ड्रग्स, गांजा, जहरीली शराब और मौत! सावधान अगला नाम आपके किसी अपने का?

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Special Report || मंगलवार को हनुमान जी की पूजा करने के बाद मैंने भगवान् से पूछा क्या वाकई जिम्मेदारों को उनकी कमियों को बताने वाला धर्म विरोधी होता है या अपने मातृभूमि भूमि से प्यार नहीं करता? क्या वाकई हमारी रक्षा करने वाले ही हमारा शोषण करते हैं? जब हमारे देश का प्रत्येक व्यक्ति चाहे वो आम जनमानस हो, पुलिसकर्मी, सुरक्षाकर्मी हो, नेता हो या अधिकारी हो, जब वो अपने देश से प्यार करता है तो फिर क्यों अपने देश का कोई व्यक्ति अपने अधिकारों की मांग करता है तो उसे ही कुचल दिया जाता है, बेरोजगारी से परेशान युवा है, महंगाई से त्रस्त गरीब और मिडल क्लास है. हमारे देश के गृह मंत्रालय के तहत आने वाली NCRB की रिपोर्ट के अनुसार 2021 में आत्महत्या से कुल 164,033 लोगों की जान गई जिसने 1967 का रिकॉर्ड तोड़ दिया है और इसमें सबसे ज्यादा उन लोगों ने आत्महत्या की जिनकी वार्षिक आय 1 लाख से कम थी. ये तो सब चली रहा है लेकिन एक ऐसा जहर हमारे समाज में फ़ैल रहा है जिसपर आसानी से किसी की निगाह नहीं जाती. उस जहर नाम है हिंसा और अवैध नशा. नाबालिक हो या युवा या बुजुर्ग करीब करीब सब इसके शिकार हो गये हैं. चरस, गांजा, ड्रग्स, नशीले इंजेक्शन, नकली शराब, आज कल इन सबका सेवन तेजी से बढ़ गया है और हमारे बहादुर पुलिस कर्मी समय समय पर इसे पकड़ते भी हैं, बेचने वालों को सजा भी होती है लेकिन ये ख़त्म ही नहीं होता पता नहीं कहाँ से आता है. गुजरात प्रांत से कई अखबार प्रकाशित होते हैं, नवम्बर 2021 में ऐसी ही एक अखबार में खबर छपा की “ड्रग्स की राजधानी गुजरात”, पिछले पांच महीने में 24,800 करोड़ का ड्रग्स बरामद. क्या यह किसी भयानक ख़तरे का संकेत नहीं है? संदेश अखबार गुजरात को ड्रग्स कैपिटल लिख रहा है. अन्य खबरों में पाकिस्तान और अफगानिस्तान से ड्रग्स आने का ज़िक्र मिलता है और यहां के नागरिकों के पकड़े जाने का भी. अगर हमारी सीमाएं चाक-चौबंद हैं तब फिर 24000 करोड़ का ड्रग्स कैसे एक राज्य में प्रवेश कर रहा है? ये तो छोड़िये आज कल के किशोर और युवा हिंसा की विचारधारों से भी प्रेणित हो रहे हैं. छोटे छोटे गैंग बनाते हैं और छोटी छोटी बात पर हत्या भी कर देते हैं. हर गली मोहल्लों में हिंसा इनके सर पर सवार है, इसका कौन जिम्मेदार है?

मैंने तो हनुमान जी से सवाल पूछ लिया और प्रभु भी समय आने पर किसी न किसी माध्यम से जवाब जरूर देंगें. खैर इसका जबाब तो हमें रामायण के अलग अलग धार्मिक पुस्तकों में भी मिल जाता है कि आखिर राम राज्य में प्रभु राम पुरुषोत्तम कैसे बने और रावन के अहंकार ने उसे नाश कैसे किया?

पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अवैध शराब और ड्रग के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की समीक्षा किया था। इस दौरान सीएम योगी ने ड्रग और अवैध शराब माफियाओं के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई करते हुए नशे के कारोबार में लिप्त लोगों के पोस्टर सार्वजनिक स्थानों पर लगाने के निर्देश दिए है।

यही नहीं उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) का गठन कर दिया है। इसके तहत जोन/क्षेत्रीय स्तर पर नारकोटिक्स पुलिस थाना की स्थापना की जाएगी। पहले चरण में बाराबंकी और गाजीपुर में नारकोटिक्स थाना स्थापित किए जाएंगे। वहीं एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स पूरे उत्तर प्रदेश में तीन रीजन ( वेस्ट, सेंट्रल व ईस्ट ) में विभाजित किया गया है।

अब यूपी के जनपद गाजीपुर के मुहम्मदाबाद कोतवाली क्षेत्र के पुरानी कचहरी मंगल बाजार स्थित एक किराना दुकान से पुलिस ने रविवार रात करीब 50 हजार रुपये की प्रतिबंधित दवाइयों के इंजेक्शन, निडिल एवं सिरिंज बरामद की। साथ ही एक महिला को भी गिरफ्तार किया। एसपी ने सोमवार को पत्रकार वार्ता में खुलासा करते हुए बताया कि बरामद दवाइयों के प्रयोग से अफीम का 60 गुना से ज्यादा नशा होता है। इसमें दवा सप्लाई करने वाले दो एमआर के नाम सामने आए हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की एक जिले की कंपनी ऐसी दवाइयों की सप्लाई लगातार पूर्वांचल में कर रही है। इसकी छानबीन के लिए एसपी ग्रामीण के नेतृत्व में टीम गठित की गई है।

पुलिस ने बड़ी कारवाई करते हुए समाज के हित में अच्छा काम किया है लेकिन उन सवालों का जबाब अभी मिलना बाकि है की आखिर बार बार कार्रवाई होने के बाद भी जनपद में ऐसी चीज़े कहाँ से आती हैं? जिमीदारी समाज की भी बनती है वो अपने आस पास गांजा या ड्रग्स का सेवन करते किसी को दें तो तुरंत पुलिस को बताये ताकि ये पता चल सके की ये बेचता कौन है?

समाज की जिम्मेदारी अपने किशोरों और युवाओं पर ध्यान देने की भी है. हिंसा को बढ़ावा देने वाली बातों से दूर करने की जरुरत है. कुछ लोग अपने ही गह्रों में अपने बचों को हिंसा करने की राय देते हैं अपने देश के कानून से खिलवाड़ करने के कहते हैं. उन लोगों को ध्यान देना चाहिए वो जैसा समाज बना रहे हैं वो देश हित में नहीं है और जो देश के कानून से खिलवाड़ करता है उसे क्या है वो आपको पता ही है. खैर अगर आज ऐसा समाज नहीं बनता तो गाजीपुर के नंदगंज के सत्यम की हत्या नहीं होती.

वर्चस्व की लड़ाई में दो पक्षों के बीच तनातनी में नंदगंज थाना क्षेत्र के बरहपुर गांव के सत्यम की हत्या हुई है। वहीं, गिरफ्तार किए गए हत्यारोपियों का कहना है कि मृतक द्वारा मारपीट और गाली-गलौज किया जाता था। इससे तंग आकर उसकी हत्या कर दी। रविवार की रात पहाड़पुर पुलिया के पास पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त सेटरिंग का पटरा और बाइक बरामद कर लिया।

सत्यम सिंह हत्याकांड का खुलासा सोमवार को एसपी रोहन पी बोत्रे ने सोमवार को किया। उन्होंने बताया कि 25 अगस्त की रात बरहपुर गांव में हुई सत्यम की हत्या के मामले में मुकदमा दर्जकर आरोपियों को पकड़ने में पुलिस जुटी हुई थी। छानबीन के दौरान हत्यारोपी नंदगंज निवासी अमन यादव और दो किशोरों का नाम प्रकाश में आया। ध्यान दीजयेगा इस हत्या काण्ड में दो नाबालिक भी शामिल हैं.

करंडा थाना क्षेत्र के नारी पचदेवरा गांव निवासी सत्यम (24) नंदगंज बाजार में किराये के मकान में अपनी माँ के साथ रहता था। ख़बरों के अनुसार वो किसी कॉलेज से वहीँ पढाई करता था.

छोटे छोटे गैंग बनाकर मारपीट करने वाले इन किशोरों और युवाओं पर अंकुश लगाने की जरुरत है. इसके अभिभावक, स्कूल और पुलिस को मिलकर नई योजना पर काम करना होगा. स्कूल के अन्दर और बाहर ऐसी गतिविधि करने वालों पर ध्यान देना होगा. गंभीरता, निष्पक्षता और सतर्कता बहुत जरुरी है.

खैर आज कल तो पीड़ित भी अपने स्वार्थ और बदला के लिए किसी को फसा देता है. जाँच में कमी की वजह से बेवजह किसी को जेल की हवा खानी पड़ती. उसके आत्मसम्मान को तार तार कर दिया जाता है. चाहे वो एक स्थानीय पत्रकार ही क्यों हो?

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