बिहार चुनाव में EVM सुरक्षा की असली तस्वीर

बिहार चुनाव की मतगणना को लेकर उत्सुकता अपने चरम पर है। मतदान संपन्न होने के बाद आम तौर पर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की सुरक्षा किस प्रकार सुनिश्चित की जाती है और स्ट्रॉन्ग रूम में रखी गई मशीनों की चाबी किसके पास होती है। आम धारणा यह भी रहती है कि वोटिंग खत्म होते ही EVM को सीधे स्ट्रॉन्ग रूम में भेज दिया जाता है, जबकि वास्तविक प्रक्रिया इससे कहीं अधिक विस्तृत और सुरक्षित होती है। EVM को स्ट्रॉन्ग रूम तक पहुंचने से पहले कई स्तरों पर जांच और सत्यापन की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।

वोटिंग के बाद जांच की प्रक्रिया:
मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद प्रीसाइडिंग अफसर EVM में दर्ज वोटों का परीक्षण करते हैं। इस दौरान पोलिंग बूथ पर मौजूद सभी उम्मीदवारों के एजेंट को सत्यापित कॉपी उपलब्ध कराई जाती है। जब सभी मशीनों की जांच पूरी हो जाती है, तब उन्हें स्ट्रॉन्ग रूम तक ले जाया जाता है। यह पूरा कार्य इलेक्टोरल ऑफिसर (Electoral Officer) की निगरानी में होता है। स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर और अंदर दोनों जगह कई लेवल की सिक्युरिटी लगाई जाती है और लगातार CCTV मॉनिटरिंग की जाती है।

स्ट्रॉन्ग रूम क्या होता है:
स्ट्रॉन्ग रूम वह सुरक्षित कमरा होता है जहां EVM मशीनों को सुरक्षित रखा जाता है। इसे आमतौर पर किसी सरकारी स्कूल या अत्यधिक सुरक्षित परिसर में तैयार किया जाता है। स्ट्रॉन्ग रूम में केवल एक ही प्रवेश द्वार होता है जबकि खिड़कियों को भी सील कर दिया जाता है। EVM को यहां भारी सुरक्षा व्यवस्था, वीडियोग्राफी और राजनीतिक दलों के एजेंटों की मौजूदगी में लाया जाता है, जिससे प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।

स्ट्रॉन्ग रूम की चाबी किसके पास होती है:
स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा और नियंत्रण का जिम्मा जिला निर्वाचन अधिकारी (District Election Officer) के पास होता है, जिन्हें चुनाव पर्यवेक्षक और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी सहायता प्रदान करते हैं। स्ट्रॉन्ग रूम को डबल लॉक सिस्टम से बंद किया जाता है। इनमें से एक चाबी रिटर्निंग ऑफिसर (Returning Officer) और दूसरी असिस्टेंट ऑफिसर (Assistant Officer) के पास रहती है। मतगणना के दिन स्ट्रॉन्ग रूम को सभी उम्मीदवारों या उनके प्रतिनिधियों की मौज़ूदगी में खोला जाता है। इस प्रक्रिया की पूरी वीडियोग्राफी कराई जाती है। इसके बाद EVM को काउंटिंग हॉल तक पहुंचाया जाता है, जहां उसकी सील और आईडी का पुनः परीक्षण किया जाता है।

ईवीएम से मतगणना की प्रक्रिया:
मतगणना वाले दिन EVM के कंट्रोल यूनिट में मौजूद रिजल्ट बटन दबाया जाता है, जिसके बाद उस यूनिट में दर्ज सभी वोट उम्मीदवारवार स्क्रीन पर दिखाई देते हैं। इसी तरह प्रत्येक मशीन का रिजल्ट निकालकर सभी प्रत्याशियों के वोटों की गिनती पूरी की जाती है। बिहार विधानसभा चुनाव के दो चरणों में मतदान 6 नवंबर और 11 नवंबर को हुआ था। इस चुनाव में 1951 के बाद सबसे अधिक 67.13 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो मतदाताओं की जागरूकता और चुनावी उत्साह को दर्शाता है।

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Disclaimer:
यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है।

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