देवरिया: फर्जी मुकदमे के आरोप में अधिवक्ताओं का विरोध प्रदर्शन

रिपोर्टर – गुड़िया मद्धेशिया

देवरिया (Deoria) जिले में सदर कोतवाल विनोद कुमार सिंह के खिलाफ अधिवक्ताओं का आक्रोश खुलकर सामने आ गया है। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया है कि बिना किसी समुचित जांच के एक अधिवक्ता के खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज किया गया है। इसी को लेकर कचहरी परिसर में विरोध प्रदर्शन किया गया और कोतवाल को तत्काल हटाने की मांग उठाई गई। अधिवक्ताओं का कहना है कि यह कार्रवाई न केवल न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि अधिवक्ता समाज को बदनाम करने की साजिश भी प्रतीत होती है।

बिना जांच मुकदमा दर्ज करने का आरोप:
अधिवक्ताओं का आरोप है कि सदर कोतवाल विनोद कुमार सिंह ने मामले की सच्चाई जाने बिना ही एक अधिवक्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं ने बताया कि मुकदमे में जिस तारीख और समय का उल्लेख किया गया है, उस दौरान संबंधित अधिवक्ता कचहरी में न्यायिक कार्य में व्यस्त थे। ऐसे में घटना का विवरण पूरी तरह संदिग्ध और तथ्यों के विपरीत बताया जा रहा है।

कचहरी में मौजूदगी का दावा:
अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि जिस समय घटना दर्शाई गई है, उस समय अधिवक्ता न्यायालय परिसर में मौजूद थे और अपने पेशेगत दायित्वों का निर्वहन कर रहे थे। इस आधार पर अधिवक्ताओं ने मुकदमे को फर्जी करार देते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की। उनका कहना है कि यदि समय और स्थान की सही जांच की जाती, तो मुकदमा दर्ज ही नहीं होता।

संघ के पूर्व अध्यक्ष का बयान:
तहसील अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि जब तक अधिवक्ता पर दर्ज फर्जी मुकदमा वापस नहीं लिया जाता, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने इसे अधिवक्ता समाज के सम्मान से जुड़ा विषय बताया और कहा कि इस तरह की कार्रवाई से न्यायिक व्यवस्था की छवि धूमिल होती है।

एसडीएम को सौंपा गया ज्ञापन:
विरोध प्रदर्शन के क्रम में अधिवक्ताओं ने सदर एसडीएम श्रुति शर्मा को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और सदर कोतवाल विनोद कुमार सिंह को तत्काल पद से हटाने की मांग की गई। अधिवक्ताओं ने कहा कि यदि निष्पक्ष जांच होती है, तो सच्चाई स्वतः सामने आ जाएगी।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी:
अधिवक्ताओं ने साफ चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बिना जांच किसी अधिवक्ता पर फर्जी मुकदमा दर्ज करना स्वीकार्य नहीं है। जब तक मुकदमा वापस नहीं होता, तब तक विरोध जारी रहेगा।

न्याय व्यवस्था पर उठे सवाल:
इस पूरे प्रकरण ने स्थानीय स्तर पर न्याय व्यवस्था और पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि ऐसे मामलों में निष्पक्षता नहीं बरती गई, तो आम जनता का भरोसा भी कमजोर होगा। फिलहाल प्रशासन की ओर से मामले में आगे की कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।

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