सहारा इंडिया परिवार वर्षों तक देश की सबसे बड़ी वित्तीय संस्थाओं में गिना जाता रहा है। सहारा श्री सुब्रत रॉय के नेतृत्व में खड़ी हुई इस विशाल व्यवस्था में कुछ ऐसे अधिकारी रहे, जिन पर सहारा श्री का गहरा भरोसा था। इनमें सबसे प्रमुख नामों में ओ.पी. श्रीवास्तव, सहारा समूह के वरिष्ठ अधिकारी और डिप्टी डायरेक्टर, भी शामिल रहे।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 21 नवंबर 2025 को कोलकाता में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें ₹1.79 लाख करोड़ के alleged मनी-लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई सहारा से जुड़े अब तक के सबसे बड़े ऑपरेशन में से एक मानी जा रही है।
सहारा श्री और ओ.पी. श्रीवास्तव की दोस्ती कैसे बनी?
सहारा के विस्तार वाले दौर में ओ.पी. श्रीवास्तव संगठन से जुड़े और धीरे-धीरे प्रशासनिक ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने लगे। पुराने कर्मचारियों के अनुसार, सहारा श्री ऐसे अधिकारियों पर भरोसा करते थे जो जमीनी स्तर के काम, शाखाओं की निगरानी और प्रशासनिक समन्वय में दक्ष हों।
इसी भरोसे और वर्षों की कार्य-शैली के आधार पर दोनों के बीच मजबूत कार्य-आधारित दोस्ती विकसित हुई, जो समय के साथ सहारा समूह के मुख्य प्रबंधन का हिस्सा बन गई।
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सहारा समूह में ओ.पी. श्रीवास्तव की भूमिका
मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से, ओ.पी. श्रीवास्तव की भूमिका अनेक महत्वपूर्ण क्षेत्रों में थी जैसे सहारा की विभिन्न यूनिट्स और शाखाओं का उच्च स्तरीय ऑपरेशनल कंट्रोल, निवेशकों और एजेंटों से जुड़े मामलों की मॉनिटरिंग,वरिष्ठ प्रबंधन और फील्ड नेटवर्क के बीच समन्वय, कई प्रशासनिक निर्णयों को लागू करने में भूमिका और उनकी छवि संगठन के “कोर मैनेजमेंट सर्किल” में गिने जाने वाले अधिकारियों की रही है।
सहारा श्री की मृत्यु के बाद ओ.पी. श्रीवास्तव की भूमिका
2024 में सहारा श्री के निधन के बाद संगठन के भीतर नेतृत्व को लेकर अस्थिरता बढ़ी। बताया जाता है कि इस समय ओ.पी. श्रीवास्तव ने समूह की आंतरिक बैठकों और प्रशासनिक फैसलों में सक्रियता दिखाई। हालाँकि, इसी अवधि में सहारा से जुड़े पुराने मामलों की जांच भी तेज होती गई, जिनमें संपत्ति लेन-देन, निवेशकों की राशि और फंड ट्रांसफर से जुड़ी शिकायतें प्रमुख थीं।
ED ने 21 नवंबर 2025 को ओ.पी. श्रीवास्तव को क्यों गिरफ्तार किया?
ED की कार्रवाई लगभग ₹1.79 लाख करोड़ के alleged मनी-लॉन्ड्रिंग केस से जुड़ी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ताज़ा जांच में ED ने कई गंभीर तथ्य उजागर किए:
1. गोपनीय संपत्तियों की बिक्री
ED ने आरोप लगाया कि सहारा समूह ने गुप्त और “कैश-हेवी” सौदों के माध्यम से बड़ी संपत्तियाँ बेचीं। महाराष्ट्र के एंबी वैली स्थित 707 एकड़ जमीन पहले ही अटैच की जा चुकी है। सहारा प्राइम सिटी लिमिटेड की 1,023 एकड़ जमीन (लगभग ₹1,538 करोड़ की अनुमानित कीमत) को भी विभिन्न शहरों में पुनः-अटैच किया गया। ED का दावा है कि इन सौदों में बड़े कैश ट्रांजैक्शन थे जिन्हें शेल कंपनियों के माध्यम से डायवर्ट किया गया।
2. निवेशकों के फंड और alleged पोंज़ी-जैसी संरचना
ED के अनुसार— लाखों निवेशकों से जमा की गई राशि समय पर वापस नहीं की गई। निवेशकों को बार-बार “री-इन्वेस्टमेंट” के लिए प्रेरित किया गया। यह alleged फंड शेल कंपनियों और गुप्त संपत्ति सौदों में स्थानांतरित किया गया।
3. जांच का बड़े पैमाने पर विस्तार
सहारा से जुड़ी 500 से अधिक FIRs देशभर में दर्ज हैं। इनमें से 300+ मामले PMLA के तहत दर्ज हैं। ED ने कई शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत भी दाखिल की है। जांच एजेंसी का दावा है कि ओ.पी. श्रीवास्तव कई महत्वपूर्ण लेन-देन और प्रशासनिक फैसलों से जुड़े रहे, जिसके चलते गिरफ्तारी जरूरी समझी गई।
मामला कहाँ जा रहा है?
ओ.पी. श्रीवास्तव की गिरफ्तारी इस बात का संकेत है कि ED अब सहारा समूह के कथित वित्तीय घोटालों को व्यापक स्तर पर खंगाल रही है। यह कार्रवाई लाखों निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि आरोप सिद्ध होने पर प्रभावित लोगों के लिए फंड रिकवरी की संभावना बढ़ सकती है।
हालाँकि, कानूनी प्रक्रिया लंबी होगी—संपत्ति बिक्री, दस्तावेज़ों की जाँच, ट्रांजैक्शन ट्रेल और अदालत में सबूतों की पुष्टि में काफी समय लग सकता है। फिलहाल, मामला सक्रिय जांच के चरण में है और अंतिम निर्णय न्यायालय के अधीन रहेगा।
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Disclaimer: इस वीडियो/न्यूज रिपोर्ट में दी गई जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स और सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है, जिसका उद्देश्य केवल सूचना प्रदान करना है। सभी आरोप जांच और न्यायालय की प्रक्रिया के अधीन हैं, तथा किसी भी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जाता जब तक कोर्ट अपना अंतिम निर्णय न दे।