इस साल देश और दुनिया की राजनीति में बड़े बदलावों की आहट सुनाई दे रही है। भारत के 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, जहां देश की करीब 17 प्रतिशत आबादी अपने लिए नई सरकार चुनेगी। इन चुनावों का असर न सिर्फ राज्यों की राजनीति पर पड़ेगा, बल्कि राष्ट्रीय सियासत की दिशा भी इससे प्रभावित हो सकती है। साथ ही भारत से बाहर बांग्लादेश, नेपाल सहित दुनिया के 36 देशों में आम चुनाव प्रस्तावित हैं, जिससे वैश्विक राजनीति में भी हलचल तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
भारत के पांच राज्यों में सियासी मुकाबला:
देश में जिन पांच राज्यों में चुनाव होने हैं, उनमें पश्चिम बंगाल (West Bengal), तमिलनाडु (Tamil Nadu), केरल (Kerala), असम (Assam) और पुडुचेरी (Puducherry) शामिल हैं। इन राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियां एक-दूसरे से काफी अलग हैं। कहीं सत्ता बचाने की चुनौती है तो कहीं दशकों पुरानी राजनीतिक परंपराओं को बदलने की कोशिशें तेज हो रही हैं।
पश्चिम बंगाल में चौथी जीत का दांव:
पश्चिम बंगाल में 14 साल से सत्ता संभाल रहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सामने इस बार भी BJP सबसे बड़ी चुनौती के रूप में खड़ी है। 2026 के चुनाव में अगर तृणमूल कांग्रेस (TMC) जीत दर्ज करती है तो ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनकर इतिहास रचेंगी। ऐसा करने वाली वे देश की पहली महिला होंगी। इससे पहले तमिलनाडु में जयललिता पांच बार मुख्यमंत्री बनी थीं, लेकिन उनका कार्यकाल लगातार नहीं रहा। पश्चिम बंगाल का चुनाव इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यहां का परिणाम राष्ट्रीय राजनीति में भी संदेश देगा।
असम में तीसरी बार सत्ता की कोशिश:
असम में पिछले 10 साल से BJP की सरकार है और पार्टी तीसरी बार सत्ता में लौटने की तैयारी में जुटी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीते छह महीनों में तीन बार राज्य का दौरा कर चुके हैं, जिससे चुनावी सरगर्मियां और तेज हो गई हैं। पार्टी ने 126 सीटों वाली विधानसभा में 100 से ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। असम में बांग्लादेश से जुड़े मुद्दे, घुसपैठ, सीमा सुरक्षा और असमिया पहचान जैसे सवाल प्रमुख हैं। BJP को रोकने के लिए कांग्रेस ने 8 से अधिक दलों के साथ गठबंधन किया है, जिसमें वामपंथी और क्षेत्रीय पार्टियां शामिल हैं।
तमिलनाडु की अलग सियासी पहचान:
तमिलनाडु ऐसा राज्य है जहां पिछले 60 साल से कांग्रेस या BJP की सरकार नहीं बनी है। यहां क्षेत्रीय दलों का दबदबा रहा है। इस बार BJP, जयललिता की पार्टी AIADMK के साथ गठबंधन कर सकती है। वहीं सिनेमा से राजनीति में उतरे सुपरस्टार विजय की पार्टी TVK भी मैदान में उतर चुकी है। तमिलनाडु का चुनाव इस बार त्रिकोणीय संघर्ष की ओर बढ़ता दिख रहा है, जिससे मुकाबला रोचक हो गया है।
केरल में लेफ्ट बनाम परंपरा:
केरल देश का इकलौता राज्य है जहां इस समय भी लेफ्ट की सरकार है। यहां सत्ता बदलने की परंपरा रही है, लेकिन 2021 में वाम मोर्चा LDF ने इस परंपरा को तोड़ते हुए लगातार दूसरी बार सरकार बनाई थी। इस बार कांग्रेस गठबंधन एंटी इनकम्बेंसी को भुनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। BJP अब तक केरल में एक भी विधानसभा सीट नहीं जीत पाई है, हालांकि पिछले लोकसभा चुनाव में त्रिशूर लोकसभा सीट जीतकर पार्टी ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी। दिसंबर 2025 में त्रिवेंद्रम (Thiruvananthapuram) नगर निगम चुनाव में BJP की जीत को भी अहम माना जा रहा है।
पुडुचेरी में गठबंधनों की परीक्षा:
पुडुचेरी देश की सबसे कम सीटों वाली विधानसभा है। 2021 में कांग्रेस सरकार गिरने के बाद AINRC-BJP गठबंधन ने सत्ता संभाली और एन. रंगासामी फिर से मुख्यमंत्री बने। यह पहला मौका था जब BJP सीधे तौर पर सत्ता का हिस्सा बनी। इस बार कांग्रेस, DMK के साथ गठबंधन कर वापसी की कोशिश में है और पिछली सरकार गिरने के मुद्दे को एंटी इनकम्बेंसी के रूप में पेश करना चाहती है।
बांग्लादेश में 35 साल बाद बदलाव की संभावना:
भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश (Bangladesh) में हालात ऐतिहासिक मोड़ पर हैं। शेख हसीना के तख्तापलट के बाद पहली बार चुनाव हो रहे हैं। शेख हसीना भारत आ गई हैं और उनकी पार्टी अवामी लीग के चुनाव लड़ने पर बैन लगा दिया गया है। विपक्षी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी BNP की नेता खालिदा जिया का निधन हो चुका है। ऐसे में BNP के चुनाव जीतने की संभावना सबसे ज्यादा मानी जा रही है। माना जा रहा है कि खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान देश के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो बांग्लादेश को 35 साल बाद नया प्रधानमंत्री मिलेगा।
नेपाल में जेन-जी आंदोलन के बाद चुनाव:
नेपाल (Nepal) में 5 मार्च को मतदान होना है। जेन-जी आंदोलन के बाद यह पहला आम चुनाव होगा। आंदोलन के बाद 10 कम्युनिस्ट पार्टियों ने मिलकर नई नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी का गठन किया है। इस गठबंधन को चुनाव में सबसे बड़ा दावेदार माना जा रहा है। नेपाल का यह चुनाव देश की राजनीतिक स्थिरता के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
इजराइल में जंग के बाद जनादेश:
गाजा में फिलिस्तीन और इजराइल (Israel) के बीच जंग रुकने के बाद यह पहला आम चुनाव होगा। पिछले कई चुनावों से कोई भी पार्टी स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं कर पाई है। इस बार भी गठबंधन सरकार बनने की संभावना जताई जा रही है। बेंजामिन नेतन्याहू इजराइल के सबसे लंबे समय तक सत्ता में रहने वाले प्रधानमंत्री हैं और इस चुनाव को उनके राजनीतिक भविष्य से जोड़कर देखा जा रहा है।
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