सत्ता की ताकत और जनता की चाहत ने नए सांसद भवन की तस्वीर बदल दी। देश के इतिहास ये दूसरी बार है जब लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव हुआ हो। दरअसल सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सहमति न बनने की वजह से चुनाव करवाने की नौबत आई। इंडिया गठबंधन ने के. सुरेश को तो NDA गठबंधन ने ओम बिरला को अपना प्रत्याशी बनाया और ध्वनि मत से ओम बिरला, लोकसभा के अध्यक्ष चुन लिए गए। इस बीच सभी नव निर्वाचित सांसदों ने शपथ लिया, लेकिन कुछ सांसदों ने शपथ नही लिया, इसमें गाजीपुर के सांसद अफजाल अंसारी शामिल हैं, उन्हें उनके मुकदमे में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश की वजह से शपथ के लिए नही बुलाया गया। अब अफजाल अंसारी के शपथ न लेने पर पूर्व सांसद राधेमोहन सिंह ने इनपर गंभीर आरोप लगा दिए, इस वीडियो में देखिए:
गाज़ीपुर लोकसभा क्षेत्र से पूर्व सांसद राधेमोहन सिंह ने कहा कि अफजाल अंसारी को सुप्रीम कोर्ट का आदेश पता था, उस आदेश में क्या लिखा है ये भी पता था लेकिन फिर भी उन्होंने गाजीपुर की जनता के साथ धोखा किया, आज लोकसभा में गाजीपुर का प्रतिनिधित्व करने वाला कोई नहीं है।
क्या है पूरा मामला?
मंगलवार को नव निर्वाचित लोकसभा सांसदों को शपथ दिलाई गई। लेकिन समाजवादी पार्टी के सांसद अफजाल अंसारी को शपथ नहीं दिलाई गई। इस बारे में लोकसभा सचिवालय की ओर से सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया गया। इतना ही नहीं बुधवार को होने वाली स्पीकर के चुनाव में भी वोटिंग नहीं कर सकेंगे। इसके बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कोर्ट के इस आदेश को स्पष्ट करने के लिए कानूनी कार्रवाई की बात कही है।
असल में, अफजाल अंसारी को गैंगस्टर के एक केस में चार साल की सजा सुनाई गई थी। इस आदेश के कारण उनकी लोकसभा सदस्यता चली गई थी। अफजाल अंसारी ने इसके खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की, लेकिन वहां से राहत नहीं मिली। इसके बाद वह सुप्रीम कोर्ट गए थे।
14 दिसंबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश से उनकी सदस्यता तो वापस करा दी लेकिन कुछ पाबंदियां भी लगा दीं। इसमें कहा गया कि अफजाल अंसारी सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले सकते। कोर्ट के इसी आदेश को आधार बनाकर लोकसभा सचिवालय ने अफजाल को नए सदन में शपथ के लिए नहीं बुलाया। इसी के आधार पर उन्हें स्पीकर के चुनाव के लिए अयोग्य ठहराया जाएगा।
मंगलवार को यूपी से चुने गए तमाम सांसदों ने पद की शपथ ली। अफजाल अंसारी भी आए थे। वह अखिलेश यादव के पास बैठे रहे। लेकिन जब उनका नंबर अंत तक नहीं आया तो वह सदन से उठकर चले गए। अब अखिलेश यादव का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की व्याख्या के लिए कानूनी कार्यवाही करेंगे।