए थे जैसे खोया का सैंपल और समोसे का सैंपल। लेकिन इन सभी को जोड़ते हुए इसे अग्रवाल स्वीट से जुड़ा हुआ बताया गया और सोशल मीडिया पर एक भ्रामक प्रचार चलाया गया कि अग्रवाल स्वीट्स की मिठाइयां सुरक्षित नहीं है। जबकि जांच टीम ने अग्रवाल स्वीट्स की मिठाइयों को लेकर यह नहीं कहा कि वहां की मिठाइयां असुरक्षित है और ना ही उन पर कोई रोक लगी कि वो मिठाइयां नहीं बेच सकते हैं।

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जांच रिपोर्ट में नकलीपन का खुलासा: लैब जांच में पता चला कि प्रेम ब्रांड वाले घी में वनस्पति वसा (foreign fat), तिल का तेल और अत्यधिक आयोडीन वैल्यू पाई गई। ये सभी संकेत स्पष्ट करते हैं कि घी शुद्ध नहीं था और मानकों पर खरा नहीं उतरता। इसके बाद एफएसडीए ने Sandeep Agrawal (संदीप अग्रवाल), जो अग्रवाल स्वीट्स के इंचार्ज हैं, उन्हें नोटिस जारी किया है। साथ ही आदेश दिया गया है कि प्रेम ब्रांड वाला सीज किया गया घी न मिठाई बनाने में उपयोग किया जाए, न ही भंडारण या बिक्री के लिए रखा जाए।

घी पर दिए गए विवरण पर उठे सवाल: सीज किए गए घी के डिब्बे पर लिखा था— Danedar Desi Ghee (दानेदार देशी घी), Prem Ghee (प्रेम घी), और पैकिंग करने वाला नाम— Gauri Shankar Prem Narayan (गौरी शंकर प्रेम नारायण), Bara Bazar (बड़ा बाजार) Shikohabad (शिकोहाबाद), Firozabad (फिरोजाबाद)। इसके साथ FSSAI का लोगो भी लगा था, जिससे उपभोक्ताओं को यह दिखाया जा सके कि उत्पाद सुरक्षित और मानक के अनुसार है। लेकिन जांच के नतीजों ने इन दावों को गलत साबित कर दिया और यह घी नकली पाया गया।

अग्रवाल स्वीट्स का दावा: Agrawal Sweets (अग्रवाल स्वीट्स), Mahuabagh (महुआबाग) Ghazipur (गाजीपुर) के मालिक का कहना है कि यह घी उन्होंने Mahaveer Prasad Motilal Agrawal (महाबीर प्रसाद मोतीलाल अग्रवाल) Prayagraj (प्रयागराज) से खरीदा था, जिसका बिल और वाउचर भी उनके पास मौजूद है। इससे सवाल खड़ा होता है कि यदि घी नकली था, तो इसकी सप्लाई चेन कितनी बड़ी है और किस स्तर तक यह माल भेजा जाता रहा है।

प्रेम ब्रांड की सप्लाई पर बड़ा प्रश्न: सबसे अहम सवाल यह है कि Prem Ghee (प्रेम घी) और महाबीर प्रसाद मोतीलाल अग्रवाल प्रयागराज की सप्लाई कहां-कहां हो रही है? जांच में यह भी सामने आया है कि यह घी Amazon (अमेज़न) और JioMart (जियो मार्ट) जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध है। इसका अर्थ है कि यह मामला केवल एक दुकान या एक जिले तक सीमित नहीं है। अब चिंताएं इस बात पर बढ़ गई हैं कि यह ब्रांड कितने उपभोक्ताओं को गुमराह कर चुका है और कितनी जगहों पर यह उत्पाद पहुंच चुका है।

आगे की कार्यवाही पर नजर: एफएसडीए अब इस पूरे नेटवर्क की जांच में जुट चुका है और यह देखने की कोशिश कर रहा है कि इस नकली घी की सप्लाई किन-किन स्थानों तक फैली हुई है। आने वाले दिनों में यह जांच कई और खुलासे कर सकती है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और कौन-कौन इसके जिम्मेदार पाए जाते हैं।

#FakeGhee, #FSDAAction, #FoodSafety

Disclaimer:
यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है।

By Abhinendra

Journalist

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